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Aligarh News: जेल जाते वक्त फफक पड़ी आशा, बोली-बच्चों का ध्यान रखना, मासूम को सैनिटाइजर डाल जलाने का है आरोप

Wed, 01 Mar 2023 10:34 PM IST
चमन शर्मा भूपेंद्र चौधरी
भूपेंद्र चौधरी Published by: चमन शर्मा Updated Wed, 01 Mar 2023 10:34 PM IST
सार

बेटी मां के पास आई और बोली कि मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी। तुम कहोगी तो ही खेलने बाहर जाऊंगी, मुझे वंदनी की तरह जलाकर मत मारना। इतना सुनकर महिला ने बेटी को सीने से लगा लिया और फफककर रो पड़ी। मां ने कहा कि कोई मां अपनी बेटी को नहीं मारती। यह महज एक हादसा था। 

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allegation of burning innocent by putting sanitizer Asha going to jai said take care of the children
मृतक वंदनी और अंतिम संस्कार के बाद साक्ष्य तलाशती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अतरौली कोतवाली के गांव मोहम्मदपुर बढ़ेरा में अपनी ही छह साल की मासूम बेटी को सैनिटाइजर डालकर आग लगाकर मारने वाली महिला को पुलिस ने बुधवार को न्यायालय में पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। जेल जाते वक्त महिला फफक कर रो पड़ी। अपने बच्चों की याद करते हुए बस इतना कह रही थी कि मेरे बच्चों का ध्यान रखना। 

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कोतवाली के गांव मोहम्मदपुर बढ़ेरा निवासी किसान भानुप्रताप सिंह उर्फ नॉटी की पत्नी आशा देवी ने रविवार को अपनी छह साल की मासूम बेटी वंदनी को महज इसलिए सैनिटाइजर डालकर जलाकर मार दिया कि वह बाहर अपने भाई कुनाल और अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी और आशा के बार-बार बुलाने के बाद भी घर नहीं आ रही थी। कुछ देर बाद कुनाल और वंदनी जब घर पहुंचे तो आशा ने दोनों बच्चों की पिटाई शुरू कर दी।
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मृतका वंदनी फाइल फोटो
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कुनाल तो किसी तरह से छूटकर भाग गया, लेकिन वंदनी वहीं बैठकर जोर-जोर से रोने लगी। आशा उसे बार-बार चुप रहने के लिए कह रही थी, लेकिन वह चुप नहीं हो रही थी। तभी उसने वंदनी के हाथ-पैर बांधे और डराने के लिए उसके ऊपर सैनेटाइजर डालकर आग लगाकर जान से मारने की कहकर धमकाने लगी। अचानक आशा के हाथ में लग रही माचिस की तीली जल गई और सैनिटाइजर पड़ा होने से वंदनी के कपड़ों ने आग पकड़ ली। 

वंदनी के अंतिम संस्कार के बाद चिता से साक्ष्य तलाशती पुलिस

न भागा होता कुनाल तो हो सकती थी बड़ी अनहोनी
गांव के लोग चर्चा कर रहे हैं कि आशा दोनों बच्चों को पीट रही थी। गनीमत रही कि उस वक्त कुनाल उससे छूटकर बाहर भाग गया। यदि कुनाल वहां होता तो हो सकता है कि उसके साथ भी कोई अनहोनी हो जाती। इस बात को कहते हुए मोहल्ला के रामवती, किरन, सुनीता आदि महिलाएं रो पड़ीं। कहने लगीं बेटी वंदनी का मरना बेहद दुखद है, लेकिन भगवान का लाख लाख शुक्र है कि बेटा कुनाल बच गया, वरना आग से भला किसकी दोस्ती। उस मंजर को याद करके हर किसी के रौंगटे खड़े हो जाते हैं। 

