AMU: वीसी तारिक मंसूर को भाजपा-संघ से नजदीकियों का मिला इनाम, एमएलसी पद के लिए राज्यपाल के पास भेजी सिफारिश
चर्चा है कि तारिक मंसूर को एएमयू कुलपति बनवाने में संघ और भाजपा नेताओं की सिफारिश थी। इसीलिए विवि के दीक्षांत समारोह और अन्य कार्यक्रम में भाजपा नेताओं की मौजूदगी रहती रही है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ऑनलाइन कार्यक्रम में शिरकत की थी। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए थे।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को भाजपा और संघ से नजदीकियों का इनाम एमएलसी पद के रूप में मिला है। भाजपा ने उनके नाम की सिफारिश राज्यपाल के पास भेजी है। प्रो. मंसूर की कुलपति बनने से पहले ही भाजपा और संघ के कद्दावर नेताओं से काफी नजदीकियां रही हैं। चर्चा है कि उन्हें कुलपति बनवाने में संघ और भाजपा नेताओं की सिफारिश थी। इसीलिए विवि के दीक्षांत समारोह और अन्य कार्यक्रम में भाजपा नेताओं की मौजूदगी रहती रही है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ऑनलाइन कार्यक्रम में शिरकत की थी। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए थे।
एएमयू के शताब्दी वर्ष पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल होकर विवि को मिनी इंडिया बताया था। एएमयू छात्रसंघ के कक्ष में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर छिड़े विवाद में सांसद सतीश गौतम एएमयू और कुलपति पर काफी हमलावर रहे, लेकिन हर बार प्रो. तारिक संघ से नजदीकियों का सहारा लेते रहे। इतना ही नहीं प्रो. तारिक मंसूर के बेटे के वलीमे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, सुनील आंबेडकर सहित भाजपा नेता शामिल हुए थे और वर-वधू को आशीर्वाद दिया था।
पिछले दिनों दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्य मंत्रियों के साथ प्रो. तारिक मंसूर की मौजूदगी खासी चर्चा का विषय रही थी। भाजपा और संघ को लेकर प्रो. तारिक का झुकाव रहा है। पिछले दिनों हिंदू छात्रों को आनन-फानन हॉस्टल में कमरा आवंटित करना, उसी से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कमरे की प्रतीक्षा सूची में यह हिंदू छात्र काफी नीचे थे। केवल अधिकारियों से शिकायत और भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप से इंतजामिया को कमरा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रो. तारिक मंसूर का परिचय
20 सितंबर 1956 को जन्मे प्रो. तारिक मंसूर ने 17 मई 2017 को एएमयू कुलपति पद का जिम्मा संभाला था। वर्ष 2022 में कार्यकाल पूरा हो गया था। 17 मई 2022 को उन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिल गया था। वर्तमान समय में वह कुलपति हैं। उनका एक साल का सेवा विस्तार 17 मई 2023 को पूरा हो रहा है। प्रो. हफीज उर्रहमान के बेटे प्रो. तारिक मंसूर ने वर्ष 1978 में जेएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और 1982 से एमएस की डिग्री ली। वर्ष 1994 में एफआईसीएस की डिग्री इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन से ली। 37 साल का शोध और पढ़ाने का अनुभव है। वर्ष 2013 से 2017 तक जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रहे। करीब 12 साल तक ईसी सदस्य रहे। मेडिकल काउंसिल के सदस्य रहे। आईआईएम लखनऊ और मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर में रहे हैं। वह नैक की एकेडमिक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ सर्जन इंडिया के अध्यक्ष और एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के सचिव भी रहे हैं। उन्हें शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।
एएमयू के कुलपति राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति बने
एएमयू के इतिहास में पहला मौका है, जब कुलपति होने के दौरान उसके नाम की सिफारिश सांविधानिक पद के लिए की गई है। यह रिकॉर्ड कुलपति प्रो. तारिक मंसूर के खाते में गया है। इनसे पहले 1948-1956 तक कुलपति रहे डॉ. जाकिर हुसैन को पहले बिहार का राज्यपाल बनाया गया है, फिर राष्ट्रपति बनाया गया। 1968-1974 तक कुलपति रहे प्रो. अब्दुल अलीम को उर्दू बोर्ड का निदेशक बनाया गया। 1968-1974 तक कुलपति रहे प्रो. एएम खुसरो को सरकार ने राजदूत बना दिया। 1980-1985 तक कुलपति रहे सैयद हामिद ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कोई पद न दिया जाए, क्योंकि वह लोगों की सेवा करना चाहते हैं। इसके बाद 2000-2002 तक कुलपति रहे मोहम्मद हामिद अंसारी राष्ट्रीय को पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया फिर उपराष्ट्रपति बना दिया गया।
शिक्षाविद् से सियासी बनने की हसरत को मिली परवाज
एएमयू परिसर में यह भी चर्चा है कि जब कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना कम दिखने लगी, तब उन्होंने सियासत की तरफ कदम बढ़ाने की तैयारी करनी शुरू कर दी। दिल्ली के सफर का चक्कर बढ़ने लगा। चर्चाओं के अनुसार, वह राज्यपाल पद के ख्वाहिशमंद थे, लेकिन भाजपा ने उन्हें एमएलसी पद देने के लिए उनका नाम राज्यपाल के पास भेज दिया। अब उनके सियासी हसरत को परवाज मिलेगी।