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अलीगढ़ः कोरोना से मां-पिता का छूटा साथ, प्रशासन ने थामा मुख्यधारा में लाने के लिए हाथ

Fri, 23 Jul 2021 01:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 01:06 AM IST
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Aligarh news
लाभार्थियों को योजना का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया। - फोटो : CITY OFFICE
कोरोना महामारी से अपने मां-पिता या इनमें से किसी एक को गंवा चुके नाबालिगों को प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सहायता राशि प्रदान की। प्रदेश सरकार की ओर से ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया था। स्थानीय स्तर पर कलेक्ट्रेट में कार्यक्रम हुआ। इसमें मुख्यमंत्री और राज्यपाल का संबोधन हुआ। इसके बाद स्थानीय स्तर पर 25 बच्चों को प्रतीकात्मक रूप से योजना से लाभ देने का प्रमाण पत्र डीएम चंद्रभूषण सिंह, शहर विधायक संजीव राजा और कोल विधायक अनिल पाराशर ने दिया। इस योजना के तहत जिले में कुल 76 बच्चों का चयन किया गया है। उनके अभिभावकों के खातों में प्रतिमाह 4000 रुपये के हिसाब से सहायता राशि भेजी जाएगी। प्रशासन के मुताबिक चयनित बच्चों में 39 बालिकाएं एवं 37 बालक हैं। इनमें से 5 बच्चे ऐसे हैं, जो कोरोना से माता-पिता दोनों को खो चुके हैं एवं 71 बच्चों ने माता-पिता में से किसी एक को खोया है।
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शहर विधायक संजीव राजा एवं कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रदेश के मुखिया द्वारा स्वयं कोरोना काल में निराश्रित एवं अनाथ हुए बच्चों की सुध लेते हुए उनको मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। उन्होंने कोविड प्रभावित बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह सभी आत्मविश्वास से आगे बढ़ें और खूब पढ़ें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की उचित देखभाल करें और उनके आगे बढ़ने में हर संभव मदद करें। प्रदेश सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का मुख्य उद्देश्य कोरोना वैश्विक महामारी में अनाथ व निराश्रित हुए बच्चों की देखभाल करते हुए उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करना है। योजना में 18 वर्ष की आयु तक के ऐसे बच्चों का चयन किया जाता है जिनके माता-पिता दोनों या फिर किसी एक की मृत्यु कोविड महामारी से हुई है। डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी समेत समस्त बीडीओ एवं एसडीएम को निर्देशित किया कि जनपद में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से कोई बच्चा छूटना नहीं चाहिए।
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उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ लाभ ही नहीं दिया जाए, बल्कि भावनात्मक सहयोग भी दिया जाए। जिला प्रोबेशन अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों के वैध संरक्षकों के खाते में 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। बच्चे को विद्यालय में प्रवेश दिलाकर टीकाकरण भी कराया जाएगा। बाल गृहों में रखे जाने वाले बच्चों का दाखिला अटल आवासीय विद्यालय एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में किया जाएगा। योजना में चिह्नित बालिकाओं के शादी योग्य होने पर विवाह के लिए एक लाख एक हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। कक्षा 9 या इससे ऊपर की कक्षा में या व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे 18 वर्ष तक के छात्रों को लैपटॉप या टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनपद में 160 आवेदन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 76 बच्चों को योजना के तहत चयनित करते हुए उनके अभिभावकों के खातों में तीन माह की धनराशि भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि चयनित बच्चों में 39 बालिकाएं एवं 37 बालक हैं। इनमें से 5 बच्चे ऐसे हैं जो माता-पिता दोनों को खो चुके हैं एवं 71 बच्चों ने माता पिता में से किसी एक को खोया है। कार्यक्रम में 25 बच्चों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए।
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