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टप्पल में 300 करोड़ की सरकारी जमीन फर्जी तरीके से 1500 को आवंटित
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एनसीआर की सीमा से सटी टप्पल ग्राम पंचायत में करीब 300 करोड़ रुपये की 110 हेक्टेयर सरकारी जमीन को फर्जीवाड़ा कर 1500 लोगों में बांट दिया गया। यह फर्जीवाड़ा सन 2000 से 2002 के बीच में हुआ। शिकायत पर एसडीएम स्तर की जांच में इसका खुलासा हुआ है। जमीन आवंटन के संबंध में न तो आवंटियों के पास कोई पत्रावली है और न ही तहसील अभिलेखों में कोई रिकार्ड मिला है। जिला प्रशासन फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों सहित 1500 आवंटियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है। इस संबंध में सभी साक्ष्य तहसील स्तर से जुटाए जा रहे हैं।
टप्पल ग्राम पंचायत का 2627 हेक्टेयर का रकबा है, जिसमें से 647 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। पिछले दिनों कुछ लोगों ने अवैध कब्जे की शिकायत डीएम से की थी, उनका आरोप था कि 110 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है। डीएम ने खैर के एसडीएम अंजनी कुमार सिंह को जांच सौंपी। अंजनी कुमार ने जांच की तो 110 हेक्टेयर जमीन पर 1500 लोगों के नाम सामने आए। मगर, सरकारी अभिलेखों में इनका कोई रिकार्ड दर्ज नहीं था। लोगों से पूछताछ में मालूम हुआ कि उनको सन 2000 से 2002 के बीच यह जमीन आवंटित की गई थी।
आवंटन पत्रावलियों को खंगाला गया, उनमें भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में सामने आया कि सन 2000 से 2002 के बीच चकबंदी हुई थी, जिसमें बिना आवंटन व प्रमाण के ही करीब डेढ़ हजार लोगों के फर्जी नाम बढ़ा दिए गए। जांच में जमीन की कीमत आंकी गई, जिसमें यमुना एक्सप्रेसवे के सहारे व नोएडा से सटी ग्राम पंचायत होने के चलते इस जमीन की कीमत औसतन 20 लाख रुपये प्रति बीघा से अधिक के रेट के हिसाब से 300 करोड़ से अधिक आंकी गई है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस जमीन में से कुछ आवंटियों ने अपने हिस्से की जमीन अन्य लोगों को बेच दी है।
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110 हेक्टेयर जमीन पर फर्जी प्रविष्टि दर्ज कराने वाले सभी डेढ़ हजार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। तहसील कर्मियों व अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- अंजनी कुमार, खैर, एसडीएम
सरकारी अभिलेखों में जो जमीन सरकार की दर्ज है, उसे किस प्रकार से फर्जी तरीके से बांटा गया है। इसकी जांच की जा रही है। एक भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
- चंद्रभूषण सिंह, डीएम
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टप्पल ग्राम पंचायत का 2627 हेक्टेयर का रकबा है, जिसमें से 647 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। पिछले दिनों कुछ लोगों ने अवैध कब्जे की शिकायत डीएम से की थी, उनका आरोप था कि 110 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है। डीएम ने खैर के एसडीएम अंजनी कुमार सिंह को जांच सौंपी। अंजनी कुमार ने जांच की तो 110 हेक्टेयर जमीन पर 1500 लोगों के नाम सामने आए। मगर, सरकारी अभिलेखों में इनका कोई रिकार्ड दर्ज नहीं था। लोगों से पूछताछ में मालूम हुआ कि उनको सन 2000 से 2002 के बीच यह जमीन आवंटित की गई थी।
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आवंटन पत्रावलियों को खंगाला गया, उनमें भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में सामने आया कि सन 2000 से 2002 के बीच चकबंदी हुई थी, जिसमें बिना आवंटन व प्रमाण के ही करीब डेढ़ हजार लोगों के फर्जी नाम बढ़ा दिए गए। जांच में जमीन की कीमत आंकी गई, जिसमें यमुना एक्सप्रेसवे के सहारे व नोएडा से सटी ग्राम पंचायत होने के चलते इस जमीन की कीमत औसतन 20 लाख रुपये प्रति बीघा से अधिक के रेट के हिसाब से 300 करोड़ से अधिक आंकी गई है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस जमीन में से कुछ आवंटियों ने अपने हिस्से की जमीन अन्य लोगों को बेच दी है।
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110 हेक्टेयर जमीन पर फर्जी प्रविष्टि दर्ज कराने वाले सभी डेढ़ हजार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। तहसील कर्मियों व अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- अंजनी कुमार, खैर, एसडीएम
सरकारी अभिलेखों में जो जमीन सरकार की दर्ज है, उसे किस प्रकार से फर्जी तरीके से बांटा गया है। इसकी जांच की जा रही है। एक भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
- चंद्रभूषण सिंह, डीएम