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अलीगढ़ जिला अस्पताल में मरीज परेशान, डॉक्टरों को करना पड़ता है तीन घंटे इंतजार
Wed, 19 Jun 2019 05:51 PM IST
शाहरुख खान
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Jun 2019 05:51 PM IST
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अस्पताल में आए मरीज और उनके परिजन
- फोटो : एएनआई
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अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल के हाल-बेहाल हैं। यहां डॉक्टरों की कमी है, मरीज कई घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते हैं, लेकिन फिर भी डॉक्टर नहीं आते। अस्पताल में कुत्ते घूमते रहते हैं। अधिकारी ध्यान देने के लिए तैयार नहीं है।
अस्पताल आए मरीज और उनके रिश्तेदारों का कहना है कि वे बुधवार को 2-3 घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते रहे, अस्पताल के अंदर एक कुत्ता भी देखा गया। इस बारे में जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आर कृष्ण से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैंने खुद एक पत्र लिखा था, और कुत्तों की मौजूदगी के बारे में नगर पालिका को अवगत कराया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि 300 बेड वाले अस्पतालों में 20 ईएमओ (आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी) होने चाहिए। लेकिन हमारे पास केवल 2 थे, उनमें से भी एक बिना किसी सूचना के चला गया। अब अस्पताल में केवल एक ईएमओ हैं। इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सक आपातकालीन मामलों को ले रहे हैं, हम मरीजों को उनकी सेवाएं देने में सक्षम नहीं हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि हम न्यूनतम सुविधा अधिकतम काम के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी है, नीति आयोग व्यवस्थाओं के बारे में प्रामाणिक जानकारी लेने के लिए अस्पतालों का दौरा करने जा रहा है। इसके बाद स्थिति में सुधार हो सकता है।
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अस्पताल आए मरीज और उनके रिश्तेदारों का कहना है कि वे बुधवार को 2-3 घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते रहे, अस्पताल के अंदर एक कुत्ता भी देखा गया। इस बारे में जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आर कृष्ण से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैंने खुद एक पत्र लिखा था, और कुत्तों की मौजूदगी के बारे में नगर पालिका को अवगत कराया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने बताया कि 300 बेड वाले अस्पतालों में 20 ईएमओ (आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी) होने चाहिए। लेकिन हमारे पास केवल 2 थे, उनमें से भी एक बिना किसी सूचना के चला गया। अब अस्पताल में केवल एक ईएमओ हैं। इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सक आपातकालीन मामलों को ले रहे हैं, हम मरीजों को उनकी सेवाएं देने में सक्षम नहीं हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि हम न्यूनतम सुविधा अधिकतम काम के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी है, नीति आयोग व्यवस्थाओं के बारे में प्रामाणिक जानकारी लेने के लिए अस्पतालों का दौरा करने जा रहा है। इसके बाद स्थिति में सुधार हो सकता है।