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9 अगस्त: राष्ट्रीय आंदोलन में अलीगढ़ के सपूतों का भी अहम योगदान

Sun, 09 Aug 2020 12:04 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2020 12:04 AM IST
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Aligarh's son significant role in quit india movement
स्वतंत्रता दिवस को 50 वर्ष पूरे होने पर 1998 में नगर निगम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कुंवर नेत्रप - फोटो : CITY OFFICE
9 अगस्त का दिन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में विशेष महत्व रखता है। इसका अलीगढ़ से भी सीधा संबंध रहा है। 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की और करो या मरो का नारा दिया। इस आंदोलन में अलीगढ़ के भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर मलखान सिंह, मोहनलाल गौतम, हरिशंकर आजाद, मदनलाल हितैषी आदि लोग जेल गए। वहीं, 9 अगस्त 1942 को ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने मलेशिया में जापान की मदद से आजाद हिंद फौज की स्थापना की। जिसमें अलीगढ़ के कैप्टन अब्बास अली शामिल रहे।
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भारत छोड़ो आंदोलन में ये भी गए थे जेल
दुर्गा प्रसाद कौशिक, देवेंद्र शर्मा, राम लाल गौड़, सहदेव आर्य, जंग बहादुर यादव, भूदेव शर्मा, मेघराज सिंह, भूपेंद्र प्रसाद जगदीश प्रसाद ईश्वरी प्रसाद बहोरी लाल।
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राष्ट्रीय कर्तव्य के लिए कार्य करते रहे नेत्रपाल
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर नेत्रपाल सिंह ने देश की आजादी में परिवार सहित भाग लिया था। अलीगढ़ के गांव पाली रजापुर के कुंवर नेत्रपाल सिंह ने आचार्य विनोवा भावे को अपने गांव बुलाकर भूदान आंदोलन में 200 बीघा जमीन दान की थी। विद्यार्थियों के कल्याण के लिए अग्रसेन इंटर कॉलेज, हरदुआगंज को 100 बीघा जमीन दान में दी। इस प्रकार उन्होंने अपनी 12 सौ बीघा जमीन में से 800 बीघा जमीन आदि संपत्ति देकर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन किया।
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देश में अंतरिम सरकार बनते ही कैप्टन अब्बास अली की रद्द हो गई थी फांसी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फ़ौज (आईएनए) में कैप्टन रहे अब्बास अली 3 जनवरी 1920 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कलंदर गढ़ी-खुर्जा में जन्मे थे। इसके बाद उनका परिवार अलीगढ़ में ही रहने लगा था। अब्बास अली बचपन से ही सरदार भगत सिंह के विचारों से प्रभावित थे। वे पहले नौजवान भारत सभा और फिर स्टूडेंट फ़ेडरेशन के सदस्य बने। 1939 में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट करने के बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भरती हो गए और 1943 में जापानियों द्वारा मलाया (अब मलेशिया) में युद्ध बंदी बनाए गए। इसके बाद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद फ़ौज में शामिल हो गए। 1945 में जापान की हार के बाद ब्रिटिश सेना द्वारा इम्फ़ाल में युद्ध बंदी बना लिया गया। उन्हें मुल्तान के किले में रखा गया, कोर्ट मार्शल हुआ और सजा-ए-मौत सुनाई गई, लेकिन 1946 में देश में अंतरिम सरकार बन जाने और देश आजाद हो जाने की घोषणा हो जाने की वजह से वह रिहा कर दिए गए।
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