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अलीगढ़ : एक महीने में तैयार हुआ ये प्लान नवंबर में ही शूटर ले गए थे काम
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सीमेंट कारोबारी संदीप गुप्ता की हत्या में शूटरों को रास्ता दिखा रही कार मधुपुरा तिराहा पर सीसी ट?
- फोटो : CITY OFFICE
दोस्तों के गैर पेशेवर गैंग ने जिस तरह सुनियोजित साजिश रची है, यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। घटना बेशक 27 दिसंबर की शाम हुई। मगर शूटर नवंबर में यानि एक माह पहले अलीगढ़ आए। उस समय भी वे अक्तूबर में फरह से लूटी गई इसी कार से आए थे। संकेत हैं कि शूटर उसी समय संदीप की सुपारी लेकर सौदा पक्का कर गए थे। चूंकि दीपावली के बाद संदीप का बहुत ज्यादा अलीगढ़ आना जाना नहीं हुआ, इसलिए प्लान नहीं बन पाया। तब तक अंकुश व दुष्यंत की जोड़ी को प्लान बनाने व अन्य दोस्तों को जोड़ने का मौका मिल गया। जब पूरी प्लानिंग हो गई तो शूटरों को इशारा कर बुलाया और वारदात को अंजाम दिलाया गया।
ऐसे हुई ट्रैक्टर शोरूम संचालक-ट्रांसपोर्टर पुत्रों की दोस्ती
पुलिस जांच के अनुसार इस घटना में मुख्य किरदार के रूप में संदीप का रिश्ते का दामाद ट्रांसपोर्टर पुत्र अंकुश व रामघाट रोड पर सोनालिका ट्रैक्टर शोरूम संचालक पुत्र दुष्यंत चौधरी है। निकलकर आया है कि तीन-चार माह पहले तालसपुर पर किराये पर जमीन लेकर कार वॉश के नाम से मोटर गैराज खोलने वाला दुष्यंत उससे पहले सोनीपत रहता था।
वहीं पढ़ाई करने के बाद व्यापार करने लगा था। इधर, अंकुश की पढ़ाई भी सोनीपत में ही रहकर हुई। चूंकि दोनों अलीगढ़ से थे, इसलिए वहां दोनों की दोस्ती हो गई और दोस्ती भी इतनी गहरी कि अंकुश पत्नी से विवाद के बाद जब घर से अलग रहने के बहाने से निकला तो दुष्यंत के पास ही रहने लगा।
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ऐसे तैयार किया इन दोस्तों ने शूटरों-सहयोगियों का गैंग
पुलिस जांच में निकल रहा है कि परिवार से अलग रहने के बाद शराब पीकर दुख दर्द बयां करते समय दोनों के बीच जब संदीप को लेकर प्लानिंग पर चर्चा हुई तो उन्होंने अपने सोनीपत कनेक्शन के जरिये संभवत: सोनीपत या पश्चिमी यूपी के बागपत-मुजफ्फरनगर जनपद के शूटरों से किसी जरिये संपर्क किया।
इस प्लानिंग में दुष्यंत की मदद से पीएसी के पास के ही एक अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने वाले युवक, एटा चुंगी के एक युवक व एक अन्य यानि तीन लोगों को शामिल किया गया। प्लानिंग के तहत नवंबर में शूटर अलीगढ़ आए। यहां आकर उनके पास मौजूद मथुरा से लूटी गई नीली बलैनो पर दुष्यंत के मोटर गैराज में नंबर प्लेट बदली गई और फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई।
इस बात की गवाही मोटर गैराज के सीसीटीवी दे दे दी है। इस तरह तीन शूटर, दुष्यंत-अंकुश के अलावा तीन अन्य लोग इस प्लान में शामिल किए गए। पुलिस जांच में ये चेहरे तो अलग-अलग कारों से बाहर निकलने के कारण उजागर हो गए हैं। अनुमान है कि और भी लोग इस दौरान शामिल हो सकते हैं।
संदीप के अलीगढ़ न आने-जाने के कारण हुई देरी
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि दीपावली के बाद संदीप का अलीगढ़ आना-जाना बहुत कम हुआ। इसलिए इस गैंग को संदीप की कोई खबर नहीं मिल पाई थी। दुष्यंत-अंकुश के स्थानीय दोस्तों की टीम लगातार संदीप की अलीगढ़ लोकेशन पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही अब संदीप का आना जाना शुरू हुआ तो लोकेशन को मॉनीटर किया जाने लगा। जैसे ही लगा कि यह समय मुफीद है तो शूटरों को ओके कर बुलाया गया और वारदात को अंजाम दिलाया गया।
उस दिन होनी थी हत्या, चाहे एटा तक जाना पड़ता
जिस तरह से शाम से ही बदमाशों ने कई गाड़ियों से संदीप की रैकी शुरू की, उससे यह साफ लग रहा है कि उसी दिन हत्या होनी थी। चाहे बदमाशों को एटा तक पीछा करना पड़ता।
गाइड करने व शहर से बाहर निकालने में लगीं अन्य कारें
पुलिस जांच व सीसीटीवी गवाही दे रहे हैं कि इस घटना में अंकुश की कार सिर्फ शूटरों को चेहरे की पहचान कराने और सही आदमी पर निशाना लग रहा है या नहीं, इसलिए शूटरों के आगे चल रही थी। इसके अलावा एक कार लगातार उस दिन महाजन के सामने मौजूद रही।
ताकि यहां से आने जाने की गतिविधियों को बताया जा सके। एक अन्य कार शूटरों को शहर में अंदर लाने से लेकर बाहर निकालने तक के लिए प्रयोग की गई। शायद यही वजह है कि अंकुश तस्वीर महल से ही अपनी गाड़ी से शूटरों की गाड़ी के आगे आया और घटना के बाद वापस लौट गया।
बुढांसी बंबा के पास नंबर प्लेट बदलकर छोड़ी कार
गांधी आई तिराहा पर वारदात को अंजाम देने के बाद शूटरों की कार सीधे हरदुआगंज की ओर निकली। जब पुलिस ने नीले रंग की बलेनो संख्या एचआर 26 डीएस 3332 की घेराबंदी शुरू की तो हरदुआगंज से पहले रजवाहे के सहारे बुढांसी बंबा की पटरी के सहारे से यह गाड़ी अंदर मुड़ गई। मगर पुलिस ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
वायरलेस पर सूचना प्रसारित कर बंबा के सहारे सामने से भी पुलिस लगाई गई। इस बीच रास्ते में कहीं तीनों शूटर उतर गए। उससे पहले इस पर हरियाणा के बजाय यूपी के बागपत यानि यूपी-17 नंबर की प्लेट लगा दी। कुछ देर तो इस नंबर की गाड़ी को देख पुलिस चौंक गई।
उस नंबर के आधार पर गाड़ी स्वामी को फोन मिलाया तो पता चला कि उसकी गाड़ी तो अभी भी गाजियाबाद के मसूरी में खड़ी है। उसने वीडियो कॉल के जरिये तस्दीक की तो पुलिस को पुख्ता हो गया कि हो न हो यही शूटरों की गाड़ी है। अभी अभी नंबर बदला गया है। तब उसे कब्जे में लेकर आया गया। बाद में साफ हुआ कि यह कार फरह से लुटी है।
भाई से कहा डीवीआर तोड़ देना, पिता से बैग लेकर भागा दुष्यंत
घटना के बाद रात करीब 9:30 बजे अंकुश अपनी गाड़ी लेकर घूमते फिरते दुष्यंत के मोटर गैराज पर पहुंचा तो वहां दुष्यंत तैयार मिला। दुष्यंत ने वहां अपने भाई को निर्देशित किया कि वह अंकुश की कार को खोलकर इस तरह रखे कि वह मरम्मत के लिए आई हुई लगे।
साथ में डीवीआर भी तोड़कर फेंक दे। इसके बाद वे दोनों मोटर गैराज में ही सही होने आई दुष्यंत के चाचा की फारच्युनर कार से दुष्यंत के घर पहुंचे। जहां दुष्यंत ने अपने पिता को बताया कि इस तरह संदीप की हत्या हो गई है। इस दौरान अंकुश घर के बाहर ही रहा। यहां से उसने कपड़ों का बैग तैयार किया और फिर दोनों निकल गए।
अनुमान है कि उनके साथ चेहरे उजागर होने वाले तीन अन्य दोस्त भी होंगे, क्योंकि वे भी तलाश के दौरान पुलिस को नहीं मिल रहे हैं। इधर, जब पुलिस दुष्यंत के गैराज व घर पर पहुंची तो पता चला कि डीवीआर सीसीटीवी से निकाल ली गई है। मगर तोड़ी नहीं है। इस पर पुलिस ने राहत महसूस की, जिससे पुलिस को काफी मदद मिली है।
चालू मिले दोनों के मोबाइल, मोटर गैराज में मिली लोकेशन
