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अलीगढ़ : गोशालाओं में न चारा न पानी...ठंड से ठिठुर रहे गोवंश
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रिंकू शर्मा, अलीगढ़।
गोशालाओं में गोवंश की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां भरपूर व्यवस्थाएं की गई हैं और नोडल अफसर लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार करा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। आलम यह है कि जिले की अधिकांश गोशालाओं में गोवंश को दोनों वक्त का भरपेट चारा व पानी नसीब नहीं हो रहा है। गोवंश सूखा चारा खाने को मजबूर हैं। रोजाना लाखों रुपये का बजट निराश्रित गोवंश की देखभाल व चारे की व्यवस्थाओं पर खर्च हो रहा है।
खैर क्षेत्र में गोशालाओं की स्थिति ठीक नहीं हैं। गोवंश को चारा-पानी तक मिलना मुश्किल हो रहा है। बड़ी संख्या में गोवंश भूखे-प्यासे घूम रहे हैं। गोवंश लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर व यूनीवर्सिटी के लिए चिन्हित अंडला गांव में दर्जनों गोवंश लगातार निराश्रित घूम रहे हैं। लोधा के खेरेश्वर धाम की गोशाला की क्षमता 1000 पशुओं की है, यहां पर 350 गोवंश हैं।
तमाम पशु बाहर घूमते हैं। मडराक क्षेत्र के भकरौला गांव स्थित गोशाला में 25 गाय-बछड़े हैं। दीवार न बनने से गोवंश इधर-उधर घूमते रहते हैं। इगलास क्षेत्र में 20 गोशालाएं हैं। इनमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। इसके चलते यहां चारा-पानी समेत तमाम समस्याएं हैं। व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं हैं। सूखे चारे से ही गोवंश अपना पेट भर रहे हैं।
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चंडौस क्षेत्र में गोशालाओं में चारे- पानी की व्यवस्था तो सही है लेकिन बारिश व सर्दी से बचाव के लिए टिन शेड तक नहीं है। दादों क्षेत्र के गांव नवीपुर में गोशालाओं में से अधिकांश में चारे-पानी की व्यवस्था ठीक नहीं हैं। यहां कीचड़ व जलभराव की दिक्कत है।
गभाना क्षेत्र की गोशालाओं में भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। जखौता, वीरपुरा में बनी गोशालाओं में जलभराव की स्थिति है। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हैं। गोशालाओं की स्थिति दयनीय होने व चारा-पानी के अभाव में गोवंश लगातार दम तोड़ रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी दावों में सब कुछ सही चल रहा है।
देहात क्षेत्र में गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों में नगर निकायों व शहरी क्षेत्र में नगर निगम की है। गोशालाओं में बेहतर प्रबंधन के लिए पशु चिकित्सकों व नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर रखी है। जिला स्तरीय अफसर भी निरीक्षण करते हैं। अगर कहीं कोई खामी है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. सीवी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
निराश्रित गोवंश... 29 लोगों की ले चुके जान
खेतों और सड़कों पर गोवंश का झुंड बना मुसीबत, इस साल 79 लोग हो चुके हैं घायल
फसलों को पहुंचा रहे नुकसान, समस्या का समाधान न होने से किसानों व ग्रामीणों में गुस्सा
केस-1
- 31 मई 2021 को खैर कोतवाली क्षेत्र के बिसारा गांव निवासी 32 वर्षीय किसान अमन उर्फ आशु खेत से सब्जी लेकर मंडी बेचने गए थे। तभी निराश्रित गोवंश ने हमला कर दिया, इस हमले में उनकी मौत हो गई थी।
केस-2
- छह अक्टूबर 2021 को गोधा क्षेत्र के गांव पड़का निवासी 75 वर्षीय सुखराम पर खेतों पर पैदल जाते समय गोवंश ने हमला कर दिया। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
किसानों के साथ ही आमजन के लिए खेतों व सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश मुसीबत बने हुए हैं। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही ये हमलावर हो रहे हैं। इस साल अब तक गोवंश के हमलों में 29 लोगों की मौत हो चुकी है। इनके अलावा, 79 लोग घायल होकर जिंदगी भर का दंश झेलने को मजबूर हो गए हैं। शहर से लेकर देहात तक सड़कों व खेतों पर छुट्टा गोवंश का आतंक है। फसल नुकसान के साथ साथ जान जाने से किसानों व ग्रामीणों में इन निराक्षित गोवंश के प्रति गुस्सा है।
