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एएमयू के गजट में मूल लोगो न होने पर एतराज
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का गजट चर्चाओं में है।यूनिवर्सिटी का मूल लोगो न होने पर छात्रों ने एतराज जताया है।इस वक्त न लोग अहमियत न दे रहे हों, लेकिन जो यूनिवर्सिटी पर लिखता है, खंगालता है, वह गजट के हवाले के बगैर काम नहीं कर सकता।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का गजट चर्चाओं में है। यूनिवर्सिटी का मूल लोगो न होने पर छात्रों ने एतराज जताया है। साथ ही, कोविड-19 टीकाकरण के गजट के विशेष अंक में कुलपति के वैक्सीन ट्रायल से हटने का जिक्र नहीं है।
जुलाई 2022 के कोविड-19 टीकाकरण पर गजट के विशेष अंक के कवर पेज में जो लोगो है, उसको लेकर छात्रों का कहना है कि यह लोगो का पूर्ण स्वरूप नहीं है। छात्रों ने कहा कि गजट में प्रशंसा के समाचारों की कतरनें हैं, लेकिन इस बात का जिक्र नहीं है, जिसमें वैक्सीन ट्रायल से कुलपति क्यों हट गए थे, जबकि गजट में उन्हें पहला शख्स बताया गया है, जिन्होंने वैक्सीन ट्रायल के लिए अपना नाम दर्ज कराया था।
एएमयू के प्रो. मोहम्मद शमीम के अनुसार, कुलपति को ट्रायल से कुछ दिन पहले इंफ्लूएंजा की वैक्सीन दी गई थी, जो उन्हें हर साल दी जाती है। इसलिए वह वैक्सीन ट्रायल के मानक से बाहर हो गए हैं। उन्हें ट्रायल में शामिल नहीं किया जा सकता। छात्रों ने कहा कि गजट में काफी खामियां हैं, जो सच से परे है। यह अंक यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर नहीं है।
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एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि गजट यूनिवर्सिटी का अक्स है। यह गजट प्रतिष्ठित पत्रिका है, जिसे सर सैयद अहमद खान ने शुरुआत की थी। उस परंपरा को कायम रखना चाहिए। सर सैयद की सोच को आगे बढ़ाना चाहिए। इस वक्त न लोग अहमियत न दे रहे हों, लेकिन जो यूनिवर्सिटी पर लिखता है, खंगालता है, वह गजट के हवाले के बगैर काम नहीं कर सकता।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का गजट चर्चाओं में है। यूनिवर्सिटी का मूल लोगो न होने पर छात्रों ने एतराज जताया है। साथ ही, कोविड-19 टीकाकरण के गजट के विशेष अंक में कुलपति के वैक्सीन ट्रायल से हटने का जिक्र नहीं है।
जुलाई 2022 के कोविड-19 टीकाकरण पर गजट के विशेष अंक के कवर पेज में जो लोगो है, उसको लेकर छात्रों का कहना है कि यह लोगो का पूर्ण स्वरूप नहीं है। छात्रों ने कहा कि गजट में प्रशंसा के समाचारों की कतरनें हैं, लेकिन इस बात का जिक्र नहीं है, जिसमें वैक्सीन ट्रायल से कुलपति क्यों हट गए थे, जबकि गजट में उन्हें पहला शख्स बताया गया है, जिन्होंने वैक्सीन ट्रायल के लिए अपना नाम दर्ज कराया था।
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एएमयू के प्रो. मोहम्मद शमीम के अनुसार, कुलपति को ट्रायल से कुछ दिन पहले इंफ्लूएंजा की वैक्सीन दी गई थी, जो उन्हें हर साल दी जाती है। इसलिए वह वैक्सीन ट्रायल के मानक से बाहर हो गए हैं। उन्हें ट्रायल में शामिल नहीं किया जा सकता। छात्रों ने कहा कि गजट में काफी खामियां हैं, जो सच से परे है। यह अंक यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर नहीं है।
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एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि गजट यूनिवर्सिटी का अक्स है। यह गजट प्रतिष्ठित पत्रिका है, जिसे सर सैयद अहमद खान ने शुरुआत की थी। उस परंपरा को कायम रखना चाहिए। सर सैयद की सोच को आगे बढ़ाना चाहिए। इस वक्त न लोग अहमियत न दे रहे हों, लेकिन जो यूनिवर्सिटी पर लिखता है, खंगालता है, वह गजट के हवाले के बगैर काम नहीं कर सकता।