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कृषि कानूनों का विरोधः अब विधायक और सांसदों पर निकल रहा है गांव वालों का गुस्सा, बोले-घुसने नहीं देगे
Wed, 03 Feb 2021 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा (अलीगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा (अलीगढ़)
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 03 Feb 2021 03:00 AM IST
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भडीरा गांव में सर्वसमाज की पंचायत...
- फोटो : अमर उजाला
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तीनों कृषि कानूनों को लेकर लोगों का गुस्सा अब अपने यहां के भाजपा से विधायक और सांसदों पर निकलने लगा है। हिरनोटी गांव के बाद मंगलवार को भडीरा गांव में भी हुई सर्वसमाज की पंचायत में एलान किया गया कि भाजपा के विधायक और सांसद को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। भडीरा की पंचायत में खासतौर पर महिलाओं ने भी शामिल होकर सांसद-विधायकों के खिलाफ अपनी आवाज मुखर की।
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ग्रामीणों ने कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि इसलिए चुने थे कि वह सरकार तक हमारी बात पहुंचा सकें। इसके विपरीत किसानों के मौत के फरमान वाले तीनों कृषि कानूनों को बनाने में उन्होंने सरकार का साथ दिया। ऐसे जनप्रतिनिधियों का हमें कोई लाभ नहीं है। पंचायत में रामकटोरी, मुन्नी देवी, ओमवती देवी, रामश्री, प्रकाशी देवी, उर्मिला देवी, रामकला, रामवती, किरन देवी, राकेश देवी, विजेंद्री देवी, गंगा देवी, मिश्रीलाल, खजान सिंह, धर्मवीर सिंह, गिर्राज सिंह, दिनेश गौतम, भूपेंद्र सिंह, हरवीर सिंह, पूरन भंडारी आदि मौजूद रहे।
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घूंघट की ओट से बोलीं : टिकैत के आंसू खींच लाए धरने में
गोंडा के गांधी स्मारक पार्क में चल रहे क्रमिक धरने में मंगलवार को महिलाएं भी शामिल हो गईं। नारेबाजी करते हुए पहुंची इन महिलाओं ने चेहरे लंबे घूंघट से ढंक रखे थे लेकिन आवाज में केंद्र सरकार के खिलाफ ललकार थी। हिरनोटी महिला मंडल की अध्यक्ष ओमवती देवी ने घूंघट की ओट से धरने को संबोधित करते हुए कहा कि किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू उन्हें इस आंदोलन में खींच लाए हैं।
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ओमवती देवी ने कहा कि वह सभी (महिलाएं) किसी के भेजने अथवा बुलावे पर धरने में नहीं पहुंची हैं। हर पहलू को समझती हैं। किसान आंदोलन में परिवार समेत तन, मन व धन से अपनी भागीदारी निभाएंगी। कहा कि ऐसी सरकार हमने नहीं देखी कि किसान कृषि कानूनों को वापस कराना चाहते हैं और सरकार आंख, कान मूंदे हुए है। दिन-रात खेतों में मेहनत कर हम देश का पेट भरते हैं। क्या हम आतंकवादी हैं? दिल्ली की सीमाओं पर धरनास्थल के आसपाससीमेंटेड बैरिकेडिंग की जा रही है। क्या देश में तानाशाही का दौर है?
सुरेश देवी ने कहा कि प्रशासन ये जान ले कि हम खेतों में विषम परिस्थितियों में भी काम करने से नहीं हटते तो ये हालात क्या चीज हैं? महिला शक्ति गांव-गांव महिलाओं को जागरूक करेगी। धरने में गुड्डी देवी, सीमा देवी, रेखा देवी, जीतो देवी, ललता, ममता, शकुंतला, ओंकारी, चित्रा देवी, राजेश देवी, देवीचरन सिंह, देव गौतम, धर्मेंद्र, हरेंद्र सिंह, पंकज चौधरी आदि शामिल रहे।
कृषि कानूनों की वापसी तक जारी रहेगी लड़ाई
भारतीय किसान यूनियन का इस्माइलपुर गेट पर चौथे दिन भी धरना जारी रहा। तहसील अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती यह लड़ाई जारी रहेगी। कहा कि सरकार किसानों को गुमराह कर रही है। गाजीपुर सीमा पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों पर अत्याचार किया गया। किसान नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। धरने में छोटेलाल, अर्जुन सिंह, दाताराम, बाबी चौधरी, बन्ने चौधरी, नफीस, साकिर अली आदि मौजूद रहे।