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अमुटा सचिव को कंपलसरी रिटायरमेंट का फैसला, पूर्व प्रॉक्टर सस्पेंड
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2016 01:12 AM IST
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- फोटो : file foto
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सचिव सैयद मुस्तफा जैदी को कंपलसरी रिटायरमेंट एवं पूर्व प्रॉक्टर डॉ. आसिफ को सस्पेंड कर दिया गया है। एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के फैसले के बाद कैंपस से लेकर दिल्ली तक खलबली मच गई है। आने वाले समय में एएमयू में मुद्दा गरमाने की आशंका है।
शनिवार को एएमयू ईसी की बैठक में अमुटा सचिव सैयद मुस्तफा जैदी को कंपलसरी रिटायरमेंट देने का निर्णय लिया गया। एएमयू कुलपति ने करीब एक साल पहले 26 अक्तूबर 2015 को मुस्तफा जैदी को सस्पेंड किया था। उनके खिलाफ बिना छुट्टी लिए क्लास छोड़कर धरने में शामिल होने तथा कुलपति के साथ दुर्व्यवहार करने आदि का आरोप था। प्रशासनिक जांच में आरोप सही साबित पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर ने बताया कि एएमयू के पूर्व प्रॉक्टर एवं एनआरएससी हॉल के प्रवोस्ट प्रो. आसिफ को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच बैठाने का निर्णय लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। डॉ. आसिफ का प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इंतजामिया के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ. आसिफ कभी इंतजामिया के बेहद करीबी थे और प्रॉक्टर के साथ-साथ एनआरएससी हॉल के प्रवोस्ट भी रह चुके हैं। अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी का कहना है कि ईसी में कुछ हुआ है, लेकिन क्या हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी उनके पास नहीं है। पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। डॉ. आसिफ से कोशिश के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी।
इधर अमुटा सचिव के खिलाफ निर्णय लिए जाने के बाद कैंपस में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। खबर दिल्ली स्थित फेडकुटा नेताओं तक पहुंच गई है और यह मसला राष्ट्रीय स्तर पर उठना तय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अमुटा सचिव सैयद मुस्तफा जैदी इंतजामिया के खिलाफ मजबूती से लड़ने के लिए जाने जाते हैं। अमुटा सचिव रहते हुए उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन, छात्रों के एडमिशन में धांधली, एमबीबीएस एवं बीटेक में एडमिशन, कुलपति द्वारा निजी ट्रस्ट को फंड ट्रांसफर किए जाने, वित्तीय अनियमितता एवं कैंपस में लचर कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर आवाज बुलंद की थी। यहीं नहीं उन्होंने कुलपति के कार्यकाल की सीबीआई जांच कराने की मांग राष्ट्रपति, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी से की थी। एएमयू ईसी में राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य रह चुके पूर्व सांसद वसीम अहमद के भी मुस्तफा जैदी करीबी माने जाते हैं। वसीम अहमद एवं अन्य की शिकायत के बाद ही एएमयू कुलपति के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जांच कराई जा रही है।
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एक कार्यक्रम में फेडकुटा अध्यक्ष प्रो. नंदिता नारायण एवं कोषाध्यक्ष डॉ. बादशाह खान द्वारा कुलपति को माफिया डॉन कहा गया था। इसके खिलाफ एएमयू की ओर से न्यायालय में प्रो. नंदिता एवं डॉ. बादशाह के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया गया है। इसको लेकर भी अमुटा सचिव इंतजामिया की आंखों में खटक रहे थे।
कंपलसरी रिटायरमेंट पर उठने लगे सवाल
अलीगढ़। भले ही ईसी द्वारा अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी के खिलाफ कंपलसरी रिटायरमेंट का निर्णय लिया गया है। लेकिन दबी जुबान इसके खिलाफ सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि एएमयू के एक्ट में कंपलसरी रिटायरमेंट का प्रावधान नहीं है। अमुटा सचिव के खिलाफ सेंट्रल गर्वमेंट सर्विस रूल के आधार पर कार्रवाई की गई है, जो एएमयू द्वारा एडप्ट हीं नहीं किया गया है। इस संबंध में एएमयू पीआरओ से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन स्विच ऑफ था।
