भाजपा सांसदों के बयान से गरमाया माहौल
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एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर मचा सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को बंद कमरे में भाजपा सांसद राजवीर सिंह राजू और सतीश गौतम के साथ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की गोपनीय वार्ता ने इस मामले को और हवा दे दी है। स्मृति ईरानी के अलीगढ़ दौरे के दौरान मीडिया से बचती रहीं। लेकिन उनके साथ गोपनीय वार्ता के बाद दोनों सांसदों ने जो बयान दिया उससे मामला तूल पकड़ गया है।
एक तरफ जहां अल्पसंख्यक स्वरूप से प्रभावित होने वाला एक बड़ा तबका बेचैन है वहीं पूरे प्रकरण में गहरी दिलचस्पी लेने वालों की निगाहें भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर टिकी हैं। इसी बीच दिल्ली में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिल कर ‘न्याय वार्ता’ करने की तैयारी है।
एएमयू इंतजामिया और यहां के छात्र नेताओं की लॉबी हर हाल में अल्पसंख्यक स्वरूप को बरकरार रखना चाहती है ताकि ‘विशिष्टता का दर्जा’ बरकरार रखा जा सके। अंदरखाने इस मामले में सड़क से संसद तक और अलीगढ़ से दिल्ली तक लामबंदी करने की जबरदस्त तैयारी चल रही है।
मौका यूपी के विधानसभा चुनाव 2017 की तैयारी का है तो गैरभाजपाई दल भी इस बेहद ज्वलंत मुद्दे को ‘कैश’ कराने में पीछे नही रहना चाहते हैं। इन सभी परिस्थितियों के बीच हर हाल में अल्पसंख्यक स्वरूप को बनाए रखने की बेहद कड़ी जदोजहद जारी है।
एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए विवि इंतजामिया इस पर अभी कुछ नहीं कह सकती है। ये प्रकरण सब जूडिशियल है। 1981 में केंद्रीय संसद ने एक्ट बनाया था जिसके तहत इसके अल्पसंख्यक स्वरूप की अवधारणा बनी है। हम यही मानते हैं कि एएमयू की मूल भावना ही उसका अल्पसंख्यक स्वरूप है। - डा. राहत अबरार, एएमयू प्रतिनिधि।
बिहार चुनाव में पराजय के बाद भाजपा नई रणनीति पर काम कर रही है। क्योंकि अब 2017 में यूपी चुनाव सामने हैं इसलिए भाजपा वोटों का धुव्रीकरण करने के लिए एएमयू और जामिया को निशाना बना रही है। भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पहले भी रह चुकी है। उस वक्त ये मामला क्यों नहीं उठाया गया है..?-मुस्तफा जैदी, अमुटा सचिव।
राजवीर सिंह राजू अपनी क्षेत्रीय राजनीति चमकाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। स्मति ईरानी केंद्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं इसलिए वह अलीगढ़ में कुछ नहीं बोली। 30 जनवरी को जनरल बॉडी मीटिंग करेंगे, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से मिलने जाएंगे। जरूरत हुई तो सड़कों पर उतरेंगे। -फहीम अख्तर, छात्र नेता।