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अलीगढ़ः साहब! काम-धंधा ठप है, वाहन सरेंडर करवा दीजिए
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साहब! काम-धंधा नहीं चल रहा है, रोजी-रोटी का संकट है, ऐसे में वाहन का टैक्स कहां से चुकाएंगे, इसलिए हमारे वाहनों को सरेंडर करवा दीजिए। ये कहना था मंगलवार को आरटीओ दफ्तर में एआरटीओ प्रशासन के पटल पर प्रार्थनापत्र लेकर पहुंचे लोगों का। यहां करीब 100-150 लोगों की भीड़ थी। इनके अलावा, ऐसे लोग भी काफी संख्या में थे, जो अपने व्यावसायिक वाहन के सरेंडर की अवधि बढ़वाना चाहते थे। इस संबंध में एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह ने बताया कि नियमों के चलते सिर्फ छह महीने के टैक्स पर ही छूट दे पाएंगे।
कोरोना संक्रमण और इससे उपजे हालात के चलते काम धंधा चौपट हो गया था। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए थे। इस दौरान व्यावसायिक वाहनों के जरिये होने वाली आय भी ठप हो गई थी। वाहन मालिकों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा था। ऐसी स्थिति में लोग अपने वाहनों को सरेंडर कर टैक्स में छूट की मांग कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जिले में 375 स्कूली वाहन सरेंडर हुए थे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक 500 से अधिक व्यावसायिक वाहन सरेंडर हो चुके हैं। मंगलवार को तकरीबन 100 से 150 लोग प्रार्थनापत्र लेकर एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह के पास पहुंचे और काम धंधा न चलने का हवाला देकर वाहन सरेंडर करने के लिए प्रार्थनापत्र दिए। नियमानुसार, 100 से अधिक व्यावसायिक वाहन सरेंडर किए गए। इनके अलावा, कई लोग ऐसे भी थे, जो छह महीने गुजर जाने के बाद भी अपने व्यावसायिक वाहनों के सरेंडर की अवधि बढ़ाना चाहते थे। उनको बताया गया कि नियमानुसार सिर्फ छह महीने तक ही टैक्स में छूट मिलती है, इसके बाद कोई छूट नहीं दी जाएगी।
वाहन सरेंडर का ये है नियम
- नियमानुसार साल में कभी भी तीन महीने के लिए व्यावसायिक वाहन सरेंडर किया जा सकता है। यह नियम गाड़ी में काम कराने के लिए होता है। अगर तीन महीने से अधिक समय तक वाहन सरेंडर रखना चाहते हैं तो एक-एक महीने कर इसे तीन महीने तक बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार कुल छह महीने तक ही वाहन को सरेंडर किया जा सकता है। लेकिन वाहन सरेंडर की प्रक्रिया हालात पर निर्भर करती है। एआरटीओ प्रशासन की संस्तुति के बाद छह महीने तक ही सरेंडर अवधि बढ़ा सकते हैं।
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इस प्रकार जमा होता है टैक्स
- व्यावसायिक वाहनों का टैक्स अलग-अलग प्रकार के वाहनों पर अलग-अलग होता है। जैसे 54 सीटर बस पर 7325 रुपये महीने टैक्स जमा होता है। बड़ा ट्रक है तो तीन महीने का टैक्स छह हजार रुपये बनेगा। जबकि टैक्सी पर तीन महीने के 3900 रुपये टैक्स के जमा कराने होते हैं।
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कोरोना संक्रमण और इससे उपजे हालात के चलते काम धंधा चौपट हो गया था। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए थे। इस दौरान व्यावसायिक वाहनों के जरिये होने वाली आय भी ठप हो गई थी। वाहन मालिकों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा था। ऐसी स्थिति में लोग अपने वाहनों को सरेंडर कर टैक्स में छूट की मांग कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जिले में 375 स्कूली वाहन सरेंडर हुए थे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक 500 से अधिक व्यावसायिक वाहन सरेंडर हो चुके हैं। मंगलवार को तकरीबन 100 से 150 लोग प्रार्थनापत्र लेकर एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह के पास पहुंचे और काम धंधा न चलने का हवाला देकर वाहन सरेंडर करने के लिए प्रार्थनापत्र दिए। नियमानुसार, 100 से अधिक व्यावसायिक वाहन सरेंडर किए गए। इनके अलावा, कई लोग ऐसे भी थे, जो छह महीने गुजर जाने के बाद भी अपने व्यावसायिक वाहनों के सरेंडर की अवधि बढ़ाना चाहते थे। उनको बताया गया कि नियमानुसार सिर्फ छह महीने तक ही टैक्स में छूट मिलती है, इसके बाद कोई छूट नहीं दी जाएगी।
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वाहन सरेंडर का ये है नियम
- नियमानुसार साल में कभी भी तीन महीने के लिए व्यावसायिक वाहन सरेंडर किया जा सकता है। यह नियम गाड़ी में काम कराने के लिए होता है। अगर तीन महीने से अधिक समय तक वाहन सरेंडर रखना चाहते हैं तो एक-एक महीने कर इसे तीन महीने तक बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार कुल छह महीने तक ही वाहन को सरेंडर किया जा सकता है। लेकिन वाहन सरेंडर की प्रक्रिया हालात पर निर्भर करती है। एआरटीओ प्रशासन की संस्तुति के बाद छह महीने तक ही सरेंडर अवधि बढ़ा सकते हैं।
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इस प्रकार जमा होता है टैक्स
- व्यावसायिक वाहनों का टैक्स अलग-अलग प्रकार के वाहनों पर अलग-अलग होता है। जैसे 54 सीटर बस पर 7325 रुपये महीने टैक्स जमा होता है। बड़ा ट्रक है तो तीन महीने का टैक्स छह हजार रुपये बनेगा। जबकि टैक्सी पर तीन महीने के 3900 रुपये टैक्स के जमा कराने होते हैं।