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अलीगढ़ : जब अटल जी आए मढ़ौली तो पढ़वाई उनकी कविता
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डीएस लोधी
- फोटो : CITY OFFICE
कल्याण सिंह के करीबी केएमवी इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे डीएस लोधी बताते हैं कि वर्ष 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अतरौली आए थे और गांव मढ़ौली में रुके थे। तब कल्याण सिंह ने डीएस लोधी को बुलाया और अटल जी की लिखी कविता- ‘अटल चुनौती अखिल विश्व को बुरा भला चाहे जो माने, खड़े हुए हैं राष्ट्रधर्म पर सीना ताने’ पढ़वाई।
वह बताते हैं कि 1991 में अपहरण की काफी घटनाएं हो रहीं थीं। तभी कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने थे। डीएस लोधी को अतरौली से ट्यूशन पढ़ाकर घर पहुंचने में 9-10 बज जाते थे। तब कल्याण सिंह ने उन्हें पत्र लिखा था कि फिलहाल जल्दी घर पहुंच जाया करो। कुछ दिन में कानून का राज हो जाएगा।
फिर कोई डर नहीं रहेगा। इसके बाद ऐसा ही हुआ, अतरौली में जगह-जगह गश्त होने लगी और धीरे-धीरे नामी अपहर्ता जेल के अंदर ठूंस दिए गए। तब जाकर लोगों को अपहरण के डर से सुकून मिला था। कल्याण सिंह केएमवी इंटर कॉलेज में छात्र रहे थे। केएमवी में कल्याण सिंह कई बार आए और भवन निर्माण के लिए काफी धन भी दिया।
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दही और उड़द की दाल थी पसंद
डीएस लोधी बताते हैं कि कल्याण सिंह जब भी किसी अपने के घर जाते तो उनके लिए उड़द की दाल बनती, जिसमें तेज लहसुन का तड़का लगता। पानी के हाथ की रोटी उड़द की दाल के साथ बेहद पसंद करते थे। इसके अलावा, मेथी पालक का साग भी उनका बेहद पसंदीदा था। दही खाने के बेहद शौकीन थे।
गांव की बेटियों को देते थे रुपये
मढ़ौली की गीता देवी बताती हैं कि वह अपने पिताजी के साथ बाबूजी से लखनऊ मिलने गई थीं। तब बाबूजी ने उन्हें विदा के तौर पर एक रुपया दिया था। कल्याण सिंह गांव की हर बेटी को अपनी बेटी मानते थे। कोई बेटी अपने पिता के साथ यदि बाबूजी के पास मिलने गई तो हमेशा उसको रुपये जरूर देते थे। कहते थे कि बेटी तो पराया धन होती हैं। इतना कहते ही बाबू की याद करते हुए गीता देवी फफक कर रो पड़ीं।
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वह बताते हैं कि 1991 में अपहरण की काफी घटनाएं हो रहीं थीं। तभी कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने थे। डीएस लोधी को अतरौली से ट्यूशन पढ़ाकर घर पहुंचने में 9-10 बज जाते थे। तब कल्याण सिंह ने उन्हें पत्र लिखा था कि फिलहाल जल्दी घर पहुंच जाया करो। कुछ दिन में कानून का राज हो जाएगा।
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फिर कोई डर नहीं रहेगा। इसके बाद ऐसा ही हुआ, अतरौली में जगह-जगह गश्त होने लगी और धीरे-धीरे नामी अपहर्ता जेल के अंदर ठूंस दिए गए। तब जाकर लोगों को अपहरण के डर से सुकून मिला था। कल्याण सिंह केएमवी इंटर कॉलेज में छात्र रहे थे। केएमवी में कल्याण सिंह कई बार आए और भवन निर्माण के लिए काफी धन भी दिया।
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दही और उड़द की दाल थी पसंद
डीएस लोधी बताते हैं कि कल्याण सिंह जब भी किसी अपने के घर जाते तो उनके लिए उड़द की दाल बनती, जिसमें तेज लहसुन का तड़का लगता। पानी के हाथ की रोटी उड़द की दाल के साथ बेहद पसंद करते थे। इसके अलावा, मेथी पालक का साग भी उनका बेहद पसंदीदा था। दही खाने के बेहद शौकीन थे।
गांव की बेटियों को देते थे रुपये
मढ़ौली की गीता देवी बताती हैं कि वह अपने पिताजी के साथ बाबूजी से लखनऊ मिलने गई थीं। तब बाबूजी ने उन्हें विदा के तौर पर एक रुपया दिया था। कल्याण सिंह गांव की हर बेटी को अपनी बेटी मानते थे। कोई बेटी अपने पिता के साथ यदि बाबूजी के पास मिलने गई तो हमेशा उसको रुपये जरूर देते थे। कहते थे कि बेटी तो पराया धन होती हैं। इतना कहते ही बाबू की याद करते हुए गीता देवी फफक कर रो पड़ीं।