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अलीगढ़ : महाविद्यालयों को रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा
सार
कौशल विकास\/रोजगारपरक के पाठ्यक्रम दो प्रकार के हो सकते हैं, जिनका चयन विद्यार्थी अपनी पसंद और महाविद्यालय में उपलब्धता के आधार पर कर सकेगा। एक ही पाठ्यक्रम, जिसकी विशेषज्ञता प्रत्येक सेमेस्टर के साथ बढ़ती जाएगी, लेकिन किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर ही वह पूरा हो सकेगा। ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए स्किल पार्टनर के साथ एमओयू की व्यवस्था विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन करेगा।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीयू) अलीगढ़ से संबद्ध महाविद्यालयों को कौशल विकास/रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। महाविद्यालय/विश्वविद्यालय द्वारा तैयार पाठ्यक्रम विवि की पाठ्यक्रम समिति, विद्या परिषद व कार्य परिषद से अनुमोदित होगा।
कौशल विकास/रोजगारपरक के पाठ्यक्रम दो प्रकार के हो सकते हैं, जिनका चयन विद्यार्थी अपनी पसंद और महाविद्यालय में उपलब्धता के आधार पर कर सकेगा। यह एक सेमेस्टर में पूर्ण होने वाला पाठ्यक्रम होगा। एक ही पाठ्यक्रम, जिसकी विशेषज्ञता प्रत्येक सेमेस्टर के साथ बढ़ती जाएगी, लेकिन किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर ही वह पूरा हो सकेगा।
विभिन्न विषयों में विभागाध्यक्ष या शिक्षकों द्वारा तैयार पाठ्यक्रमों में सामान्य/थ्योरी व स्किल/ट्रेनिंग/इंटर्नशिप/लैब का अनुपालन 40:60 होगा। ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए स्किल पार्टनर के साथ एमओयू की व्यवस्था विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन करेगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार रोजगारपरक/कौशल विकास पाठ्यक्रम के चुनाव के समय विद्यार्थी महाविद्यालय में वह कार्यक्रम उपलब्ध न होने की स्थिति में यूजीसी, स्वयं, मॉक पोर्टल पर उपलब्ध रोजगारपरक ऑनलाइन पाठ्यक्रम चुन सकते हैं।
- महेश कुमार, कुलसचिव आरएमपीयू
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीयू) अलीगढ़ से संबद्ध महाविद्यालयों को कौशल विकास/रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। महाविद्यालय/विश्वविद्यालय द्वारा तैयार पाठ्यक्रम विवि की पाठ्यक्रम समिति, विद्या परिषद व कार्य परिषद से अनुमोदित होगा।
कौशल विकास/रोजगारपरक के पाठ्यक्रम दो प्रकार के हो सकते हैं, जिनका चयन विद्यार्थी अपनी पसंद और महाविद्यालय में उपलब्धता के आधार पर कर सकेगा। यह एक सेमेस्टर में पूर्ण होने वाला पाठ्यक्रम होगा। एक ही पाठ्यक्रम, जिसकी विशेषज्ञता प्रत्येक सेमेस्टर के साथ बढ़ती जाएगी, लेकिन किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर ही वह पूरा हो सकेगा।
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विभिन्न विषयों में विभागाध्यक्ष या शिक्षकों द्वारा तैयार पाठ्यक्रमों में सामान्य/थ्योरी व स्किल/ट्रेनिंग/इंटर्नशिप/लैब का अनुपालन 40:60 होगा। ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए स्किल पार्टनर के साथ एमओयू की व्यवस्था विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन करेगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार रोजगारपरक/कौशल विकास पाठ्यक्रम के चुनाव के समय विद्यार्थी महाविद्यालय में वह कार्यक्रम उपलब्ध न होने की स्थिति में यूजीसी, स्वयं, मॉक पोर्टल पर उपलब्ध रोजगारपरक ऑनलाइन पाठ्यक्रम चुन सकते हैं।
- महेश कुमार, कुलसचिव आरएमपीयू