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सीएए और एनआरसी के विरोध में बाब-ए सैयद पर धरना जारी, एएमयू छात्रों ने मांगा प्रॉक्टर का इस्तीफा
Wed, 01 Jan 2020 07:55 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 01 Jan 2020 07:55 PM IST
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एएमयू छात्रों का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में एएमयू में बाब-ए सैयद पर धरना बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को इस आंदोलन में अब तक शहीद हुए लोगों के नाम पेड़ पर लिखे और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।
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धरने पर छात्रों ने बताया कि मंगलवार को एनआरसी पर आधारित वृतचित्र ‘स्टेटलेस असम एनआरसी’ की स्क्रीनिंग रोकने के लिए प्रॉक्टर टीम के आदेश की निंदा की गई। इसके लिए प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग भी की गई। छात्रों ने कहा कि राज्य में अराजकता के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को जिम्मेदार ठहराकर उसे निशाना बनाया जा रहा है। क्योंकि यह तब भी मुखर था और आज भी मुखर रहा है जब अन्य संगठन चुप हैं।
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यह विरोध प्रदर्शन को बंद कराने का एक और प्रयास है। छात्रों ने कोलकाता में जाने माने फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता रॉनी सेन के ऊपर हमले की कड़ी निंदा की। उन पर सीएए और एनआरसी के विरोध में भाग लेने के लिए खंजर से हमला किया गया था।
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इसी तरह तमिलनाडु में लेखक नेल्लई कन्नन को पुलिस ने उनके भाषण के लिए उन पर मुकदमा दर्ज किया। छात्रों ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने यह तय करने के लिए पैनल का गठन किया है कि फैज अहमद फैज द्वारा लिखी गई कविता ‘हम देखेंगे’ हिंदू विरोधी है या नहीं। यह बेहद हास्यास्पद है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि साहित्यिक प्रतिभा की एक प्रसिद्ध कविता को केवल इस्लामी शब्दावली के उपयोग के कारण हिंदू विरोधी के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों ने कहा कि वह जामिया मिलिया इस्लामिया सहित सभी छात्र निकायों के साथ खड़े हैं।
एएमयू छात्रों से पांच जनवरी तक हास्टल लौटने की अपील
एएमयू छात्रों ने अवकाश में अपने घर जा चुके छात्रों से पांच जनवरी तक अपने-अपने हास्टल लौट आने की अपील की है, जिससे वह सीएए और एनआरसी के विरोध में उनके अभियान को मजबूती प्रदान कर सकें।
छात्रों ने अपील की है कि आप 5 जनवरी 2020 तक हर हालत में वापस आ जाएं। क्योंकि वाइस चांसलर एएमयू नहीं हैं। बल्कि हम स्टूडेंट्स से इस इदारे की पहचान हैं। लगातार वह हम सब लोगों के खिलाफ नोटिस निकाल रहे हैं और हमारी भीड़ न होने की वजह से ये लोग मिलकर अपनी मनमानी कर रहे हैं। ये दो साल तक भी छुट्टी अगर बढ़ा दें तब भी हमें यहीं रहकर लड़ना होगा।
छात्रों से कहा गया है कि अपने मां-बाप और भाई बहनों और रिश्तेदारों को समझायें कि वह आपको घर पर न रोकें, बल्कि देश और संविधान बचाने के लिए आपका यहां होना बहुत जरूरी है। हमारी लड़ाई किसी कम्यूनिटी से नहीं बल्कि पूरा देश सड़क पर है।
छात्रों ने अपील की है कि आप 5 जनवरी 2020 तक हर हालत में वापस आ जाएं। क्योंकि वाइस चांसलर एएमयू नहीं हैं। बल्कि हम स्टूडेंट्स से इस इदारे की पहचान हैं। लगातार वह हम सब लोगों के खिलाफ नोटिस निकाल रहे हैं और हमारी भीड़ न होने की वजह से ये लोग मिलकर अपनी मनमानी कर रहे हैं। ये दो साल तक भी छुट्टी अगर बढ़ा दें तब भी हमें यहीं रहकर लड़ना होगा।
छात्रों से कहा गया है कि अपने मां-बाप और भाई बहनों और रिश्तेदारों को समझायें कि वह आपको घर पर न रोकें, बल्कि देश और संविधान बचाने के लिए आपका यहां होना बहुत जरूरी है। हमारी लड़ाई किसी कम्यूनिटी से नहीं बल्कि पूरा देश सड़क पर है।