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नुमाइश के होली मिलन समारोह पर इस बार भी महामारी की छाया
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होली के अवसर पर अलीगढ़ की गंगा जमुनी तहजीब का हिस्सा रहे और प्रतिवर्ष नुमाइश मैदान में लगने वाला होली मिलन समारोह संभवत: इस बार भी आयोजित न हो सके।
महामारी के चलते ऐसा दूसरी बार होगा कि प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाला यह होली मिलन समारोह आयोजित न हो सके। नुमाइश कार्यकारिणी के सदस्य और मानव अधिकार संस्था के प्रमुख विष्णु कुमार बंटी कहते हैं कि गत वर्ष उन्होंने निजी स्तर पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि इस बार बहुत सी परंपरा टूट रही हैं।
ख्वाजा चौक के रहने वाले बब्बू भाई कहते हैं कि सांप्रदायिक दंगों के लिए बदनाम अलीगढ़ शहर से यह कलंक धोने के लिए कई दशक पहले तत्कालीन जिलाधिकारी आरआर शाह के समय में सामूहिक रूप से होली मिलन समारोह आयोजित करने की शुरुआत मानी जा सकती है।
इसका एक बड़ा फायदा यह हुआ के विभिन्न संप्रदाय और विचारधारा के लोग एक ही स्थान पर आकर एक दूसरे से गले मिलते और शुभकामनाएं देते। प्रशासन का यह प्रयोग बेहद कामयाब साबित हुआ। बाद में यह समारोह एक प्रतीक बन गया और प्रदेश में अन्य शहरों में चर्चा का विषय बना, लेकिन अब महामारी के चलते इस वर्ष भी इसका आयोजन संभव दिखाई नहीं दे रहा है।
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नगर निगम द्वारा किए जाते हैं इंतजाम
अलीगढ़। होली से कई दिन पहले नगर निगम द्वारा जेसीबी मशीन के माध्यम से मैदान समतल किया जाता है। टेंट लगाए जाते हैं। जिसमें शहर की 40 से लेकर 50 संस्थाएं तक अपना शिविर लगाती हैं। इन शिविरों में मिश्री और सौंफ के साथ गुलाल की पुड़िया भी रखी जाती है, लेकिन इस बार नुमाइश मैदान पर कोई भी तैयारी देखने को नहीं मिल रही है।
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महामारी के चलते ऐसा दूसरी बार होगा कि प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाला यह होली मिलन समारोह आयोजित न हो सके। नुमाइश कार्यकारिणी के सदस्य और मानव अधिकार संस्था के प्रमुख विष्णु कुमार बंटी कहते हैं कि गत वर्ष उन्होंने निजी स्तर पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि इस बार बहुत सी परंपरा टूट रही हैं।
ख्वाजा चौक के रहने वाले बब्बू भाई कहते हैं कि सांप्रदायिक दंगों के लिए बदनाम अलीगढ़ शहर से यह कलंक धोने के लिए कई दशक पहले तत्कालीन जिलाधिकारी आरआर शाह के समय में सामूहिक रूप से होली मिलन समारोह आयोजित करने की शुरुआत मानी जा सकती है।
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इसका एक बड़ा फायदा यह हुआ के विभिन्न संप्रदाय और विचारधारा के लोग एक ही स्थान पर आकर एक दूसरे से गले मिलते और शुभकामनाएं देते। प्रशासन का यह प्रयोग बेहद कामयाब साबित हुआ। बाद में यह समारोह एक प्रतीक बन गया और प्रदेश में अन्य शहरों में चर्चा का विषय बना, लेकिन अब महामारी के चलते इस वर्ष भी इसका आयोजन संभव दिखाई नहीं दे रहा है।
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नगर निगम द्वारा किए जाते हैं इंतजाम
अलीगढ़। होली से कई दिन पहले नगर निगम द्वारा जेसीबी मशीन के माध्यम से मैदान समतल किया जाता है। टेंट लगाए जाते हैं। जिसमें शहर की 40 से लेकर 50 संस्थाएं तक अपना शिविर लगाती हैं। इन शिविरों में मिश्री और सौंफ के साथ गुलाल की पुड़िया भी रखी जाती है, लेकिन इस बार नुमाइश मैदान पर कोई भी तैयारी देखने को नहीं मिल रही है।