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जिनको अपने कंधा न दे सके... ये उनके सहारे बने

Fri, 26 Mar 2021 01:02 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Mar 2021 01:02 AM IST
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Aligarh news
लॉकडाउन में लोगों का अंतिम संस्कार करती मानव उपकार की टीम के सदस्य । फाइल फोटो - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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मानव उपकार संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी दो दशक से उन लावारिसों के अंतिम संस्कार कर रहे हैं, जिनको अपनों के कंधे नसीब नहीं होते। उन्होंने इसी मिशन की कड़ी में कोरोना/लॉकडाउन काल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए उन शवों के भी विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराए, जिनकी मौत के बाद कोविड प्रोटोकॉल के चलते उनके अपने हाथ बांधकर दूर खड़े देखते रहते थे। शायद यही वजह है कि लॉकडाउन और वैश्विक महामारी के सालभर पूरे होने पर कोरोना वारियर्स में बंटी और सहयोगियों का नाम अग्रिम पंक्ति में लिया जा रहा है।
बंटी बताते हैं, वैसे तो वह यह काम वर्ष 1999 से करते चले आ रहे हैं। मगर 22 मार्च 2020 से दो दिन पहले जब डीएम की अध्यक्षता में शहर के सामाजिक संगठनों की बैठक हुई तो उसमें उन्हें भी बुलाया गया। खुद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी। वह थी संस्था के बैनरतले कम्युनिटी किचिन चलाकर लोगों को तैयार भोजन मुहैया कराने की। हमने संगठन के सहयोग से 22 मार्च से किचिन शुरू कर दी और हमारी टीमों ने दिन हो या रात, घूम-घूमकर लोगों को खाना व चाय वितरित की। इस दौरान हमने दस लाख से अधिक लोगों तक भोजन मुहैया कराने का काम किया। जब शहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत होने लगी तो प्रशासन व स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए उन शवों के अंतिम संस्कार में सहयोग मांगा। हमने व हमारी टीम ने वह जिम्मेदारी निभाई। कोरोना से मौत के मामले में अधिकतर बाद ऐसे मौके आए कि मृत मरीज का परिवार हाथ बांधे दूर खड़ा है। मगर संस्था के सदस्य कोविड प्रोटोकाल का ध्यान रख जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैसे तो कोविड से 57 मौत जिले में हुई हैं। हमने इस दौर में करीब 100 शवों के कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार किए। बाकी ऐसे मरीज थे, जिनमें लक्षण तो थे, मगर कोविड की पुष्टि नहीं होती थी।
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एक घटना ने दोस्तों की मदद से शुरू कराई संस्था
आईटीआई रोड रिसाल सिंह नगर निवासी पूर्व मेयर आशुतोष वार्ष्णेय के भतीजे व मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले 49 वर्षीय विष्णु बंटी बताते हैं, वाकया 1999 का है। उस समय उम्र 27 साल रही होगी। दोस्तों संग शाम के वक्त बरौला के रास्ते सारसौल के ढाबे पर खाना खाने जा रहे थे। तभी नाले में एक रिक्शा वाला लाश फेंक रहा था। उस दिन उस घटना को नजरंदाज कर दिया। मगर दो-तीन दिन बाद दिन में वह अकेले उधर से जा रहे थे तो फिर वही घटना उन्होंने देखी। इस बार उनसे रहा नहीं गया और रिक्शा चालक से पूछ लिया कि क्या कर रहे हो। उसने जवाब दिया कि लावारिस शव है, पोस्टमार्टम केंद्र से पुलिस ने ठिकाने लगाने के लिए भेजा है। तभी मन में ये भाव आया कि यह गलत हो रहा है। उसके तीन-चार दिन बाद जिले में एसएसपी वीके मौर्या ने चार्ज लिया और मीडिया को दिए साक्षात्कार में किसी भी संगठन से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को आगे आने की अपील की। इस पर वे उत्साहित मन से दोस्तों संग एसएसपी से मिलने गए। एसएसपी ने उन्हें सुना और तत्कालीन एसपी सिटी गोविंद अग्रवाल के पास भेजा। एसपी सिटी ने उन्हें एनजीओ बनाकर काम शुरू करने की सलाह दी और बताया कि बमुश्किल महीने में दो या तीन शवों के अंतिम संस्कार करने होंगे। इसके बाद दोस्तों की राय पर मानव उपकार नाम से संस्था 26 जनवरी 2000 को खड़ी की।
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हाथरस पुलिस द्वारा शवों को फिंकवाना रुकवाया
हाथरस के जिला बनने के बाद वहां पोस्टमार्टम केंद्र न होने पर शव यहीं आते थे। वर्ष 2003 में दो शवों के गायब होने पर शोर मचा। हमने अपने स्तर से पड़ताल की तो पाया कि पोस्टमार्टम केंद्र के बगल के पोखर में शव फेंक दिए गए हैं। इस पर तत्कालीन एसएसपी पीसी मीणा से मिलकर नाराजगी जताई। उन्होंने एसपी हाथरस से संपर्क कर वाकया बताया। एसपी हाथरस ने तत्काल वहां से पुलिस भेज रात में शव पोखर से निकलवाए, जिनका हमने अंतिम संस्कार किया और फिर हाथरस से आने वाले लावारिस शवों के अंतिम संस्कार भी करने लगे।
- शहर की मानव उपकार संस्था ने जिला प्रशासन का पूरा सहयोग कोरोना व लॉकडाउन काल में किया। इस दौरान उन्होंने भोजन वितरण व कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था बखूबी निभाई। - विधान जायसवाल एडीएम वित्त/राजस्व

ये खास बातें
- 5100 से अधिक लावारिस शवों के अंतिम संस्कार दो दशक में
- 57 कोरोना संक्रमितों की मौत पर उनके अंतिम संस्कार किए हैं
- 50 ऐसे शवों के अंतिम संस्कार, जिनमें कोरोना की पुष्टि नहीं थी
- 10 लाख से अधिक लोगों को कम्युनिटी किचिन के जरिये भोजन कराया गया
- 960 आजीवन सदस्यों वाली संस्था में करीब दो दर्जन सक्रिय सदस्य कर रहे काम

विष्णु कुमार बंटी । मानव उपहार

विष्णु कुमार बंटी । मानव उपहार- फोटो : CITY OFFICE

विधान जायसवाल । एडीएम वित्त एवं राजस्व

विधान जायसवाल । एडीएम वित्त एवं राजस्व- फोटो : CITY OFFICE

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