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शराब कांडः बार कोड स्कैनर से शराब चेक नहीं हो पा रही, गलत आईडी लिख रहे ठेकेदार

Mon, 07 Jun 2021 12:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 12:52 AM IST
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Aligarh Poisonous Case
अमर उजाला में प्रकाशित खबर। - फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
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जहरीली शराब से जिले में 108 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस कांड के मुख्य आरोपी ऋषि शर्मा को पुलिस ने रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है। जहरीली शराब का ये कांड गुड ईवनिंग ब्रांड की नकली देशी शराब से हुआ है। इतना सब होने के बाद अभी तक बार कोड स्कैनर से शराब की जांच करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि जिले में कई शराब की दुकानों के बाहर लगे बोर्ड में दुकान की आईडी ही गलत लिखी गई है, जबकि इसी आईडी से लाइसेंसी दुकानदार को माल का आवंटन होता है। इसलिए ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैै। इसी बार कोड स्कैनर के माध्यम से शराब की जांच होती है।
जिले की अधिकांश दुकानों से शराब लेने के बाद उसेे उत्तर प्रदेश एक्साइज विभाग के बार कोड स्कैनर से चेक करना बहुत मुश्किल है। अंग्रेजी शराब से लेकर देशी शराब, बीयर की दुकानों में खुलेआम यही गोलमाल हो रहा है। इस गड़बड़झाले का प्रमुख कारण है, एक दुकान को आवंटित माल को दूसरी दुकान में खपाया जाना है। ऐसे में अंग्रेजी शराब और बीयर की दुकानों से मिल रही शराब या बीयर से भी बड़ी घटना हो सकती है। कुछ दुकानों में नकली और दूसरे राज्यों से आने वाली तस्करी की शराब इसी की आड़ में खपाई जा रही है।
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रविवार शाम करीब चार बजे क्वार्सी चौराहे की मॉडल वाइन शॉप से जब एक ग्राहक ने शराब खरीदी तो बार कोड स्कैनर से चेक करने में इसका खुलासा हुआ है। बार कोड स्कैनर में इस दुकान की आईडी 16234 क्वार्सी ए बताई जा रही थी। इसके विपरीत दुकान के बाहर लगे बड़े से बोर्ड में आईडी 162334 लिखी गई थी। जब सेल्समैन से पूछा गया तो उसने लाइसेंस की फोटोप्रति दिखाई, जिसमें सही आईडी लिखी थी। सेल्समैन ने माना कि दुकान के बाहर बोर्ड में गलत आईडी लिखी है। इस संबंध में जब एएससी प्रवर्तन आगरा एवं वर्तमान जिला आबकारी अधिकारी डा. सतीश चंद्र से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नियमानुसार ये बहुत गलत है। इस संबंध में आवंटी को नोटिस दिया जाएगा
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। अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि आबकारी विभाग को सालाना 700 करोड़ रुपये का टैक्स देने वाले ग्राहक शराब की गुणवत्ता कैसे चेक कर पाएंगे। जब दुकानों के बाहर ही गलत आईडी लिखी होगी।
गौर हो कि हाल ही में निलंबित हुए आगरा के ज्वाइंट कमिश्नर आरएस पाठक ने जहरीली शराब कांड में शराब को चेक करने के लिए बार कोड स्कैनर का इस्तेमाल कराया था। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस बार कोड से माल चेक किया था। अधिकारियों ने आम जनता को भी बार कोड स्कैनर का प्रयोग कर शराब की गुणवत्ता जांचने की सलाह दी थी।

लेकिन इतना बड़ा कांड होने के बाद भी आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार होता नहीं दिख रहा है। ठेकेदारों की मनमानी चरम पर है। उन पर नियम कानूनों का कोई अंकुश नहीं है। शायद विभागीय अधिकारियों को जहरीली शराब कांड से अब तक कोई सबक नहीं मिला है, क्योंकि अगर दुकानों में सघन चेकिंग हुई है तो ऐसी बड़ी गड़बड़ी नहीं होती।

क्वार्सी स्थित शराब की दुकान पर चस्पा आईडी।

क्वार्सी स्थित शराब की दुकान पर चस्पा आईडी।- फोटो : CITY OFFICE

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