{"_id":"5d4d93978ebc3e6d007e0a3f","slug":"amu-aligarh-news-ali210563157","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन्नत जैसी जमीन पर जल्द ही अमन की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन्नत जैसी जमीन पर जल्द ही अमन की उम्मीद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एएमयू के सोशल साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. अकबर हुसैन ने कहा कि जन्नत जैसी जमीन (कश्मीर) पर जल्दी ही सुकून, अमन और मोहब्बत होगी तथा साहित्य के साथ-साथ मानवता दृष्टिकोण को सही अर्थों में समझा जा सकेगा।
प्रो. हुसैन एएमयू के आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के कश्मीरी सेक्शन में कश्मीरी भाषा एवं साहित्य पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने यहीं रहकर व्याकरण लिखा और यह स्थान शैव दर्शन के सिद्धांत की आधार भूमि है। पतंजलि और पाणिनी जैसे व्याकरण के रचनाकारों को कश्मीर की भूमि ने रचा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जो कुछ घटा, उससे साहित्य, संस्कृति और भाषा का भी नुकसान हुआ है।
चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की डॉ. जीनत खान ने कश्मीर की लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और यह समझाने का प्रयास किया कि अगर एक लड़की पढ़ती है तो उसकी आने वाली नस्लें पढ़ जाती है। विभागाध्यक्ष प्रो. क्रांतिपाल, प्रो. मुश्ताक अहमद जरगर, डॉ. ताहेर पठान, डॉ. अमीना खातून आदि मौजूद थे। शोधार्थियों को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रो. हुसैन एएमयू के आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के कश्मीरी सेक्शन में कश्मीरी भाषा एवं साहित्य पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने यहीं रहकर व्याकरण लिखा और यह स्थान शैव दर्शन के सिद्धांत की आधार भूमि है। पतंजलि और पाणिनी जैसे व्याकरण के रचनाकारों को कश्मीर की भूमि ने रचा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जो कुछ घटा, उससे साहित्य, संस्कृति और भाषा का भी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की डॉ. जीनत खान ने कश्मीर की लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और यह समझाने का प्रयास किया कि अगर एक लड़की पढ़ती है तो उसकी आने वाली नस्लें पढ़ जाती है। विभागाध्यक्ष प्रो. क्रांतिपाल, प्रो. मुश्ताक अहमद जरगर, डॉ. ताहेर पठान, डॉ. अमीना खातून आदि मौजूद थे। शोधार्थियों को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन