चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शहर के मंदिरों में सामान्य भीड़भाड़ में पूजा अर्चना हुई। दोपहर में विवाहिताओं ने सौभाग्यवती रहने के लिए निर्जला व्रत रखकर गणगौर पूजन किया। दोपहर में पूजा-पाठ के बाद पानी पीकर व्रत खोला। शाम को मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए भी पहुंचे।
बुधवार रात 12 बजे के बाद से विवाहिताओं ने गणगौर व्रत प्रारंभ किया। बृहस्पतिवार सुबह उठकर घर की शुद्धि की और स्नान किया। गणगौर व्रत का संकल्प याद कर महिलाओं ने चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा अर्चना की। कई श्रद्धालु शहर के मंदिरों में जल चढ़ाने और पूजा पाठ के लिए भी पहुंचे। तीसरे दिन श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य हो गई। महिलाओं ने दोपहर में चौकी लगाकर शिव-पार्वती, लक्ष्मी-गणेश, गणगौर विराजित किए। इनका पूजन कर धूप दीप जलाए। भोग-प्रसादी लगाकर गणगौर व्रत कथा सुनी और गीत गाए। पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने जल प्रसादी पीकर अपना निर्जला व्रत खोला। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। विवाहिताएं यह व्रत पति के दीर्घायु होने और अखंड सौभाग्यवती रहने के लिए रखती हैं। वहीं, नवरात्र के मौके पर शाम को श्रद्धालु देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे।