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अलीगढ़: तो क्या फर्जी नियुक्ति से शंकर ने उठाया है लाखों का वेतन
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरवारी टप्पल में सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश के जीपीएफ खाते से 34 लाख रुपये के घोटाले में अब फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आ रहा है। आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शंकर सिंह द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने और नौकरी के बाद फंड न लेने से यह शक बढ़ता जा रहा है। बीएसए के माध्यम से अब 1996 के रिकार्ड खंगाले जाएंगे। ऐसे में अब सवाल खड़ा हो गया है कि 1996 से लेकर 2018 तक क्या शंकर ने फर्जी नियुक्ति से लाखों का वेतन उठाया है।
जीपीएफ घोटाले में वित्त विभाग की जांच टीम ने दो बाबुओं को निलंबित किया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच टीम ने दोनों बाबुओं, पीड़ित शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दोषी मानते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। अब गांव के ही एक व्यक्ति ने डीएम को पत्र भेजकर फर्जी नियुक्ति की जानकारी दी है।
इस मामले में पूर्व में जांच अधिकारी रहे अश्वनी कुमार पांडेय ने बताया कि आरोपी शंकर ने 2018 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। इसके बाद फंड लेने के लिए पासबुक मंगाई गई। जिसे लेकर वह हाजिर नहीं हुआ। नियुक्ति फर्जी है, यह पत्र आने पर ही जानकारी हुई है। अब बीएसए के पास पत्र को भेजा जाएगा। नियुक्ति के संबंध में उन्हीं के स्तर से साफ हो सकता है।
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरवारी टप्पल में सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश के जीपीएफ खाते से 34 लाख रुपये के घोटाले में अब फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आ रहा है। आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शंकर सिंह द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने और नौकरी के बाद फंड न लेने से यह शक बढ़ता जा रहा है। बीएसए के माध्यम से अब 1996 के रिकार्ड खंगाले जाएंगे। ऐसे में अब सवाल खड़ा हो गया है कि 1996 से लेकर 2018 तक क्या शंकर ने फर्जी नियुक्ति से लाखों का वेतन उठाया है।
जीपीएफ घोटाले में वित्त विभाग की जांच टीम ने दो बाबुओं को निलंबित किया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच टीम ने दोनों बाबुओं, पीड़ित शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दोषी मानते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। अब गांव के ही एक व्यक्ति ने डीएम को पत्र भेजकर फर्जी नियुक्ति की जानकारी दी है।
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इस मामले में पूर्व में जांच अधिकारी रहे अश्वनी कुमार पांडेय ने बताया कि आरोपी शंकर ने 2018 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। इसके बाद फंड लेने के लिए पासबुक मंगाई गई। जिसे लेकर वह हाजिर नहीं हुआ। नियुक्ति फर्जी है, यह पत्र आने पर ही जानकारी हुई है। अब बीएसए के पास पत्र को भेजा जाएगा। नियुक्ति के संबंध में उन्हीं के स्तर से साफ हो सकता है।
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