पुलिस मंगलवार शाम को जब उसकी कार चिह्नित होने पर अंकुश की तलाश में जुटी तो उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन मोटर गैराज बताई गई। वह लोकेशन सोमवार से वहीं यथावत थी। इस पर पुलिस वहां पहुंची तो कार, मोबाइल के अलावा दुष्यंत का मोबाइल भी मिल गया। मतलब कि वे अपने मोबाइल भी यहीं छोड़ गए। इनकी सीडीआर से वारदात में शामिल अन्य दोस्तों के नाम पते भी उजागर हुए हैं।
एक साथ भागने का अंदेशा, टीमें गैरप्रांत रवाना की गईं
इस घटना के बाद अब तक स्पष्ट उजागर दुष्यंत व अंकुश के अलावा उनके अन्य सहयोगियों के एक साथ गैर प्रांत हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड या हिमाचल भागने का अंदेशा है। इसे लेकर पुलिस की एक टीम को टोल नाकों पर सीसीटीवी खंगालने में लगाया गया है। उसके आधार पर आगे टीम दबिश के लिए रवाना की जाएंगी। एक टीम को दिल्ली भी भेजा गया है। वह दिल्ली में किसी मेट्रो या रेलवे स्टेशन पर फारच्युनर तलाशने का प्रयास करेगी।
एसएसपी ने टीम की पीठ ठोंकी, अब टॉस्क गिरफ्तारी
बुधवार को लखनऊ निर्वाचन आयोग की बैठक में शामिल होने गए एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पूरे प्रकरण पर लगातार नजर बनाए रखी। एक-एक अधिकारी से वे संपर्क में रहे और अपडेट लेने के साथ निर्देश देते रहे। उन्होंने 24 घंटे में इस तथ्य के उजागर होने पर टीम की पीठ ठोंकी है और अब गिरफ्तारी का टॉस्क दिया है।
इस खुलासे में एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत, सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय, सीओ प्रथम राघवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अरविंद राठी, इंस्पेक्टर क्वार्सी विजय सिंह, इंस्पेक्टर सासनी गेट पंकज मिश्रा, एसओजी प्रभारी संजीव सिंह, नगर सर्विलांस प्रभारी संदीप सिंह व उनकी पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
एसएसपी ने पांचों टीमों को अलग अलग काम सौंपा है। इनमें एक टीम को सर्विलांस से डंप डेटा संकलित कर उसके अध्ययन, एक को टोल नाकों के सीसीटीवी खंगालने, एक को मोटर गैराज तलाशने और कुछ टीमों को दबिश व एक को विवेचना के लिए लगाया गया है।
-सोनीपत में साथ रहे अंकुश-दुष्यंत, वहीं से शूटरों के बुलाने का है अंदेशा
-घटना के समय आसपास ही थे अंकुश-दुष्यंत के अलावा तीन अन्य दोस्त
-गाड़ी को छिपाने के बाद में डीवीआर गायब करने की प्लानिंग धरी रह गई
ये हुए प्रयास और जांच
-05 टीमें लगातार 24 घंटे इस घटना के खुलासे में जुटीं
-200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे शहर में, बाहर खंगाले
-09 शूटरों सहित हत्या में शामिल होने के संकेत हैं
-05 गाड़ियों का रैकी और गाइड करने में हुआ है प्रयोग
ये मिले हैं सीसीटीवी के साक्ष्य
-6:47:20 बजे शाम खेरेश्वर चौराहे के रास्ते शहर में घुसी शूटरों की नीली बलेनो, नादा पुल, सूत मिल, शमशाद, कलेक्ट्रेट, तस्वीर महल, दीवानी, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, मधेपुरा, गांधी आई तिराहा, किशनपुर, ओएलएफ होते हुए 8:33:30 बजे शाम क्वार्सी चौराहे से हरदुआगंज की ओर निकली। कुल 17 जगहों पर गाड़ी कैद।
-8:04:10 बजे शाम तस्वीर महल चौराहे से डीआईजी से मिलकर निकलते समय संदीप की कार दीवानी, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, गांधी आई से मीनाक्षी की ओर जाना और कुछ देर बार मीनाक्षी से गांधी आई तिराहा वापस 8:24:50 बजे शाम आना कैद। हर जगह नीली बलेनो आगे लगी है।
