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दिल्ली में एएमयू का ‘गंगा नदी पर मंथन’
Amar Ujala, Aligarh
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:38 AM IST
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ओर से 13 फरवरी 2017 को नई दिल्ली में ‘गंगा नदी : भूत, वर्तमान और भविष्य’ विषय पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा।
इसमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, इंदिरा गांधी सेंटर फॉर आर्ट्स, नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट तथा इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च नई दिल्ली का सहयोग रहेगा।
इस कान्फ्रेंस के शुभारंभ या समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि एएमयू पीआरओ उमर सलीम पीरजादा ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
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उनका कहना है कि अतिथियों की सहमति एवं उपलब्धता के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
एएमयू प्रशासन के अनुसार ‘एएमयू‘ गंगा और यमुना नदी के बीच में बसा हुआ है। एएमयू के वैज्ञानिक देश की पवित्र नदियों की सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। देश की करीब 150 छोटी, बड़ी नदियां गंगा में समाहित हैं। लेकिन आज गंगा देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है, जिसमें प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा परिभाषित सुरक्षित सीमा से 3 हजार गुणा अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का मार्ग ढूंढा जाएगा।
मोदी को निमंत्रित किए जाने का स्वागत
एएमयू द्वारा गंगा नदी पर आयोजित होनेे जा रही पांच दिवसीय कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने का एएमयू के पूर्व छात्र एवं नरेंद्र भाई मोदी : फर्श से अर्श तक पुस्तक के लेखक डॉ. जसीम मोहम्मद ने स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि एएमयू का मोदी को बुलाने का फैसला स्वागत योग्य है और अलीग बिरादरी को इसका स्वागत करना चाहिए। यदि नरेंद्र मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया तो न केवल एएमयू को लाभ होगा, बल्कि देश को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह मिथ्या विचार है कि नरेंद्र मोदी का एएमयू परिसर में विरोध होगा।
उन्होंने कहा कि एएमयू में नरेंद्र मोदी को एतिहासिक सम्मान दिया जाएगा और खुले दिल से स्वागत किया जाएगा।
वीसी ने छात्र नेताओं से किया था विचार-विमर्श
एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह व छात्र संघ पदाधिकारियोें के बीच बीते दिनों बातचीत हुई थी। इसमें कुलपति ने छात्र नेताओं से सरकार के बारे में पूछा था। साथ ही प्रधानमंत्री को एएमयू के कार्यक्रम में बुलाने के संबंध में भी चर्चा हुई थी। बैठक में अध्यक्ष फैज़ुल हसन, उपाध्यक्ष नदीम अंसारी एवं सचिव नबील उस्मानी मौजूद थे।
बैठक की खबर प्रकाशित होने के बाद उपाध्यक्ष नदीम अंसारी प्रधानमंत्री को बुलाने के विरोध में झंडा लेकर खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि बैठक के दौरान किसी ने कुलपति को कोई राय नहीं दी थी।
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इसमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, इंदिरा गांधी सेंटर फॉर आर्ट्स, नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट तथा इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च नई दिल्ली का सहयोग रहेगा।
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इस कान्फ्रेंस के शुभारंभ या समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि एएमयू पीआरओ उमर सलीम पीरजादा ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
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उनका कहना है कि अतिथियों की सहमति एवं उपलब्धता के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
एएमयू प्रशासन के अनुसार ‘एएमयू‘ गंगा और यमुना नदी के बीच में बसा हुआ है। एएमयू के वैज्ञानिक देश की पवित्र नदियों की सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। देश की करीब 150 छोटी, बड़ी नदियां गंगा में समाहित हैं। लेकिन आज गंगा देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है, जिसमें प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा परिभाषित सुरक्षित सीमा से 3 हजार गुणा अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का मार्ग ढूंढा जाएगा।
मोदी को निमंत्रित किए जाने का स्वागत
एएमयू द्वारा गंगा नदी पर आयोजित होनेे जा रही पांच दिवसीय कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने का एएमयू के पूर्व छात्र एवं नरेंद्र भाई मोदी : फर्श से अर्श तक पुस्तक के लेखक डॉ. जसीम मोहम्मद ने स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि एएमयू का मोदी को बुलाने का फैसला स्वागत योग्य है और अलीग बिरादरी को इसका स्वागत करना चाहिए। यदि नरेंद्र मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया तो न केवल एएमयू को लाभ होगा, बल्कि देश को भी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह मिथ्या विचार है कि नरेंद्र मोदी का एएमयू परिसर में विरोध होगा।
उन्होंने कहा कि एएमयू में नरेंद्र मोदी को एतिहासिक सम्मान दिया जाएगा और खुले दिल से स्वागत किया जाएगा।
वीसी ने छात्र नेताओं से किया था विचार-विमर्श
एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह व छात्र संघ पदाधिकारियोें के बीच बीते दिनों बातचीत हुई थी। इसमें कुलपति ने छात्र नेताओं से सरकार के बारे में पूछा था। साथ ही प्रधानमंत्री को एएमयू के कार्यक्रम में बुलाने के संबंध में भी चर्चा हुई थी। बैठक में अध्यक्ष फैज़ुल हसन, उपाध्यक्ष नदीम अंसारी एवं सचिव नबील उस्मानी मौजूद थे।
बैठक की खबर प्रकाशित होने के बाद उपाध्यक्ष नदीम अंसारी प्रधानमंत्री को बुलाने के विरोध में झंडा लेकर खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि बैठक के दौरान किसी ने कुलपति को कोई राय नहीं दी थी।