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गीतों की होली, नीरज के घर पर कभी होती थी जमकर ठिठोली
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प्रसिद्ध गीतकार गोपालदास नीरज के आवास पर सीढ़ियों पर उग आई है घास।
- फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
होली के अवसर पर अक्सर कविता और ठिठोली से गुलजार रहने वाला जनकपुरी स्थित पद्मभूषण गोपालदास नीरज का आवास उनके बाद अब होली के अवसर पर वीरान रहता है।
एक वक्त यहां कविता और रंग के साथ होली की खुमारी छाई रहती थी। नीरज के होली को केंद्र में रखकर लिखे गए गीत और पंक्तियां भी जोश के साथ प्रस्तुत की जाती थीं, लेकिन अब वह दौर और जमाने कहां।
नीरज जी जब तक हमारे बीच में थे तब तक प्रत्येक होली और अन्य त्योहार पर मैं अक्सर उनका आशीर्वाद लेने जाया करता था। उस दौरान होली सहित प्रत्येक त्योहार को लेकर उनके पास बहुत सारा साहित्य उपलब्ध रहता था। जिसकी देर तक चर्चा होती थी। बीच-बीच में अन्य लोग आते और बधाई आदि देकर चले जाया करते थे। अब यह सिर्फ यादें ही बची हैं।
- सुरेश कुमार, गजलकार
कभी-कभी होली के अवसर पर मैं हारमोनियम लेकर नीरज जी के यहां पहुंचता था और उन्हीं के लिखे गाने उन्हीं को सुनाया करता था। बेहद अद्भुत समय होता था जो होली पर अक्सर याद आ जाता है।
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-जॉनी फास्टर, संगीतकार और शायर
आर के स्टूडियो की होली में शामिल रहते थे नीरज
अलीगढ़। पद्म भूषण गोपालदास नीरज ने प्रसिद्ध निर्माता और निर्देशक राज कपूर के साथ भी काम किया। होली पर अक्सर वह आर के स्टूडियो की होली से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते थे।
नीरज कहते थे कि उस समय आरके की होली का आमंत्रण किसी को भी मिलना बेहद सम्मान की बात थी। स्टूडियो में एक बहुत बड़े स्वीमिंग पूल में रंग डाल दिया जाता था। बड़े-बड़े स्टार इसमें शामिल होते थे। आरके कैंप के संगीतकार और गायक अपने सुरों से आयोजन में जान डालते थे।
मुगल काल में भी खूब धूम रही है होली की : प्रोफेसर इरफान
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं कि जहांगीर ऐसे मुगल शासक थे, जिन्होंने बांस की पिचकारी का होली खेलने के लिए इस्तेमाल किया। पिचकारी का यह पैटर्न अभी भी चलन में है। इसमें बांस के अंदर वेक्यूम पैदा करता रंग भरा जाता है और फिर पीछे से दबाव डालकर रंग की फुहार आगे छोड़ी जाती है। इसके अलावा मुगल शासक शाह आलम भी हरम में और दरबारियों के साथ होली खेला करते थे। इसके चित्र भी उपलब्ध हैं।
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होली के अवसर पर अक्सर कविता और ठिठोली से गुलजार रहने वाला जनकपुरी स्थित पद्मभूषण गोपालदास नीरज का आवास उनके बाद अब होली के अवसर पर वीरान रहता है।
एक वक्त यहां कविता और रंग के साथ होली की खुमारी छाई रहती थी। नीरज के होली को केंद्र में रखकर लिखे गए गीत और पंक्तियां भी जोश के साथ प्रस्तुत की जाती थीं, लेकिन अब वह दौर और जमाने कहां।
नीरज जी जब तक हमारे बीच में थे तब तक प्रत्येक होली और अन्य त्योहार पर मैं अक्सर उनका आशीर्वाद लेने जाया करता था। उस दौरान होली सहित प्रत्येक त्योहार को लेकर उनके पास बहुत सारा साहित्य उपलब्ध रहता था। जिसकी देर तक चर्चा होती थी। बीच-बीच में अन्य लोग आते और बधाई आदि देकर चले जाया करते थे। अब यह सिर्फ यादें ही बची हैं।
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- सुरेश कुमार, गजलकार
कभी-कभी होली के अवसर पर मैं हारमोनियम लेकर नीरज जी के यहां पहुंचता था और उन्हीं के लिखे गाने उन्हीं को सुनाया करता था। बेहद अद्भुत समय होता था जो होली पर अक्सर याद आ जाता है।
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-जॉनी फास्टर, संगीतकार और शायर
आर के स्टूडियो की होली में शामिल रहते थे नीरज
अलीगढ़। पद्म भूषण गोपालदास नीरज ने प्रसिद्ध निर्माता और निर्देशक राज कपूर के साथ भी काम किया। होली पर अक्सर वह आर के स्टूडियो की होली से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते थे।
नीरज कहते थे कि उस समय आरके की होली का आमंत्रण किसी को भी मिलना बेहद सम्मान की बात थी। स्टूडियो में एक बहुत बड़े स्वीमिंग पूल में रंग डाल दिया जाता था। बड़े-बड़े स्टार इसमें शामिल होते थे। आरके कैंप के संगीतकार और गायक अपने सुरों से आयोजन में जान डालते थे।
मुगल काल में भी खूब धूम रही है होली की : प्रोफेसर इरफान
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं कि जहांगीर ऐसे मुगल शासक थे, जिन्होंने बांस की पिचकारी का होली खेलने के लिए इस्तेमाल किया। पिचकारी का यह पैटर्न अभी भी चलन में है। इसमें बांस के अंदर वेक्यूम पैदा करता रंग भरा जाता है और फिर पीछे से दबाव डालकर रंग की फुहार आगे छोड़ी जाती है। इसके अलावा मुगल शासक शाह आलम भी हरम में और दरबारियों के साथ होली खेला करते थे। इसके चित्र भी उपलब्ध हैं।