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Aligarh: अनुसूचित जाति के मजदूरों को बेरहमी से पीटने में परिवीक्षा की सजा, 16 साल पहले की है घटना
Fri, 19 Aug 2022 11:50 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2022 11:50 PM IST
सार
मजदूरी का रुपया मांगने पहुंचे मजदूरों को नामजदों ने बंधक बनाकर खुंटी से टांगकर बेरहमी से पीटा। शरीर के संवेदनशील अंगों में पेट्रोल व मिर्ची तक डाल दी। किसी तरह बचकर वे आए और पुलिस को सूचना दी। घटना 13 अक्तूबर 2006 की है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : social media
विस्तार
सिविल लाइंस क्षेत्र के अनौना हाउस इलाके में 16 वर्ष पूर्व अनुसूचित मजदूरों को बेरहमी से पीटने के मुकदमे में अदालत ने परिवीक्षा की सजा सुनाई है। इसमें एक दोषी 83 वर्षीय बुजुर्ग और तीन उसके बेटे हैं। यह फैसला एडीजे-विशेष एससीएसटी संजीव कुमार सिंह की अदालत से सुनाया है।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार घटना 13 अक्तूबर 2006 की है। हाथरस के सासनी बिर्रा के कालीचरन व जलालपुर के राजेंद्र सिंह ने 12 अक्तूबर को अनौना हाउस के मो.जफर के घर पुताई का काम किया। 13 अक्तूबर को वे मजदूरी का रुपया मांगने पहुंचे तो नामजदों ने घर से 50 हजार रुपये चोरी का आरोप लगाया। इस पर दोनों ने दलील दी कि अगर हम चोरी करते तो शायद यहां न आते।
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इस पर दोनों को बंधक बनाकर खुंटी से टांगकर बेरहमी से पीटा गया। शरीर के संवेदनशील अंगों में पेट्रोल व मिर्ची तक डाल दी। किसी तरह बचकर वे आए और पुलिस को सूचना दी। मामले में मो.जफर उसके बेटे नौशाद, शाहिद व इमरान को नामजद किया गया। चार्जशीट के आधार पर न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व परिस्थितियों को देखते हुए चारों को दोषी करार देकर परिवीक्षा की सजा सुनाई है।
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चारों को एक सप्ताह में 50-50 हजार रुपये के बंधपत्र प्रोवेशन अधिकारी के समक्ष देने होंगे। परिवीक्षा के दौरान सदाचारी रहेंगे और नियत तारीखों पर परिवीक्षा अधिकारी के समक्ष हाजिर होंगे। परिवीक्षा शर्तों का उल्लंघन करने पर पुन: अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई कर सकेगी।