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अलीगढ़ : गांधीपार्क बस अड्डे पर न यात्री शेड और न पानी
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छांव ही सहारा... गांधी पार्क बस अड्डे पर चिलचिलाती धूप में बस की छांव में बैठकर बस का इंतजार करते बच
- फोटो : CITY OFFICE
गांधीपार्क बस अड्डे से प्रतिदिन लगभग तीन हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन यहां पर यात्री सुविधाएं पूरी नहीं हैं। बस अड्डे पर यात्रियों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं है और न ही यहां पर शेड है। ऐसे में भीषण गर्मी में यात्रियों को धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
प्यास लगने पर मजबूरन ठंडे पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। अवैध वेंडर यहां पानी बेचने का कारोबार करते हैं। यात्रियों का कहना है कि हर टिकट पर सुविधा शुल्क भी लिया जाता है लेकिन यात्रियों को सुविधाएं नहीं मिलती हैं। शहर के बीचों-बीच सबसे व्यस्त गांधीपार्क बस अड्डे का जीर्णोद्धार 2016 में हुआ था।
जनवरी 2017 से विभिन्न रूटों की बसों का संचालन शुरू हुआ। पांच साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन यहां पर अभी तक जनता को शुद्ध और ठंडे पानी के साथ गर्मी से बचने के लिए छाया तक नसीब नहीं होती है। लोग धूप में खड़े होकर ही बसों का इंतजार करते हैं।
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वहीं, बस अड्डा परिसर में दो प्याऊ हैं, जिसमें एक प्याऊ से बढ़ते तापमान की वजह से गर्म पानी निकलता है, जबकि दूसरा आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब पड़ा है। इसका फायदा पानी बेचने का धंधा करने वाले उठा रहे हैं। अवैध वेंडर यहां पर बेरोक-टोक पानी की बोतल बेचते हैं। आरोप है कि इन्हीं वेंडरों की मिलीभगत से आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब कर दिया जाता है। अधिकारी इन वेंडरों पर कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं।
इन बसों का होता है संचालन
- गांधीपार्क बस अड्डे से कासगंज, बरेली, आगरा, एटा, कानपुर, लखनऊ, मैनपुरी रूट की बसें चलती हैं। 24 घंटे में तकरीबन 60-70 बसें यहां से होकर गुजरती हैं, जबकि बुद्ध विहार डिपो की तकरीबन 40 बसें भी अलग से चलती हैं।
- बस अड्डे के अंदर इमारत में छाया और पंखे की पर्याप्त व्यवस्था है। आरओ प्लांट ठीक कराने में तकरीबन 25-30 हजार रुपये लग जाएंगे। वाटर कूलर भी खराब है। जल्द ही दोनों को ठीक कराया जाएगा। वेंडर पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बसों के अंदर लोगों को बोतल उपलब्ध करा रहा है तो इससे सवारियों को ही सहूलियत मिलती है।
- योगेंद्रपाल सिंह, एआरएम बुद्ध विहार डिपो।
प्याऊ के अंदर नहीं होती है साफ-सफाई
- बस अड्डे की जिस प्याऊ का आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब है। उस कमरे का ताला महीनों से खुला नहीं है। वाटर कूलर के ऊपर मकड़ी के जाल और धूल जमी रहती है, जबकि आरओ प्लांट के नीचे गंदगी रहती है।
मजबूरन खरीदना पड़ता है पानी
- सिकंदराराऊ जा रही हूं। बस अड्डा परिसर में कहीं भी गर्मी से राहत के लिए छाया का इंतजाम नहीं है। ऊपर ठंडा पानी भी उपलब्ध नहीं है। मजबूरन 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदी है। -मुंदरा, पला साहिबाबाद।
- रोडवेज बस अड्डे पर लगी प्याऊ से गर्म पानी निकल रहा है। हद हो गई है। टिकट में इंश्योरेंस के साथ सुविधा शुल्क वसूला जाता है। लेकिन यात्रियों को कहीं भी ठंडा पानी उपलब्ध नहीं है। -आशा, कासगंज।
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प्यास लगने पर मजबूरन ठंडे पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। अवैध वेंडर यहां पानी बेचने का कारोबार करते हैं। यात्रियों का कहना है कि हर टिकट पर सुविधा शुल्क भी लिया जाता है लेकिन यात्रियों को सुविधाएं नहीं मिलती हैं। शहर के बीचों-बीच सबसे व्यस्त गांधीपार्क बस अड्डे का जीर्णोद्धार 2016 में हुआ था।
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जनवरी 2017 से विभिन्न रूटों की बसों का संचालन शुरू हुआ। पांच साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन यहां पर अभी तक जनता को शुद्ध और ठंडे पानी के साथ गर्मी से बचने के लिए छाया तक नसीब नहीं होती है। लोग धूप में खड़े होकर ही बसों का इंतजार करते हैं।
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वहीं, बस अड्डा परिसर में दो प्याऊ हैं, जिसमें एक प्याऊ से बढ़ते तापमान की वजह से गर्म पानी निकलता है, जबकि दूसरा आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब पड़ा है। इसका फायदा पानी बेचने का धंधा करने वाले उठा रहे हैं। अवैध वेंडर यहां पर बेरोक-टोक पानी की बोतल बेचते हैं। आरोप है कि इन्हीं वेंडरों की मिलीभगत से आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब कर दिया जाता है। अधिकारी इन वेंडरों पर कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं।
इन बसों का होता है संचालन
- गांधीपार्क बस अड्डे से कासगंज, बरेली, आगरा, एटा, कानपुर, लखनऊ, मैनपुरी रूट की बसें चलती हैं। 24 घंटे में तकरीबन 60-70 बसें यहां से होकर गुजरती हैं, जबकि बुद्ध विहार डिपो की तकरीबन 40 बसें भी अलग से चलती हैं।
- बस अड्डे के अंदर इमारत में छाया और पंखे की पर्याप्त व्यवस्था है। आरओ प्लांट ठीक कराने में तकरीबन 25-30 हजार रुपये लग जाएंगे। वाटर कूलर भी खराब है। जल्द ही दोनों को ठीक कराया जाएगा। वेंडर पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति बसों के अंदर लोगों को बोतल उपलब्ध करा रहा है तो इससे सवारियों को ही सहूलियत मिलती है।
- योगेंद्रपाल सिंह, एआरएम बुद्ध विहार डिपो।
प्याऊ के अंदर नहीं होती है साफ-सफाई
- बस अड्डे की जिस प्याऊ का आरओ प्लांट और वाटर कूलर खराब है। उस कमरे का ताला महीनों से खुला नहीं है। वाटर कूलर के ऊपर मकड़ी के जाल और धूल जमी रहती है, जबकि आरओ प्लांट के नीचे गंदगी रहती है।
मजबूरन खरीदना पड़ता है पानी
- सिकंदराराऊ जा रही हूं। बस अड्डा परिसर में कहीं भी गर्मी से राहत के लिए छाया का इंतजाम नहीं है। ऊपर ठंडा पानी भी उपलब्ध नहीं है। मजबूरन 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदी है। -मुंदरा, पला साहिबाबाद।
- रोडवेज बस अड्डे पर लगी प्याऊ से गर्म पानी निकल रहा है। हद हो गई है। टिकट में इंश्योरेंस के साथ सुविधा शुल्क वसूला जाता है। लेकिन यात्रियों को कहीं भी ठंडा पानी उपलब्ध नहीं है। -आशा, कासगंज।