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अलीगढ़ : सविनय अवज्ञा आंदोलन व नमक कानून तोड़ने की मनायी वर्षगांठ
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित करते अधिकारी।
- फोटो : CITY OFFICE
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आजादी का अमृत महोत्सव के तहत बुधवार को विकास भवन के गांधी सभागार में सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं नमक कानून तोड़ने की वर्षगांठ मनाई गई। इस मौके पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
जिला विकास अधिकारी भरत कुमार मिश्र की अध्यक्षता में 15 अगस्त 2023 तक चलने वाले कार्यक्रमों की शृंखला में एक गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें महात्मा गांधी के छह अप्रैल 1930 को दांडी यात्रा निकालकर नमक कानून को तोड़ने के लिए चलाए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन की वर्षगांठ पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमकर सराहा।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2021 से शुरू हुए दो वर्षीय आजादी के अमृत महोत्सव के माध्यम से आजादी के स्वतंत्रता आंदोलन के समय सेनानियों की सोच, जुनून, बलिदान और उस कालखंड के वातावरण से वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई किसी एक दिन एवं एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं थी। हमारा स्वतंत्रता आंदोलन न जाने कितने पड़ाव पार करता हुआ आगे बढ़ा और इसमें हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अलग-अलग भूमिकाओं का निर्वहन किया। सभी का लक्ष्य एक ही रहा, देश की आजादी।
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महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के काले नमक कानून को तोड़ने के लिए अपने 78 भरोसेमंद स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930 को दांडी तक 391 किलोमीटिर लंबी यात्रा की शुरुआत की थी। इस आंदोलन में ब्रिटिश राज के नमक कानून को तोड़ा। जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास संध्या रानी बघेल ने दांडी मार्च पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महात्मा गांधी का उद्देश्य नमक जैसे अनिवार्य तत्व पर ब्रिटिश हुकूमत पर लगाए गए टैक्स को हटाकर नमक कानून को तोड़ना था। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंवर प्रमोद सेनानी, सुरेंदर शर्मा, अमर पाल सिंह, सुरेश चंद्र शर्मा, मनमोहन सचदेवा, अजीत गुप्त निर्मल, परमवीर सिंह, चौधरी रणवीर सिंह, बसंत कुमार बंसल, सरदार स्वर्ण सिंह, सरदार हरवीस सिंह छावड़ा आदि मौजूद रहे।
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जिला विकास अधिकारी भरत कुमार मिश्र की अध्यक्षता में 15 अगस्त 2023 तक चलने वाले कार्यक्रमों की शृंखला में एक गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें महात्मा गांधी के छह अप्रैल 1930 को दांडी यात्रा निकालकर नमक कानून को तोड़ने के लिए चलाए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन की वर्षगांठ पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमकर सराहा।
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उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2021 से शुरू हुए दो वर्षीय आजादी के अमृत महोत्सव के माध्यम से आजादी के स्वतंत्रता आंदोलन के समय सेनानियों की सोच, जुनून, बलिदान और उस कालखंड के वातावरण से वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई किसी एक दिन एवं एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं थी। हमारा स्वतंत्रता आंदोलन न जाने कितने पड़ाव पार करता हुआ आगे बढ़ा और इसमें हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अलग-अलग भूमिकाओं का निर्वहन किया। सभी का लक्ष्य एक ही रहा, देश की आजादी।
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महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के काले नमक कानून को तोड़ने के लिए अपने 78 भरोसेमंद स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930 को दांडी तक 391 किलोमीटिर लंबी यात्रा की शुरुआत की थी। इस आंदोलन में ब्रिटिश राज के नमक कानून को तोड़ा। जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास संध्या रानी बघेल ने दांडी मार्च पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महात्मा गांधी का उद्देश्य नमक जैसे अनिवार्य तत्व पर ब्रिटिश हुकूमत पर लगाए गए टैक्स को हटाकर नमक कानून को तोड़ना था। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंवर प्रमोद सेनानी, सुरेंदर शर्मा, अमर पाल सिंह, सुरेश चंद्र शर्मा, मनमोहन सचदेवा, अजीत गुप्त निर्मल, परमवीर सिंह, चौधरी रणवीर सिंह, बसंत कुमार बंसल, सरदार स्वर्ण सिंह, सरदार हरवीस सिंह छावड़ा आदि मौजूद रहे।