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सुधीर चौधरी के पलटने से पलट गया गणित
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टप्पल क्षेत्र के वार्ड नंबर 16 से निर्वाचित अंजू देवी पत्नी सुधीर सिंह चौधरी के पलटने से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की गणित पूरी तरह बदल गई है। चुनाव बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच गया है। सपा और भाजपा अपना-अपना दावा ठोक रही हैं।
दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान जाटलैंड से मशहूर क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ गोलबंदी हुई थी। स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं कि टप्पल क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 से कृष्णपाल लाला ही भाजपा की इज्जत बचा सके थे। वह एकमात्र जाट समाज से भाजपा के निर्वाचित जिपं सदस्य हैं। निर्वाचित 47 सदस्यों में से 15 जाट समाज से हैं, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशियों को पराजित कर जीत दर्ज की है। भाजपा को 9 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह चौधरी ने रालोद में शामिल होकर भाजपा की नींद उड़ा दी थी। उस समय सुधीर की पत्नी अंजू देवी अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं। रालोद, सपा एवं बसपा के अतिरिक्त निर्दलीय सदस्यों का साथ लेकर अध्यक्ष पद पर कब्जा करने की तैयारी चल रही थी। लेकिन कुछ आंतरिक मतभेद उभरने के बाद सुधीर सिंह ने पलटी मार दी। जिससे चुनावी गणित पूरी तरह से बदल गई।
जयवीर सिंह की रही महत्वपूर्ण भूमिका
एक जून को पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के जलालपुर स्थित फार्म हाउस पर एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, ठाकुर श्यौराज सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह के अतिरिक्त सुधीर सिंह चौधरी भी मौजूद थे। ठाकुर जयवीर सिंह किसी तरह सुधीर सिंह को मनाने में कामयाब हुए और उसके बाद सुधीर सिंह अध्यक्ष पद के लिए अपनी पत्नी अंजू देवी की दावेदारी से पीछे हट गए। बता दें कि सुधीर सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में जयवीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
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विजय सिंह के साथ रहीं अंजू
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान सुधीर सिंह चौधरी की पत्नी अंजू देवी भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह के साथ छाया की तरह मौजूद रहीं। कलक्ट्रेट पहुंचने के पहले अंजू देवी ठाकुर श्यौराज सिंह के कार्यालय पहुंच गई थीं और वहां भी विजय सिंह के साथ रहीं। विजय सिंह के प्रस्तावक-अनुमोदक की सूची में भी अंजू देवी का नाम है। नामांकन के समय ठाकुर जयवीर सिंह, सुधीर सिंह एवं अंजू देवी एक ही समय में कलक्ट्रेट में दाखिल हुए।
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दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान जाटलैंड से मशहूर क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ गोलबंदी हुई थी। स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं कि टप्पल क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 से कृष्णपाल लाला ही भाजपा की इज्जत बचा सके थे। वह एकमात्र जाट समाज से भाजपा के निर्वाचित जिपं सदस्य हैं। निर्वाचित 47 सदस्यों में से 15 जाट समाज से हैं, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशियों को पराजित कर जीत दर्ज की है। भाजपा को 9 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह चौधरी ने रालोद में शामिल होकर भाजपा की नींद उड़ा दी थी। उस समय सुधीर की पत्नी अंजू देवी अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं। रालोद, सपा एवं बसपा के अतिरिक्त निर्दलीय सदस्यों का साथ लेकर अध्यक्ष पद पर कब्जा करने की तैयारी चल रही थी। लेकिन कुछ आंतरिक मतभेद उभरने के बाद सुधीर सिंह ने पलटी मार दी। जिससे चुनावी गणित पूरी तरह से बदल गई।
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जयवीर सिंह की रही महत्वपूर्ण भूमिका
एक जून को पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह के जलालपुर स्थित फार्म हाउस पर एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, ठाकुर श्यौराज सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह के अतिरिक्त सुधीर सिंह चौधरी भी मौजूद थे। ठाकुर जयवीर सिंह किसी तरह सुधीर सिंह को मनाने में कामयाब हुए और उसके बाद सुधीर सिंह अध्यक्ष पद के लिए अपनी पत्नी अंजू देवी की दावेदारी से पीछे हट गए। बता दें कि सुधीर सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में जयवीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
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विजय सिंह के साथ रहीं अंजू
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान सुधीर सिंह चौधरी की पत्नी अंजू देवी भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह के साथ छाया की तरह मौजूद रहीं। कलक्ट्रेट पहुंचने के पहले अंजू देवी ठाकुर श्यौराज सिंह के कार्यालय पहुंच गई थीं और वहां भी विजय सिंह के साथ रहीं। विजय सिंह के प्रस्तावक-अनुमोदक की सूची में भी अंजू देवी का नाम है। नामांकन के समय ठाकुर जयवीर सिंह, सुधीर सिंह एवं अंजू देवी एक ही समय में कलक्ट्रेट में दाखिल हुए।