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अलीगढ़ : शराब कांड पीड़ितों को भरोसा अब शासन से मिलेगा न्याय
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जहरीली शराब प्रकरण में भले ही मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने में 10 महीने गुजर गए हों, लेकिन सबकी निगाहें दोषी ठहराए गए 26 अफसरों व कर्मचारियों पर शासन स्तर से होने वाली कार्रवाई पर टिक गई है। उधर, जहरीली शराब सेवन से अपनों को खो चुके परिजनों को भरोसा है कि अब उन्हें सरकार से जल्द न्याय मिल सकेगा।
लोधा क्षेत्र के करसुआ गांव की द्रोपा देवी बेटे सुभाष की मौत के गम को अब तक नहीं भुला सकी हैं। गांव की राजवती देवी बताते हुए रो पड़ती हैं कि जहरीली शराब ने उनके इकलौते बेटे सुनील को लील लिया। आंसुओं के पीछे उनकी आंखों में गुस्से की आग भी नजर आती है। गांव के ही रामगोपाल बताते हैं कि जहरीली शराब ने गांव के नई उम्र के लड़कों को छीन लिया। समय तो गुजर जाएगा लेकिन यह दर्द अब कभी खत्म नहीं होगा। शराब कांड में मरने वालों के परिजनों का दर्द कम नहीं हो सका है।
पीड़ितों की मांग है कि इस प्रकरण में दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे जिले में फिर शराब कांड की पुनरावृत्ति न हो सके। भले ही ग्रामीण क्षेत्र के पीड़ितों को शासन स्तर से पांच-पांच लाख रुपये व शहरी क्षेत्र के पीड़ितों को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना के तहत 30-30 हजार रुपये देकर उनके जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया था, लेकिन शराब कांड के लिए जबावदेह लोगों पर कार्रवाई के लिए अभी भी पीड़ितों की आस शासन से है।
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लोधा क्षेत्र के करसुआ गांव की द्रोपा देवी बेटे सुभाष की मौत के गम को अब तक नहीं भुला सकी हैं। गांव की राजवती देवी बताते हुए रो पड़ती हैं कि जहरीली शराब ने उनके इकलौते बेटे सुनील को लील लिया। आंसुओं के पीछे उनकी आंखों में गुस्से की आग भी नजर आती है। गांव के ही रामगोपाल बताते हैं कि जहरीली शराब ने गांव के नई उम्र के लड़कों को छीन लिया। समय तो गुजर जाएगा लेकिन यह दर्द अब कभी खत्म नहीं होगा। शराब कांड में मरने वालों के परिजनों का दर्द कम नहीं हो सका है।
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पीड़ितों की मांग है कि इस प्रकरण में दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे जिले में फिर शराब कांड की पुनरावृत्ति न हो सके। भले ही ग्रामीण क्षेत्र के पीड़ितों को शासन स्तर से पांच-पांच लाख रुपये व शहरी क्षेत्र के पीड़ितों को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना के तहत 30-30 हजार रुपये देकर उनके जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया था, लेकिन शराब कांड के लिए जबावदेह लोगों पर कार्रवाई के लिए अभी भी पीड़ितों की आस शासन से है।
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