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AMU News : इस्लामिक स्टडीज विभाग में सनातन धर्म की पढ़ाई पर मची रार, कई तरह की चर्चाएं

Thu, 04 Aug 2022 04:01 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 04 Aug 2022 04:01 AM IST
सार

AMU : हालांकि, इस प्रस्ताव पर एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में मंजूरी की मुहर लगना बाकी है। दूसरी ओर सुन्नी थियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा, इस्लामिक स्टडीज विभाग में अन्य धर्म से संबंधित पढ़ाई संभव नहीं है।

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AMU: There is a altercation on the study of Sanatan Dharma in the Department of Islamic Studies
एएमयू - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के इस्लामिक स्टडीज विभाग में सनातन धर्म की पढ़ाई कराने के इंतजामिया के प्रस्ताव को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हालांकि, इस प्रस्ताव पर एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में मंजूरी की मुहर लगना बाकी है। दूसरी ओर सुन्नी थियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा, इस्लामिक स्टडीज विभाग में अन्य धर्म से संबंधित पढ़ाई संभव नहीं है, क्योंकि यहां इस्लाम से जुड़ी बातें पढ़ाई जाती हैं।

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इस्लामिक स्टेट के हिमायती लेखक मौलाना मौदूदी और सैयद कुतुब की किताबें बीते दिनों हटाने के बाद एएमयू इंतजामिया ने इस्लामिक स्टडीज विभाग में सनातन धर्म की पढ़ाई की बात कही है। इन दोनों लेखकों का अपने देश पाकिस्तान और मिस्र में विवादों से नाता रहा है। विभाग के चेयरमैन प्रो. मोहम्मद इस्माइल ने इन लेखकों की किताबें हटाने की बात कही थी। दो दिन बाद ही इस्लामिक स्टडीज विभाग में सनातन, जैन, बौद्ध, ईसाई आदि धर्म की एमए में पढ़ाने की जानकारी एएमयू पीआरओ उमर पीरजादा ने दी। इसके बाद एएमयू में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं।
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कुछ लोगों का कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने मात्र से ही विवादित लेखकों की किताबें हटा दी गईं। यह ठीक नहीं है। चर्चा है कि इस तरह का बयान देकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। उधर, सुन्नी थियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुफ्ती जाहिद अली खान एएमयू इंतजामिया के फैसले से हतप्रभ हैं। उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि इस्लामिक स्टडीज विभाग में गैर इस्लामिक विषयों की पढ़ाई हो। यह हड़बड़ी में लिया गया फैसला है, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं जुटाई गई। उन्होेंने कहा कि एएमयू में पहले से सनातन, जैन, बौद्ध व ईसाई धर्म की पढ़ाई धर्मशास्त्र विभाग में हो रही है। वह भी अरबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में, जबकि इस्लामिक स्टडीज में केवल अंग्रेजी में पढ़ाई होती है।
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सनातन धर्म की पढ़ाई से लगाव है तो एएमयू बना दे वैदिक स्टडीज
एएमयू के सुन्नी थियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जाहिद अली खान ने इस्लामिक स्टडीज में सनातन धर्म की पढ़ाई के आदेश पर तंज करते हुए कहा कि अगर एएमयू को इतना ही सनातन धर्म में दिलचस्पी है तो वैदिक स्टडीज बनाने की पहल करे। यह केवल ख्याली पुलाव है।


उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टडीज में हिंदू, जैन, बुद्ध, ईसाई धर्म की पढ़ाई समझ में नहीं आती, क्योंकि यहां इस्लामिक इतिहास, इस्लामिक विद्वान को पढ़ाया जाता है। गैर इस्लामिक विषय की पढ़ाई धर्मशास्त्र में होती है। जब यह प्रस्ताव एसी और ईसी में जाएगा तो इस पर बहस होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सवाल यह भी उठ सकता है कि जब एक विभाग में पढ़ाया जा रहा है तो यही दूसरे विभाग में क्यों पढ़ाया जाएगा। प्रो. जाहिद ने कहा कि एएमयू इंतजामिया वैदिक स्टडीज बनाने की पहल करे, जहां वैदिक, ईसाई, सिख, जैन व बुद्ध धर्म के बारे में पढ़ाया जाए। 

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