-8:02:14 बजे शाम तस्वीर महल से अंकुश की सफेद क्रेटा नीली बलेनो को गाइड करते हुए आगे आगे तस्वीर महल पर कैद। फिर पेट्रोल पंप, वापस कंट्रोल रूम तिराहा, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, मधेपुरा, गांधी आई तिराहा पर 8:24:50 बजे बलैनो के आगे आगे कैद। यहां से घटना के बाद तेजी से वापस 8:30:20 बजे मीनाक्षी पुल की ओर सफेद क्रेटा लौटी। फिर सुभाष चौक, दीवानी, तस्वीर महल होते हुए सूत मिल पर 8:40 बजे कैद। 9:30 बजे सारसौल से अन्य रास्तों से होते हुए सफेद क्रेटा तालसपुर स्थित कार वॉस मोटर गैराज में जाकर खड़ी हुई।
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ऐसे हुई ट्रैक्टर शोरूम संचालक-ट्रांसपोर्टर पुत्रों की दोस्ती
पुलिस जांच के अनुसार इस घटना में मुख्य किरदार के रूप में संदीप का रिश्ते का दामाद ट्रांसपोर्टर पुत्र अंकुश व रामघाट रोड पर सोनालिका ट्रैक्टर शोरूम संचालक पुत्र दुष्यंत चौधरी है। निकलकर आया है कि तीन-चार माह पहले तालसपुर पर किराये पर जमीन लेकर कार वॉश के नाम से मोटर गैराज खोलने वाला दुष्यंत उससे पहले सोनीपत रहता था।
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पुलिस जांच में निकल रहा है कि परिवार से अलग रहने के बाद शराब पीकर दुख दर्द बयां करते समय दोनों के बीच जब संदीप को लेकर प्लानिंग पर चर्चा हुई तो उन्होंने अपने सोनीपत कनेक्शन के जरिये संभवत: सोनीपत या पश्चिमी यूपी के बागपत-मुजफ्फरनगर जनपद के शूटरों से किसी जरिये संपर्क किया।
इस प्लानिंग में दुष्यंत की मदद से पीएसी के पास के ही एक अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने वाले युवक, एटा चुंगी के एक युवक व एक अन्य यानि तीन लोगों को शामिल किया गया। प्लानिंग के तहत नवंबर में शूटर अलीगढ़ आए। यहां आकर उनके पास मौजूद मथुरा से लूटी गई नीली बलैनो पर दुष्यंत के मोटर गैराज में नंबर प्लेट बदली गई और फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई।
इस बात की गवाही मोटर गैराज के सीसीटीवी दे दे दी है। इस तरह तीन शूटर, दुष्यंत-अंकुश के अलावा तीन अन्य लोग इस प्लान में शामिल किए गए। पुलिस जांच में ये चेहरे तो अलग-अलग कारों से बाहर निकलने के कारण उजागर हो गए हैं। अनुमान है कि और भी लोग इस दौरान शामिल हो सकते हैं।
संदीप के अलीगढ़ न आने-जाने के कारण हुई देरी
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि दीपावली के बाद संदीप का अलीगढ़ आना-जाना बहुत कम हुआ। इसलिए इस गैंग को संदीप की कोई खबर नहीं मिल पाई थी। दुष्यंत-अंकुश के स्थानीय दोस्तों की टीम लगातार संदीप की अलीगढ़ लोकेशन पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही अब संदीप का आना जाना शुरू हुआ तो लोकेशन को मॉनीटर किया जाने लगा। जैसे ही लगा कि यह समय मुफीद है तो शूटरों को ओके कर बुलाया गया और वारदात को अंजाम दिलाया गया।
उस दिन होनी थी हत्या, चाहे एटा तक जाना पड़ता
जिस तरह से शाम से ही बदमाशों ने कई गाड़ियों से संदीप की रैकी शुरू की, उससे यह साफ लग रहा है कि उसी दिन हत्या होनी थी। चाहे बदमाशों को एटा तक पीछा करना पड़ता।
गाइड करने व शहर से बाहर निकालने में लगीं अन्य कारें
