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अलीगढ़ शराब कांड: आरोपी अनिल चौधरी को वीआईपी सुविधा, वायरल हुआ वीडियो
Wed, 02 Jun 2021 06:46 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 06:46 PM IST
सार
अनिल का गद्देदार तख्त पर तकिया लेकर बैठे होने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। मगर एसपी देहात का कहना है कि कई दिनों से चल रही पूछताछ और दोपहर में गर्मी के चलते उसने बीपी की शिकायत बताई थी। इसीलिए उसो बाहर बैठने की अनुमति दी गई थी।
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अनिल चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अलीगढ़ में तबाही मचाने वाली जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी रालोद नेता अनिल चौधरी इन दिनों पुलिस रिमांड पर है। हालांकि, उसका रिमांड बुधवार सुबह पूरा हो जाएगा और जेल में दाखिल कर दिया जाएगा। मगर उसे रिमांड के दौरान सुविधाएं देने का मुद्दा उठ रहा है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुआ है, जिसमें वह थाने में गद्देदार तख्त पर बैठा दिख रहा है।
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बता दें कि अनिल को 28 मई को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 29 मई को उसकी तीन दिन की रिमांड मंजूर हुई और यह रिमांड दो जून की सुबह पूरी होगी। इस दौरान उसे खैर थाने में पूछताछ के लिए रखा गया है। इस दौरान जब पुलिस को किसी जगह ले जाने की जरूरत होती है तो ले जाती है।
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इसी बीच मंगलवार को उसका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह थाने की हवालात के बाहर गैलरी में एक गद्देदार तख्त पर तकिया हाथ में लिए बैठा दिख रहा है। इस वीडियो को लेकर कई तरह के सवाल खडे़ हो रहे हैं।
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एसपी बोले- बीपी की शिकायत के कारण जंगले के सहारे बैठाया गया
एसपी देहात शुभम पटेल का कहना है कि यह सही है कि अनिल का गद्देदार तख्त पर तकिया लेकर बैठे होने का वीडियो वायरल हो रहा है। मगर उसकी सही वजह यह है कि कई दिन से चल रही पूछताछ और दोपहर में गर्मी के चलते उसने बीपी की शिकायत बताई।
इस पर उसे हवालात से बाहर लाकर जंगले के सहारे बैठाया गया। वहां बैठने के लिए पहले से एक तख्त पड़ा है। जिसपर कुछ देर वह बैठा। बाद में फिर हवालात में भेज दिया गया। इसमें किसी तरह की सुविधा देने जैसी कोई बात नहीं है।
रिमांड में तबीयत बिगड़ी तो पुलिस जिम्मेदार
वहीं, वरिष्ठ क्रिमिनल अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित का कहना है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान अपराधी को हवालात से बाहर ही रखा जाएगा। निशानदेही के लिए ले जाया जाएगा। न्यायालय के आदेश के अनुसार उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
इस दौरान उसके अधिवक्ता भी निगरानी में न्यायालय के आदेश पर रहते हैं। रिमांड के लिए जेल से निकलने और वापस दाखिल होने पर उसे मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। अगर तबीयत से लेकर शरीर में किसी तरह की दिक्कत आई तो उसकी जिम्मेदार पुलिस होगी।