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एएमयू की लापरवाही से चौपट हो रहा छात्रों का भविष्य
अलीगढ़
Updated Fri, 12 Jun 2015 01:51 AM IST
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एएमयू की लापरवाही से चौपट हो रहा छात्रों का भविष्य
अलीगढ़ (ब्यूरो)। एएमयू इंतजामिया की लापरवाही से सेना में नौकरी का ख्वाब देख रहे छात्रों का भविष्य चौपट हो रहा है। काउंसिल आफ बोर्ड्स आफ स्कूल एजूकेशन (कोबसे) में एएमयू बोर्ड का पंजीयन नहीं होने से गोरई निवासी एएमयू से 12वीं पास कर चुका छात्र सोनवीर सिंह एयरफोर्स में जेसीओ पद की लिखित परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। सेना के अधिकारियों ने यह कहकर उसे 16 अप्रैल को आयोजित परीक्षा में बैठने से रोक दिया कि एएमयू बोर्ड कोबसे में पंजीकृत नहीं है। चंद महीने पूर्व आईटीआई रोड निवासी रविंद्र पाल सिंह नामक छात्र के साथ भी ऐसा हुआ था और उसे आर्मी की तकनीकी सेवा की परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया था। इधर एएमयू कंट्रोलर प्रो. जावेद अख्तर कोबसे अधिकारियों को ही कोस रहे है। उनका कहना है कि पहली घटना सामने आने के बाद ही उन्होंने 67 हजार रुपये का ड्राफ्ट कोबसे के पास भेज दिया था ताकि जल्द से जल्द एएमयू बोर्ड का पंजीयन हो जाए। उसके बाद कोबसे के अधिकारियों ने अलग-अलग समय में तीन पत्र भेजकर अलग-अलग तरह की जानकारी मांगे, जिसका जवाब तुरंत भेज दिया गया। एक बार पूरी जानकारी मांग लेते तो एक साथ उपलब्ध करा दी जाती। लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे है। उन्होंने कहा कि अब कोबसे के अधिकारियों को सख्त पत्र लिख रहे है।
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अलीगढ़ (ब्यूरो)। एएमयू इंतजामिया की लापरवाही से सेना में नौकरी का ख्वाब देख रहे छात्रों का भविष्य चौपट हो रहा है। काउंसिल आफ बोर्ड्स आफ स्कूल एजूकेशन (कोबसे) में एएमयू बोर्ड का पंजीयन नहीं होने से गोरई निवासी एएमयू से 12वीं पास कर चुका छात्र सोनवीर सिंह एयरफोर्स में जेसीओ पद की लिखित परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। सेना के अधिकारियों ने यह कहकर उसे 16 अप्रैल को आयोजित परीक्षा में बैठने से रोक दिया कि एएमयू बोर्ड कोबसे में पंजीकृत नहीं है। चंद महीने पूर्व आईटीआई रोड निवासी रविंद्र पाल सिंह नामक छात्र के साथ भी ऐसा हुआ था और उसे आर्मी की तकनीकी सेवा की परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया था। इधर एएमयू कंट्रोलर प्रो. जावेद अख्तर कोबसे अधिकारियों को ही कोस रहे है। उनका कहना है कि पहली घटना सामने आने के बाद ही उन्होंने 67 हजार रुपये का ड्राफ्ट कोबसे के पास भेज दिया था ताकि जल्द से जल्द एएमयू बोर्ड का पंजीयन हो जाए। उसके बाद कोबसे के अधिकारियों ने अलग-अलग समय में तीन पत्र भेजकर अलग-अलग तरह की जानकारी मांगे, जिसका जवाब तुरंत भेज दिया गया। एक बार पूरी जानकारी मांग लेते तो एक साथ उपलब्ध करा दी जाती। लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे है। उन्होंने कहा कि अब कोबसे के अधिकारियों को सख्त पत्र लिख रहे है।