{"_id":"6101ae488ebc3e5880713832","slug":"aligarh-news-city-office-news-ali269290147","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़-पलवल की 29 किमी सीमा का विवाद नए सिरे से निपटेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़-पलवल की 29 किमी सीमा का विवाद नए सिरे से निपटेगा
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यूपी हरियाणा सीमा विवाद निपटाने की नई पहल हो रही है, ताकि यमुना नदी के कटान का असर दोनों तरफ झंझट न पैदा करे। अलीगढ़-पलवल की 29 किमी सीमा पर नए सिरे से पैमाइश होगी। जिसमें पिलर लगा कर बाउंड्रीवाल बनेगी। इसके लिए जगह का सर्वे कर चिन्हांकन होगा। नए सिरे से जमीनों का रिकार्ड बनेगा। इसी रिकार्ड को नजीर माना जाएगा।
एसडीएम खैर अंजनी कुमार ने बताया कि मेरठ के मंडलायुक्त ने इस संबंध में हाल ही में बैठक की थी, जिसमें वह भी शामिल हुए।
एसडीएम खैर ने बताया कि अलीगढ़ पलवल के बीच 29 किमी की सीमा है। इसके लिए नए सिरे से अलीगढ़ और हरियाणा के पलवल जिले की सीमा का चिन्हांकन होगा। एक सर्वमान्य सहमति के बाद सीमा तय होगी। इस सीमा पर बाउंड्रीवाल बनाने का काम पीडब्ल्यूडी को सौंपा जाएगा। इसका डिजाइन पीडब्ल्यूडी बना रहा है। अलीगढ़ की सीमा के तकरीबन सात गांव इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन गांवों के लोगों का पलवल के लोगों के साथ अक्सर विवाद होता रहता है। इन गांवों में घरबरा, ऊंटासानी, शेरपुर, रैयतपुर-लालपुर, गिरधरपुर, धारागढ़ी, महराजगढ़, साजिलपुर, मालव, समस्तपुर शामिल हैं।
गौर हो कि लगभग तीन दशक से जारी इस विवाद का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है। कई बार दोनाें प्रदेशों के आला अफसरों के बीच बैठक होने के बाद भी कोई ठोस मसौदा तय नहीं हुआ है। अब नये सिरे से इसका प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
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एसडीएम खैर अंजनी कुमार ने बताया कि मेरठ के मंडलायुक्त ने इस संबंध में हाल ही में बैठक की थी, जिसमें वह भी शामिल हुए।
एसडीएम खैर ने बताया कि अलीगढ़ पलवल के बीच 29 किमी की सीमा है। इसके लिए नए सिरे से अलीगढ़ और हरियाणा के पलवल जिले की सीमा का चिन्हांकन होगा। एक सर्वमान्य सहमति के बाद सीमा तय होगी। इस सीमा पर बाउंड्रीवाल बनाने का काम पीडब्ल्यूडी को सौंपा जाएगा। इसका डिजाइन पीडब्ल्यूडी बना रहा है। अलीगढ़ की सीमा के तकरीबन सात गांव इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन गांवों के लोगों का पलवल के लोगों के साथ अक्सर विवाद होता रहता है। इन गांवों में घरबरा, ऊंटासानी, शेरपुर, रैयतपुर-लालपुर, गिरधरपुर, धारागढ़ी, महराजगढ़, साजिलपुर, मालव, समस्तपुर शामिल हैं।
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गौर हो कि लगभग तीन दशक से जारी इस विवाद का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है। कई बार दोनाें प्रदेशों के आला अफसरों के बीच बैठक होने के बाद भी कोई ठोस मसौदा तय नहीं हुआ है। अब नये सिरे से इसका प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
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