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एक घंटे बाद ही ‘लाडले’ ने दिया सुराग, इंदौर भागने का था ख्वाब
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बरामद ज्वैलरी और रुपयों दिखाते सीओ अनिल समानिया, क्वार्सी इंस्पेक्टर छोटेलाल।
- फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
कहते हैं कि हर अपराधी मौका-ए-वारदात पर अपने खिलाफ कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है। सराफ के घर लूट और उसकी पत्नी के हत्याकांड में भी पुलिस को कुछ ऐसे ही सुराग हाथ लगे। वारदात की जानकारी के एक घंटे बाद ही पुलिस का सबसे पहला शक मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की वजह से सराफ के बेटे पर ही गया था। मगर, हर पुलिस अधिकारी/कर्मचारी के मन में एक ही बात कौंध रही थी कि जब योगेश घर का इकलौता है और आगे सब कुछ इसी का है तो ये वारदात को अंजाम क्यों देगा?
जांच आगे बढ़ी तो हर मोड़ पर मां-बाप के इकलौते और बिगड़ैल बेटे योगेश उर्फ राजा के खिलाफ साक्ष्य मिलते चले गए। आखिरी सुराग उस वक्त हाथ लगा, जब एक कॉल योगेश के मोबाइल पर आई। बस उसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना शुरू कर दिया। वरना, योगेश की प्लानिंग यहां से भाग कर इंदौर जाने की थी। अगर, वह निकल जाता तो शायद कभी आरोपी होने के नाते वह पकड़ा जाता। एक करोड़ कीमत के माल का बंदरबांट होने के कारण उसका मिल पाना मुश्किल होता।
ऐसे मिलते गए सुराग
- सबसे पहले बहनों ने जताया शक : - वारदात की सूचना सराफ ने अपनी दोनों विवाहित बेटियों पायल व काजल के अलावा खुद फोन करके बेटे योगेश को दी। बेटियां समय पर पहुंच गईं, मगर बेटा कुछ देर बाद पहुंचा। उन्होंने अंदर का नजारा देखते ही भाई पर शक जताया। करीब छह बजे पुलिस ने उनसे बातचीत की, वे खुलकर नहीं बोल पा रही थीं। मगर, उन्होंने बताया था कि इस तिजोरी के अंदर के लॉकर में पापा गिरवी वाले जेवरात रखते थे। जिसे खोलने का तरीका मम्मी, पापा के अलावा भइया जानता है। जिसे आसानी से कोड की मदद से खोला गया है। तिजोरी का मुख्य ताला काटा गया है। अंदर का लॉकर कोड से खुला है। इस पर पुलिस का माथा ठनका था। फिर बहनों ने लगातार अपने भाई से यही कहा कि अगर उसे कुछ पता है तो साफ-साफ बता दे। मगर भाई चुप्पी साधे रहा। पुलिस के सवालों पर बहनों ने ही वह सूची बनवाई, जिसमें कौन कौन लोग घर में आने पर दरवाजा खुलता था। उनमें परिवार के सदस्यों के अलावा बेटे के कुछ दोस्त थे और रिश्तेदार। बाकी कोई नहीं। इस पर भी बेटा व उसके दोस्तों पर शक गया था। कुछ दोस्तों को खंगाला गया। मगर उनका रिकार्ड दुरुस्त निकला। तीसरा बहनों ने यह भी बताया कि बेटा अकेले में मिलने आता था। लड़ झगड़कर रुपये भी ले जाता था।
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भाई के बदलते चेहरे से शक पुख्ता : - जब पुलिस ने बेटे से बातचीत का दौर शुरू किया तो उसे सीसीटीवी के वह फुटेज दिखाए, जिनमें एक युवक व एक युवती बाइक पर आते व जाते दिखे हैं। उन्हें देखकर उसके चेहरे की रंगत तो उड़ ही रही थी। साथ में जब उसके मोबाइल को सर्च किया गया तो उसमें 17 फरवरी का उसके नाम से इंदौर जाने का मथुरा से ट्रेन का ऑनलाइन टिकट बुक था। अगर उसका 17 का टिकट था तो वह गया क्यों नहीं? फिर जब उसकी मोबाइल लोकेशन लेकर पुलिस ने उससे बातचीत की तो वह दिन निकलने से लेकर दोपहर एक बजे तक की अपनी गतिविधियों को तो सही सही बताता गया। मगर एक बजे बाद की गतिविधियों पर चुप्पी साध गया, जबकि उसकी मोबाइल लोकेशन डेढ़ बजे से घटना स्थल पर ही थी। फिर यहां से एक घंटे बाद निकलकर अपने किराये वाले घर तक गया और पिता के कॉल पर वहां से लौटकर आया है। साथ में जो युवक युवती बाइक पर फुटेज में पाए गए थे, उनके मोबाइल से इनकी बातचीत पाई गई।
बेबी की कॉल ने यूं खोला भेद : - 20 फरवरी की दोपहर तक पुलिस इन साक्ष्यों पर काम कर ही रही थी। तभी करीब सात बजे पुलिस को एक कॉल योगेश के मोबाइल पर उसकी पत्नी की मिली, जिस कॉल को ट्रैक किया गया तो पूरा भेद खुल गया। उसमें वह अपनी पत्नी को बेबी नाम से संबोधित करते हुए कह रहा है कि सब ठीक चल रहा है। पुलिस दूसरी दिशा में काम कर रही है। तुम अब अपना अच्छे से इलाज कराना। बस इतने पर ही पुलिस का माथा ठनक गया और उसे गिरफ्तार करने का तय किया गया।
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कहते हैं कि हर अपराधी मौका-ए-वारदात पर अपने खिलाफ कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है। सराफ के घर लूट और उसकी पत्नी के हत्याकांड में भी पुलिस को कुछ ऐसे ही सुराग हाथ लगे। वारदात की जानकारी के एक घंटे बाद ही पुलिस का सबसे पहला शक मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की वजह से सराफ के बेटे पर ही गया था। मगर, हर पुलिस अधिकारी/कर्मचारी के मन में एक ही बात कौंध रही थी कि जब योगेश घर का इकलौता है और आगे सब कुछ इसी का है तो ये वारदात को अंजाम क्यों देगा?
