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Aligarh: 3000 की बंदूक, बरामदगी में लगा दिए 50 हजार, 26 साल पहले लुटेरे भेजे जेल, फिर भी नहीं मिली

Sun, 29 Jun 2025 12:51 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 29 Jun 2025 12:51 PM IST
सार

आधी रात में करहला रोड पर कुआं गांव के रजबहे के पुल पर पहले से घात लगाकर बैठे सात-आठ बदमाशों ने पीड़ित को बंधक बनाकर बंदूक के साथ जेब में रखे रुपये व कागजात लूटकर लिए थे। यह घटना 26 साल पहले की है।

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Aligarh police could not recover the gun
बंदूक - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

आज से 26 वर्ष पहले लूटी गई तीन हजार की बंदूक की बरामदगी के लिए भागदौड़ में पुलिस ने 50 हजार रुपये खर्च कर दिए, उसके बावजूद बंदूक नहीं मिल सकी। पुलिस ने लूट के आरोप में तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया। उन पर लूट की चार्जशीट भी दे दी, लेकिन आज तक बंदूक का पता नहीं चल सका।

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अकराबाद के गांव जुझारपुर के ग्रामीण योगेंद्र प्रताप यादव संग नवंबर 1999 में लाइसेंसी इकनाली बंदूक की लूट हुई थी। योगेंद्र बताते हैं कि वे घटना वाली शाम अपने तहेरे भाई सुनहरी सिंह के साथ बरला के गांव पहाड़ीपुर स्थित अपनी ससुराल से साले की शादी से वापस लौट रहे थे। उनकी लाइसेंसी बंदूक कंधे पर लटकी थी। 
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आधी रात में करहला रोड पर कुआं गांव के रजबहे के पुल पर पहले से घात लगाकर बैठे सात-आठ बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर बंदूक के साथ जेब में रखे रुपये व कागजात लूटकर ले गए। उन्होंने एक बदमाश को पहचान लिया, जो पास के ही गांव का था। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। रात तक पूछताछ हुई, लेकिन पुलिस बंदूक बरामद नहीं कर पाई। अगली सुबह सियासी दबाव में पुलिस ने जेल भेजने के बजाय उसे छोड़ दिया।

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उस समय क्या हालात रहे ये तो कहना मुश्किल है। ये काफी पुराना प्रकरण है। फिर भी ऐसे मामलों में माल बरामदगी के लिए सुराग का तस्करा जीडी में डाला जाता है, ताकि कहीं कोई माल मिले तो उसकी पहचान कराई जा सके। मामले में समीक्षा की जाएगी। - अमृत जैन, एसपी देहात

लूट पर सियासी अखाड़ा बना अकराबाद थाना

आरोपी को छोड़ने पर तत्कालीन सत्ताधारी नेताओं की सिफारिश का आरोप उछला था। इसको लेकर विपक्षी दल के नेताओं व सिकंदराराऊ के तत्कालीन निर्दल विधायक अमर सिंह यादव ने थाने में धरना दिया। पुलिस पर सत्ता के पक्ष में लूट को दबाने का आरोप लगा। किसी तरह पुलिस ने पीडि़त पक्ष व विपक्ष को समझाकर शांत किया। दो दिन तक मची हायतौबा के बाद मामला शांत हुआ।

पर दम तोड़ गई बंदूक मिलने की उम्मीद
योगेंद्र बताते हैं कि पुलिस ने एक पखवाड़े तक खूब भागदौड़ की। अलीगढ़ के साथ-साथ हाथरस, कासगंज, एटा तक के बदमाशों के यहां दबिश दी गईं। तत्कालीन थाना प्रभारी ने अकराबाद बॉर्डर के विजयगढ़ क्षेत्र के तीन बदमाशों को जेल भेजे। उन्होंने लूट की बात स्वीकारी, लेकिन पुलिस बंदूक बरामद नहीं कर सकी। कुछ दिन थाने का चक्कर लगाने के बाद उन्होंने बंदूक मिलने की उम्मीद छोड़ दी।

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