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अलीगढ़ : आरटीओ दफ्तर में पंजीकृत होने आई रोडवेज रंग की निजी बस
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मेरठ से एनओसी लेकर आरटीओ दफ्तर में पंजीकृत होने आई रोडवेज रंग की निजी बस। -राजा तिवारी
- फोटो : CITY OFFICE
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़।
आरटीओ कार्यालय में शनिवार को रोडवेज रंग की एक निजी बस जैसे ही पंजीकृत होने के लिए मेरठ से एनओसी लेकर पहुंची। वैसे ही विभागीय अफसरों के कान खड़े हो गए। सूचना पर एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह अपना केबिन छोड़कर पीछे भागे, इससे पहले बस चालक मालिक के साथ बस लेकर फरार हो गया।
बता दें कि एसएसपी कलानिधी नैथानी के निर्देश पर फर्जी रोडवेज के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत जनपद में रोडवेज रंग की निजी बसों में अगर सवारियों को सफर कराते हुए पाया जाता है तो बस को सीधे बंद किया जाएगा। इसके साथ ही मालिक पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
पुलिस ने चार फर्जी रोडवेज बसों को पकड़ा भी। वहीं शनिवार को रोडवेज के रंग में रंगी एक निजी बस आरटीओ कार्यालय पंजीकृत होने के लिए पहुंची। बस मालिक मेरठ से एनओसी लेकर आया हुआ था। जैसे ही पंजीकरण के लिए बस मालिक ने कागजात निकाले।
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इससे पहले इसकी सूचना एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह के पास पहुंच गई। सूचना पर वह अपने केबिन से उठकर पीछे गाड़ी को देखने निकले। इससे पहले गाड़ी मालिक को इसकी भनक पड़ी तो वह डर के मारे बस को लेकर फरार हो गया। वहीं एआरटीओ रंजीत सिंह ने संबंधित पटल पर बाबुओं को निर्देशित किया कि जब तक ऐसी बसों का रंग नहीं बदल जाता, तब तक पंजीकरण नहीं किया जाए।
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आरटीओ कार्यालय में शनिवार को रोडवेज रंग की एक निजी बस जैसे ही पंजीकृत होने के लिए मेरठ से एनओसी लेकर पहुंची। वैसे ही विभागीय अफसरों के कान खड़े हो गए। सूचना पर एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह अपना केबिन छोड़कर पीछे भागे, इससे पहले बस चालक मालिक के साथ बस लेकर फरार हो गया।
बता दें कि एसएसपी कलानिधी नैथानी के निर्देश पर फर्जी रोडवेज के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत जनपद में रोडवेज रंग की निजी बसों में अगर सवारियों को सफर कराते हुए पाया जाता है तो बस को सीधे बंद किया जाएगा। इसके साथ ही मालिक पर मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
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पुलिस ने चार फर्जी रोडवेज बसों को पकड़ा भी। वहीं शनिवार को रोडवेज के रंग में रंगी एक निजी बस आरटीओ कार्यालय पंजीकृत होने के लिए पहुंची। बस मालिक मेरठ से एनओसी लेकर आया हुआ था। जैसे ही पंजीकरण के लिए बस मालिक ने कागजात निकाले।
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इससे पहले इसकी सूचना एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह के पास पहुंच गई। सूचना पर वह अपने केबिन से उठकर पीछे गाड़ी को देखने निकले। इससे पहले गाड़ी मालिक को इसकी भनक पड़ी तो वह डर के मारे बस को लेकर फरार हो गया। वहीं एआरटीओ रंजीत सिंह ने संबंधित पटल पर बाबुओं को निर्देशित किया कि जब तक ऐसी बसों का रंग नहीं बदल जाता, तब तक पंजीकरण नहीं किया जाए।