जांच आगे बढ़ी तो हर मोड़ पर मां-बाप के इकलौते और बिगड़ैल बेटे योगेश उर्फ राजा के खिलाफ साक्ष्य मिलते चले गए। आखिरी सुराग उस वक्त हाथ लगा, जब एक कॉल योगेश के मोबाइल पर आई। बस उसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना शुरू कर दिया। वरना, योगेश की प्लानिंग यहां से भाग कर इंदौर जाने की थी। अगर, वह निकल जाता तो शायद कभी आरोपी होने के नाते वह पकड़ा जाता। एक करोड़ कीमत के माल का बंदरबांट होने के कारण उसका मिल पाना मुश्किल होता।
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ऐसे मिलते गए सुराग
- सबसे पहले बहनों ने जताया शक : - वारदात की सूचना सराफ ने अपनी दोनों विवाहित बेटियों पायल व काजल के अलावा खुद फोन करके बेटे योगेश को दी। बेटियां समय पर पहुंच गईं, मगर बेटा कुछ देर बाद पहुंचा। उन्होंने अंदर का नजारा देखते ही भाई पर शक जताया। करीब छह बजे पुलिस ने उनसे बातचीत की, वे खुलकर नहीं बोल पा रही थीं। मगर, उन्होंने बताया था कि इस तिजोरी के अंदर के लॉकर में पापा गिरवी वाले जेवरात रखते थे। जिसे खोलने का तरीका मम्मी, पापा के अलावा भइया जानता है। जिसे आसानी से कोड की मदद से खोला गया है। तिजोरी का मुख्य ताला काटा गया है। अंदर का लॉकर कोड से खुला है। इस पर पुलिस का माथा ठनका था। फिर बहनों ने लगातार अपने भाई से यही कहा कि अगर उसे कुछ पता है तो साफ-साफ बता दे। मगर भाई चुप्पी साधे रहा। पुलिस के सवालों पर बहनों ने ही वह सूची बनवाई, जिसमें कौन कौन लोग घर में आने पर दरवाजा खुलता था। उनमें परिवार के सदस्यों के अलावा बेटे के कुछ दोस्त थे और रिश्तेदार। बाकी कोई नहीं। इस पर भी बेटा व उसके दोस्तों पर शक गया था। कुछ दोस्तों को खंगाला गया। मगर उनका रिकार्ड दुरुस्त निकला। तीसरा बहनों ने यह भी बताया कि बेटा अकेले में मिलने आता था। लड़ झगड़कर रुपये भी ले जाता था।
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भाई के बदलते चेहरे से शक पुख्ता : - जब पुलिस ने बेटे से बातचीत का दौर शुरू किया तो उसे सीसीटीवी के वह फुटेज दिखाए, जिनमें एक युवक व एक युवती बाइक पर आते व जाते दिखे हैं। उन्हें देखकर उसके चेहरे की रंगत तो उड़ ही रही थी। साथ में जब उसके मोबाइल को सर्च किया गया तो उसमें 17 फरवरी का उसके नाम से इंदौर जाने का मथुरा से ट्रेन का ऑनलाइन टिकट बुक था। अगर उसका 17 का टिकट था तो वह गया क्यों नहीं? फिर जब उसकी मोबाइल लोकेशन लेकर पुलिस ने उससे बातचीत की तो वह दिन निकलने से लेकर दोपहर एक बजे तक की अपनी गतिविधियों को तो सही सही बताता गया। मगर एक बजे बाद की गतिविधियों पर चुप्पी साध गया, जबकि उसकी मोबाइल लोकेशन डेढ़ बजे से घटना स्थल पर ही थी। फिर यहां से एक घंटे बाद निकलकर अपने किराये वाले घर तक गया और पिता के कॉल पर वहां से लौटकर आया है। साथ में जो युवक युवती बाइक पर फुटेज में पाए गए थे, उनके मोबाइल से इनकी बातचीत पाई गई।
बेबी की कॉल ने यूं खोला भेद : - 20 फरवरी की दोपहर तक पुलिस इन साक्ष्यों पर काम कर ही रही थी। तभी करीब सात बजे पुलिस को एक कॉल योगेश के मोबाइल पर उसकी पत्नी की मिली, जिस कॉल को ट्रैक किया गया तो पूरा भेद खुल गया। उसमें वह अपनी पत्नी को बेबी नाम से संबोधित करते हुए कह रहा है कि सब ठीक चल रहा है। पुलिस दूसरी दिशा में काम कर रही है। तुम अब अपना अच्छे से इलाज कराना। बस इतने पर ही पुलिस का माथा ठनक गया और उसे गिरफ्तार करने का तय किया गया।