पुलिस जांच व सीसीटीवी गवाही दे रहे हैं कि इस घटना में अंकुश की कार सिर्फ शूटरों को चेहरे की पहचान कराने और सही आदमी पर निशाना लग रहा है या नहीं, इसलिए शूटरों के आगे चल रही थी। इसके अलावा एक कार लगातार उस दिन महाजन के सामने मौजूद रही।
ताकि यहां से आने जाने की गतिविधियों को बताया जा सके। एक अन्य कार शूटरों को शहर में अंदर लाने से लेकर बाहर निकालने तक के लिए प्रयोग की गई। शायद यही वजह है कि अंकुश तस्वीर महल से ही अपनी गाड़ी से शूटरों की गाड़ी के आगे आया और घटना के बाद वापस लौट गया।
बुढांसी बंबा के पास नंबर प्लेट बदलकर छोड़ी कार
गांधी आई तिराहा पर वारदात को अंजाम देने के बाद शूटरों की कार सीधे हरदुआगंज की ओर निकली। जब पुलिस ने नीले रंग की बलेनो संख्या एचआर 26 डीएस 3332 की घेराबंदी शुरू की तो हरदुआगंज से पहले रजवाहे के सहारे बुढांसी बंबा की पटरी के सहारे से यह गाड़ी अंदर मुड़ गई। मगर पुलिस ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
वायरलेस पर सूचना प्रसारित कर बंबा के सहारे सामने से भी पुलिस लगाई गई। इस बीच रास्ते में कहीं तीनों शूटर उतर गए। उससे पहले इस पर हरियाणा के बजाय यूपी के बागपत यानि यूपी-17 नंबर की प्लेट लगा दी। कुछ देर तो इस नंबर की गाड़ी को देख पुलिस चौंक गई।
उस नंबर के आधार पर गाड़ी स्वामी को फोन मिलाया तो पता चला कि उसकी गाड़ी तो अभी भी गाजियाबाद के मसूरी में खड़ी है। उसने वीडियो कॉल के जरिये तस्दीक की तो पुलिस को पुख्ता हो गया कि हो न हो यही शूटरों की गाड़ी है। अभी अभी नंबर बदला गया है। तब उसे कब्जे में लेकर आया गया। बाद में साफ हुआ कि यह कार फरह से लुटी है।
भाई से कहा डीवीआर तोड़ देना, पिता से बैग लेकर भागा दुष्यंत
घटना के बाद रात करीब 9:30 बजे अंकुश अपनी गाड़ी लेकर घूमते फिरते दुष्यंत के मोटर गैराज पर पहुंचा तो वहां दुष्यंत तैयार मिला। दुष्यंत ने वहां अपने भाई को निर्देशित किया कि वह अंकुश की कार को खोलकर इस तरह रखे कि वह मरम्मत के लिए आई हुई लगे।
साथ में डीवीआर भी तोड़कर फेंक दे। इसके बाद वे दोनों मोटर गैराज में ही सही होने आई दुष्यंत के चाचा की फारच्युनर कार से दुष्यंत के घर पहुंचे। जहां दुष्यंत ने अपने पिता को बताया कि इस तरह संदीप की हत्या हो गई है। इस दौरान अंकुश घर के बाहर ही रहा। यहां से उसने कपड़ों का बैग तैयार किया और फिर दोनों निकल गए।
अनुमान है कि उनके साथ चेहरे उजागर होने वाले तीन अन्य दोस्त भी होंगे, क्योंकि वे भी तलाश के दौरान पुलिस को नहीं मिल रहे हैं। इधर, जब पुलिस दुष्यंत के गैराज व घर पर पहुंची तो पता चला कि डीवीआर सीसीटीवी से निकाल ली गई है। मगर तोड़ी नहीं है। इस पर पुलिस ने राहत महसूस की, जिससे पुलिस को काफी मदद मिली है।
चालू मिले दोनों के मोबाइल, मोटर गैराज में मिली लोकेशन
पुलिस मंगलवार शाम को जब उसकी कार चिह्नित होने पर अंकुश की तलाश में जुटी तो उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन मोटर गैराज बताई गई। वह लोकेशन सोमवार से वहीं यथावत थी। इस पर पुलिस वहां पहुंची तो कार, मोबाइल के अलावा दुष्यंत का मोबाइल भी मिल गया। मतलब कि वे अपने मोबाइल भी यहीं छोड़ गए। इनकी सीडीआर से वारदात में शामिल अन्य दोस्तों के नाम पते भी उजागर हुए हैं।
एक साथ भागने का अंदेशा, टीमें गैरप्रांत रवाना की गईं