किसानों के साथ ही आम जनता के लिए खेतों व सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश खासे मुसीबत बने हुए हैं। एक ओर गोवंश का झुंड किसानों की फसलों को चट कर जाता है तो वहीं खड़ी फसल को भी अच्छा खासा नुकसान पहुंचाते हैं।
सड़क पर इनकी धमाचौकड़ी से लोग आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद अफसर इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। गांवों में लाखों रुपये खर्च करके गोशालाओं का निर्माण करवाया गया है। इसके बावजूद निराश्रित गोवंश खेतों व सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
हाईवे पर हादसों का बन रहे कारण
जीटी रोड व हाईवे पर घूमने वाले छुट्टा पशु अब हादसों का सबब बन रहे हैं। रात में वाहनों की तेज रोशनी व कोहरे की धुंध के कारण पशु दिख नहीं पाते हैं और वाहन इनसे टकरा जाते हैं।
रेल संचालन में भी बन रहे बाधक
छुट्टा पशु रेल संचालन में भी बाधक बन रहे हैं। इनके ट्रैक पर आ जाने से दुर्घटनाएं होने का खतरा बढ़ गया है। बीते साल मडराक से लेकर डांबर रेलवे स्टेशन के बीच करीब 1429 पशुओं की ट्रेनों की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। इस साल अब तक 893 पशुओं की मौत हो चुकी है। इस तरह के हादसों से बचाव के लिए रेलवे ने प्रयागराज से गाजियाबाद के बीच ट्रैक के सहारे बाउंड्रीवाल कराने का निर्णय लिया है।
इस साल की प्रमुख घटनाएं
21 दिसंबर : गभाना के जखौता में किसान को गोवंश ने पटक-पटक कर मार डाला
18 जनवरी : लोधा में गोवंश के हमले में व्यक्ति की मौत
14 फरवरी : अतरौली के तेवथू में छुट्टा पशु के हमले में किसान की मौत
21 मार्च : छर्रा के पुरैनी में महिला की निराश्रित गोवंश के हमले में मौत
12 जून : खैर के फतेह नगलिया में शौच को निकले वृद्ध की हमले में मौत
23 अगस्त : अतरौली के बिजौली में महिला को गोवंश ने मार डाला
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गोशालाओं में गोवंश की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां भरपूर व्यवस्थाएं की गई हैं और नोडल अफसर लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार करा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। आलम यह है कि जिले की अधिकांश गोशालाओं में गोवंश को दोनों वक्त का भरपेट चारा व पानी नसीब नहीं हो रहा है। गोवंश सूखा चारा खाने को मजबूर हैं। रोजाना लाखों रुपये का बजट निराश्रित गोवंश की देखभाल व चारे की व्यवस्थाओं पर खर्च हो रहा है।
खैर क्षेत्र में गोशालाओं की स्थिति ठीक नहीं हैं। गोवंश को चारा-पानी तक मिलना मुश्किल हो रहा है। बड़ी संख्या में गोवंश भूखे-प्यासे घूम रहे हैं। गोवंश लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर व यूनीवर्सिटी के लिए चिन्हित अंडला गांव में दर्जनों गोवंश लगातार निराश्रित घूम रहे हैं। लोधा के खेरेश्वर धाम की गोशाला की क्षमता 1000 पशुओं की है, यहां पर 350 गोवंश हैं।
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तमाम पशु बाहर घूमते हैं। मडराक क्षेत्र के भकरौला गांव स्थित गोशाला में 25 गाय-बछड़े हैं। दीवार न बनने से गोवंश इधर-उधर घूमते रहते हैं। इगलास क्षेत्र में 20 गोशालाएं हैं। इनमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। इसके चलते यहां चारा-पानी समेत तमाम समस्याएं हैं। व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं हैं। सूखे चारे से ही गोवंश अपना पेट भर रहे हैं।
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चंडौस क्षेत्र में गोशालाओं में चारे- पानी की व्यवस्था तो सही है लेकिन बारिश व सर्दी से बचाव के लिए टिन शेड तक नहीं है। दादों क्षेत्र के गांव नवीपुर में गोशालाओं में से अधिकांश में चारे-पानी की व्यवस्था ठीक नहीं हैं। यहां कीचड़ व जलभराव की दिक्कत है।
