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Aligarh News: एएमयू में फर्जीवाड़े का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, क्षेत्राधिकार पर बहस

Thu, 03 Sep 2026 02:59 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 02:59 AM IST
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AMU fraud case reaches High Court; debate over jurisdiction
एएमयू। - फोटो : samvad
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कंट्रोलर कार्यालय में फर्जी कैश वाउचर और वित्तीय अभिलेखों के गायब होने का मामला सामने आया था। इस मामले में एएमयू के एक पूर्व कर्मचारी पर कूटरचना और फर्जी कैश वाउचर बनाने के आरोप लगे थे। शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता कैफ हसन के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एएमयू प्रशासन ने आरोपी कर्मचारी का बचाव किया। प्रशासन ने प्रकरण को बिना प्रभावी जांच के बंद कर दिया। कथित फर्जीवाड़े से संबंधित शिकायतें एएमयू अधिकारियों को कई बार दी गईं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। संबंधित वित्तीय रजिस्टर को आरटीआई के जवाब में लापता और अनुपलब्ध बताया गया।
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शिकायतकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग की। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय को 24 मार्च 2026 को एक प्रत्यावेदन भी दिया गया था। आरोप है कि इस प्रत्यावेदन पर लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी के बाद शिक्षा मंत्रालय को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
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एएमयू प्रशासन पर आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एएमयू प्रशासन ने आरोपी पूर्व कर्मचारी का बचाव किया। फर्जी कैश वाउचर तैयार करने और वित्तीय अभिलेखों के गायब होने का मामला गंभीर था। एएमयू ने इस प्रकरण को प्रभावी जांच के बिना ही बंद कर दिया। आरटीआई के जवाब में वित्तीय रजिस्टर को लापता बताया जाना भी चिंताजनक है।

क्षेत्राधिकार पर हाईकोर्ट में बहस
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान क्षेत्राधिकार का सवाल उठा। याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि मूल घटनाक्रम अलीगढ़ में हुआ है। इसमें फर्जी वाउचर तैयार करना और वित्तीय रिकॉर्ड का रखरखाव शामिल है। एएमयू की कथित निष्क्रियता भी अलीगढ़ से संबंधित है। ऐसे में मामले की सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट सक्षम न्यायालय होगा। कैफ हसन ने तर्क दिया कि शिक्षा मंत्रालय नई दिल्ली में स्थित है। प्रत्यावेदन इसी प्राधिकरण को दिया गया था। उनके स्तर पर कार्रवाई न होना दिल्ली में उत्पन्न हुआ दावा है, इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट को इस मामले में पूर्ण क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने की क्षेत्राधिकार की आपत्ति खारिज
कैफ के अनुसार, न्यायमूर्ति डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। 25 अगस्त 2026 को पारित आदेश में अदालत ने क्षेत्राधिकार की आपत्ति को स्वीकार नहीं किया अदालत ने माना कि शिक्षा मंत्रालय नई दिल्ली में स्थित है और संबंधित प्रत्यावेदन भी उसी प्राधिकरण को दिल्ली में प्रस्तुत किया गया था। ऐसे में इस सीमित राहत के संदर्भ में कारण-ए-दावा का एक हिस्सा दिल्ली में उत्पन्न हुआ है। इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट इस याचिका को सुनने के क्षेत्राधिकार से वंचित नहीं है।


मंत्रालय को तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश
हालांकि हाईकोर्ट ने कथित फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी, कूटरचना अथवा वित्तीय रिकॉर्ड के गायब होने के आरोपों पर कोई राय व्यक्त नहीं की। पीठ ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता द्वारा 24 मार्च 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन पर तीन माह के भीतर लागू नियमों और कानून के अनुसार विचार कर निर्णय लिया जाए। मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया गया कि वह अपने अधिकार एवं क्षेत्राधिकार की सीमा में यह जांचे कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में किसी कार्रवाई की आवश्यकता है। निर्णय की सूचना शिकायतकर्ता को भी देने के निर्देश दिए गए हैं।
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