इस घटना के बाद अब तक स्पष्ट उजागर दुष्यंत व अंकुश के अलावा उनके अन्य सहयोगियों के एक साथ गैर प्रांत हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड या हिमाचल भागने का अंदेशा है। इसे लेकर पुलिस की एक टीम को टोल नाकों पर सीसीटीवी खंगालने में लगाया गया है। उसके आधार पर आगे टीम दबिश के लिए रवाना की जाएंगी। एक टीम को दिल्ली भी भेजा गया है। वह दिल्ली में किसी मेट्रो या रेलवे स्टेशन पर फारच्युनर तलाशने का प्रयास करेगी।
एसएसपी ने टीम की पीठ ठोंकी, अब टॉस्क गिरफ्तारी
बुधवार को लखनऊ निर्वाचन आयोग की बैठक में शामिल होने गए एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पूरे प्रकरण पर लगातार नजर बनाए रखी। एक-एक अधिकारी से वे संपर्क में रहे और अपडेट लेने के साथ निर्देश देते रहे। उन्होंने 24 घंटे में इस तथ्य के उजागर होने पर टीम की पीठ ठोंकी है और अब गिरफ्तारी का टॉस्क दिया है।
इस खुलासे में एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत, सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय, सीओ प्रथम राघवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अरविंद राठी, इंस्पेक्टर क्वार्सी विजय सिंह, इंस्पेक्टर सासनी गेट पंकज मिश्रा, एसओजी प्रभारी संजीव सिंह, नगर सर्विलांस प्रभारी संदीप सिंह व उनकी पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
एसएसपी ने पांचों टीमों को अलग अलग काम सौंपा है। इनमें एक टीम को सर्विलांस से डंप डेटा संकलित कर उसके अध्ययन, एक को टोल नाकों के सीसीटीवी खंगालने, एक को मोटर गैराज तलाशने और कुछ टीमों को दबिश व एक को विवेचना के लिए लगाया गया है।
-सोनीपत में साथ रहे अंकुश-दुष्यंत, वहीं से शूटरों के बुलाने का है अंदेशा
-घटना के समय आसपास ही थे अंकुश-दुष्यंत के अलावा तीन अन्य दोस्त
-गाड़ी को छिपाने के बाद में डीवीआर गायब करने की प्लानिंग धरी रह गई
ये हुए प्रयास और जांच
-05 टीमें लगातार 24 घंटे इस घटना के खुलासे में जुटीं
-200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे शहर में, बाहर खंगाले
-09 शूटरों सहित हत्या में शामिल होने के संकेत हैं
-05 गाड़ियों का रैकी और गाइड करने में हुआ है प्रयोग
ये मिले हैं सीसीटीवी के साक्ष्य
-6:47:20 बजे शाम खेरेश्वर चौराहे के रास्ते शहर में घुसी शूटरों की नीली बलेनो, नादा पुल, सूत मिल, शमशाद, कलेक्ट्रेट, तस्वीर महल, दीवानी, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, मधेपुरा, गांधी आई तिराहा, किशनपुर, ओएलएफ होते हुए 8:33:30 बजे शाम क्वार्सी चौराहे से हरदुआगंज की ओर निकली। कुल 17 जगहों पर गाड़ी कैद।
-8:04:10 बजे शाम तस्वीर महल चौराहे से डीआईजी से मिलकर निकलते समय संदीप की कार दीवानी, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, गांधी आई से मीनाक्षी की ओर जाना और कुछ देर बार मीनाक्षी से गांधी आई तिराहा वापस 8:24:50 बजे शाम आना कैद। हर जगह नीली बलेनो आगे लगी है।
-8:02:14 बजे शाम तस्वीर महल से अंकुश की सफेद क्रेटा नीली बलेनो को गाइड करते हुए आगे आगे तस्वीर महल पर कैद। फिर पेट्रोल पंप, वापस कंट्रोल रूम तिराहा, सुभाष चौक, सेंटर प्वाइंट, मधेपुरा, गांधी आई तिराहा पर 8:24:50 बजे बलैनो के आगे आगे कैद। यहां से घटना के बाद तेजी से वापस 8:30:20 बजे मीनाक्षी पुल की ओर सफेद क्रेटा लौटी। फिर सुभाष चौक, दीवानी, तस्वीर महल होते हुए सूत मिल पर 8:40 बजे कैद। 9:30 बजे सारसौल से अन्य रास्तों से होते हुए सफेद क्रेटा तालसपुर स्थित कार वॉस मोटर गैराज में जाकर खड़ी हुई।