गभाना क्षेत्र की गोशालाओं में भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। जखौता, वीरपुरा में बनी गोशालाओं में जलभराव की स्थिति है। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हैं। गोशालाओं की स्थिति दयनीय होने व चारा-पानी के अभाव में गोवंश लगातार दम तोड़ रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी दावों में सब कुछ सही चल रहा है।
देहात क्षेत्र में गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों में नगर निकायों व शहरी क्षेत्र में नगर निगम की है। गोशालाओं में बेहतर प्रबंधन के लिए पशु चिकित्सकों व नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर रखी है। जिला स्तरीय अफसर भी निरीक्षण करते हैं। अगर कहीं कोई खामी है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. सीवी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
निराश्रित गोवंश... 29 लोगों की ले चुके जान
खेतों और सड़कों पर गोवंश का झुंड बना मुसीबत, इस साल 79 लोग हो चुके हैं घायल
फसलों को पहुंचा रहे नुकसान, समस्या का समाधान न होने से किसानों व ग्रामीणों में गुस्सा
केस-1
- 31 मई 2021 को खैर कोतवाली क्षेत्र के बिसारा गांव निवासी 32 वर्षीय किसान अमन उर्फ आशु खेत से सब्जी लेकर मंडी बेचने गए थे। तभी निराश्रित गोवंश ने हमला कर दिया, इस हमले में उनकी मौत हो गई थी।
केस-2
- छह अक्टूबर 2021 को गोधा क्षेत्र के गांव पड़का निवासी 75 वर्षीय सुखराम पर खेतों पर पैदल जाते समय गोवंश ने हमला कर दिया। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
किसानों के साथ ही आमजन के लिए खेतों व सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश मुसीबत बने हुए हैं। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही ये हमलावर हो रहे हैं। इस साल अब तक गोवंश के हमलों में 29 लोगों की मौत हो चुकी है। इनके अलावा, 79 लोग घायल होकर जिंदगी भर का दंश झेलने को मजबूर हो गए हैं। शहर से लेकर देहात तक सड़कों व खेतों पर छुट्टा गोवंश का आतंक है। फसल नुकसान के साथ साथ जान जाने से किसानों व ग्रामीणों में इन निराक्षित गोवंश के प्रति गुस्सा है।
किसानों के साथ ही आम जनता के लिए खेतों व सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश खासे मुसीबत बने हुए हैं। एक ओर गोवंश का झुंड किसानों की फसलों को चट कर जाता है तो वहीं खड़ी फसल को भी अच्छा खासा नुकसान पहुंचाते हैं।
सड़क पर इनकी धमाचौकड़ी से लोग आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद अफसर इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। गांवों में लाखों रुपये खर्च करके गोशालाओं का निर्माण करवाया गया है। इसके बावजूद निराश्रित गोवंश खेतों व सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
हाईवे पर हादसों का बन रहे कारण
जीटी रोड व हाईवे पर घूमने वाले छुट्टा पशु अब हादसों का सबब बन रहे हैं। रात में वाहनों की तेज रोशनी व कोहरे की धुंध के कारण पशु दिख नहीं पाते हैं और वाहन इनसे टकरा जाते हैं।
रेल संचालन में भी बन रहे बाधक
छुट्टा पशु रेल संचालन में भी बाधक बन रहे हैं। इनके ट्रैक पर आ जाने से दुर्घटनाएं होने का खतरा बढ़ गया है। बीते साल मडराक से लेकर डांबर रेलवे स्टेशन के बीच करीब 1429 पशुओं की ट्रेनों की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। इस साल अब तक 893 पशुओं की मौत हो चुकी है। इस तरह के हादसों से बचाव के लिए रेलवे ने प्रयागराज से गाजियाबाद के बीच ट्रैक के सहारे बाउंड्रीवाल कराने का निर्णय लिया है।
इस साल की प्रमुख घटनाएं
21 दिसंबर : गभाना के जखौता में किसान को गोवंश ने पटक-पटक कर मार डाला
18 जनवरी : लोधा में गोवंश के हमले में व्यक्ति की मौत
14 फरवरी : अतरौली के तेवथू में छुट्टा पशु के हमले में किसान की मौत
21 मार्च : छर्रा के पुरैनी में महिला की निराश्रित गोवंश के हमले में मौत
12 जून : खैर के फतेह नगलिया में शौच को निकले वृद्ध की हमले में मौत
23 अगस्त : अतरौली के बिजौली में महिला को गोवंश ने मार डाला