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शनिवार को एएमयू ईसी की बैठक में अमुटा सचिव सैयद मुस्तफा जैदी को कंपलसरी रिटायरमेंट देने का निर्णय लिया गया। एएमयू कुलपति ने करीब एक साल पहले 26 अक्तूबर 2015 को मुस्तफा जैदी को सस्पेंड किया था। उनके खिलाफ बिना छुट्टी लिए क्लास छोड़कर धरने में शामिल होने तथा कुलपति के साथ दुर्व्यवहार करने आदि का आरोप था। प्रशासनिक जांच में आरोप सही साबित पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। एएमयू रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर ने बताया कि एएमयू के पूर्व प्रॉक्टर एवं एनआरएससी हॉल के प्रवोस्ट प्रो. आसिफ को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच बैठाने का निर्णय लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। डॉ. आसिफ का प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इंतजामिया के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ. आसिफ कभी इंतजामिया के बेहद करीबी थे और प्रॉक्टर के साथ-साथ एनआरएससी हॉल के प्रवोस्ट भी रह चुके हैं। अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी का कहना है कि ईसी में कुछ हुआ है, लेकिन क्या हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी उनके पास नहीं है। पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। डॉ. आसिफ से कोशिश के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी।
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इधर अमुटा सचिव के खिलाफ निर्णय लिए जाने के बाद कैंपस में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। खबर दिल्ली स्थित फेडकुटा नेताओं तक पहुंच गई है और यह मसला राष्ट्रीय स्तर पर उठना तय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अमुटा सचिव सैयद मुस्तफा जैदी इंतजामिया के खिलाफ मजबूती से लड़ने के लिए जाने जाते हैं। अमुटा सचिव रहते हुए उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन, छात्रों के एडमिशन में धांधली, एमबीबीएस एवं बीटेक में एडमिशन, कुलपति द्वारा निजी ट्रस्ट को फंड ट्रांसफर किए जाने, वित्तीय अनियमितता एवं कैंपस में लचर कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर आवाज बुलंद की थी। यहीं नहीं उन्होंने कुलपति के कार्यकाल की सीबीआई जांच कराने की मांग राष्ट्रपति, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी से की थी। एएमयू ईसी में राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य रह चुके पूर्व सांसद वसीम अहमद के भी मुस्तफा जैदी करीबी माने जाते हैं। वसीम अहमद एवं अन्य की शिकायत के बाद ही एएमयू कुलपति के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जांच कराई जा रही है।
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एक कार्यक्रम में फेडकुटा अध्यक्ष प्रो. नंदिता नारायण एवं कोषाध्यक्ष डॉ. बादशाह खान द्वारा कुलपति को माफिया डॉन कहा गया था। इसके खिलाफ एएमयू की ओर से न्यायालय में प्रो. नंदिता एवं डॉ. बादशाह के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया गया है। इसको लेकर भी अमुटा सचिव इंतजामिया की आंखों में खटक रहे थे।
कंपलसरी रिटायरमेंट पर उठने लगे सवाल
अलीगढ़। भले ही ईसी द्वारा अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी के खिलाफ कंपलसरी रिटायरमेंट का निर्णय लिया गया है। लेकिन दबी जुबान इसके खिलाफ सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि एएमयू के एक्ट में कंपलसरी रिटायरमेंट का प्रावधान नहीं है। अमुटा सचिव के खिलाफ सेंट्रल गर्वमेंट सर्विस रूल के आधार पर कार्रवाई की गई है, जो एएमयू द्वारा एडप्ट हीं नहीं किया गया है। इस संबंध में एएमयू पीआरओ से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन स्विच ऑफ था।