खेत पर जुताई करने न जाता तो शायद बच जाती बेटी

भानुप्रताप सिंह बुधवार की सुबह घर पर थे। हादसे की जानकारी पर उनके कुछ रिश्तेदार व गांव के लोग भी उनके यहां आए हुए थे। हादसे के वक्त भानुप्रताप सिंह अपने ट्रैक्टर से आलू के खेत की जुताई करने गए थे। वह कह रहे थे कि काश! मैं जुताई करने नहीं जाता तो हो सकता है मेरी मौजूदगी में यह हादसा ही नहीं होता और मेरी बेटी बच जाती। अब पत्नी के जेल जाने से परिवार पर और परेशानी बढ़ गई। बच्चों के खाने-पीने से लेकर स्कूल भेजने तक की व्यवस्था आशा ही संभालती थी। अब यह दोनों बच्चों की देखभाल उन्हें खुद ही करनी है। वह मवेशी भी पालते हैं और खेतीबाड़ी भी ठीकठाक है। पत्नी के बिना सब काम संभलना उनके लिए बहुत मुश्किल भरा हो सकता है। पत्नी ने ऐसा क्यों किया, इस बात पर वह इतना कहते ही रो पड़े कि कोई मां अपने बच्चे को क्यों मारेगी। बस अनहोनी की बात थी। गलती से माचिस की तीली जल गई और आशा को नहीं पता होगा कि हादसा इतना बड़ा हो जाएगा। हालांकि आशा के झुलसे हाथ इस ओर इशारा कर रहे हैं कि आग बुझाने की उसने काफी कोशिश की होगी। घर में आशा अकेली थी और वह आग पर काबू न पा सकी। 

मासूम वंदनी के बाद घर पर मातम

मम्मी हम आपकी हर बात मानेंगे... डरे सहमे हैं बच्चे 
गांव में क्या बड़े, क्या बच्चे हर किसी की जुबान पर वंदनी के साथ हुए हादसे की चर्चा है। छोटे बच्चे भी वंदनी के साथ हुए हादसे को लेकर डरे सहमे हैं। मंदिर पर अक्सर शाम के वक्त बच्चे खेलते हुए शोर मचाते थे, लेकिन तीन दिनों से मंदिर पर बच्चे खेलने तक नहीं गए। जहां शाम को बच्चों को शोर रहता था, अब वहां तीन दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। बच्चे डरे हुए हैं। मोहल्ले की एक महिला ने बताया कि उनकी छह साल की बेटी पिंकी भी वंदनी के साथ खेलती थी। मंगलवार की रात को पिंकी उनके पास आई और बोली कि मां मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी। तुम कहोगी तो ही खेलने बाहर जाऊंगी, मुझे वंदनी की तरह जलाकर मत मारना। इतना सुनकर महिला ने बेटी को सीने से लगा लिया और फफककर रो पड़ी। बेटी के दिमाग पर इस हादसे का ज्यादा असर न पड़े, इसे देखते हुए महिला ने उसे समझाते हुए कहा कि कोई मां अपनी बेटी को नहीं मारती। यह महज एक हादसा था। 

भानु ने रात में ही पत्नी को भेज दिया था मायके 
आग से गंभीर रूप से झुलसी वंदनी को लेकर परिवार के लोग अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस के पचड़े से बचने के लिए रात में ही करीब 10 बजे वंदनी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने आशा से काफी कहासुनी की और सभी बार-बार उसे कोस रहे थे। आशा अपनी गलती पर पश्चाताप कर रही थी। वह खुद के साथ अनहोनी की बात कह रही थी। भानुप्रताप सिंह रात में ही पड़ोसी की गाड़ी से आशा को उसके मायके पहुंचा दिया था। उन्हें डर था कि वह कहीं खुद के साथ कोई अनहोनी न कर ले, लेकिन ट्विटर पर हुई शिकायत से घटना का राजफाश हो गया और बेटी को मारने वाली मां आज सलाखों के पीछे पहुंच गई।
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