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पिता के मित्र थे अलीगढ़ के मुस्लिम मेहरबान : मोदी
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राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ से जुड़े अपने बचपन के एक किस्से का जिक्र किया। उन्होंने अलीगढ़ के ताला सेल्समैन की अपने पिता से मित्रता का एक किस्सा मंच से साझा किया और कहा कि इस प्रकार वह अलीगढ़ शहर से बचपन में ही परिचित हो गए थे।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यहां अलीगढ़ में मुझे बचपन की पुरानी बात याद करने का मन कर रहा है। यह 55 या 60 साल पुरानी बात है। हम बच्चे थे। अलीगढ़ के एक सेल्समैन होते थे जो एक मुस्लिम मेहरबान थे। वह काली जैकेट पहनते थे। तीन महीने में एक बार गांव आते। वह मेरे गांव में और आसपास के गांवों की दुकानों में अपना ताला रखकर चले जाते। तीन महीने बाद फिर आते। सभी दुकानदारों से पैसा इकट्ठा करते और चले जाते थे। इसी क्रम में मेरे पिता के साथ उनकी अच्छी दोस्ती थी। गांव आते तो तीन चार दिन रुकते। जो पैसे दुकानदारों से वसूल करके लाते मेरे पिता के पास छोड़ जाते। तीन चार दिन बाद जब वह गांव छोड़कर जाते तो फिर वह सारे पैसे मेरे पिता से लेकर ट्रेन से निकल जाते थे। हमने बचपन में यूपी के दो शहरों परिचित रहे। एक सीतापुर दूसरा अलीगढ़। हमारे गांव में आंखों के इलाज के लिए हर कोई कहता सीतापुर जाओ। दूसरा इन महाशय के कारण अलीगढ़ बार-बार सुनते थे।
माना जा रहा है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी के अब्बाजान वाले तंजिया बयान से असहज मुस्लिम समाज में सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का भाव जगाने के लिए यह प्रसंग कारगर हो सकता है।
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संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यहां अलीगढ़ में मुझे बचपन की पुरानी बात याद करने का मन कर रहा है। यह 55 या 60 साल पुरानी बात है। हम बच्चे थे। अलीगढ़ के एक सेल्समैन होते थे जो एक मुस्लिम मेहरबान थे। वह काली जैकेट पहनते थे। तीन महीने में एक बार गांव आते। वह मेरे गांव में और आसपास के गांवों की दुकानों में अपना ताला रखकर चले जाते। तीन महीने बाद फिर आते। सभी दुकानदारों से पैसा इकट्ठा करते और चले जाते थे। इसी क्रम में मेरे पिता के साथ उनकी अच्छी दोस्ती थी। गांव आते तो तीन चार दिन रुकते। जो पैसे दुकानदारों से वसूल करके लाते मेरे पिता के पास छोड़ जाते। तीन चार दिन बाद जब वह गांव छोड़कर जाते तो फिर वह सारे पैसे मेरे पिता से लेकर ट्रेन से निकल जाते थे। हमने बचपन में यूपी के दो शहरों परिचित रहे। एक सीतापुर दूसरा अलीगढ़। हमारे गांव में आंखों के इलाज के लिए हर कोई कहता सीतापुर जाओ। दूसरा इन महाशय के कारण अलीगढ़ बार-बार सुनते थे।
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माना जा रहा है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी के अब्बाजान वाले तंजिया बयान से असहज मुस्लिम समाज में सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का भाव जगाने के लिए यह प्रसंग कारगर हो सकता है।
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