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बाजार के जानकार बोले.. योगी जी न्यौते के साथ नीति भी बताएं
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उमेश श्रीवास्तव।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
इन दिनों सोशल मीडिया, घरेलू संवाद, नुक्कड़ की कहासुनी और बाजारी बहस में एक चर्चा बहुत जोर शोर से है। लॉकडाउन-3 खुलने के बाद अलीगढ़ सहित पूरे देश का बाजार कैसे रफ्तार पकड़ेगा..? उद्योगों के मोटर कब अपनी पूरी स्पीड से गरजेंगे.? क्या ऐसी विषम परिस्थिति में भारत चीन का विकल्प बन जाएगा..? क्या चीन से नाराज अमेरिका और अन्य देशों की बड़ी कंपनियां भारत की ओर मुड़ेंगी..? क्या यहां चीन की तर्ज पर सस्ते प्रोडक्शन हब और एसेंबली लाइन बन सकेंगी..? अब तो करोड़ों की तादाद में लेबर भी गांव लौट गई है तो शहरों में उत्पादन शीर्ष पर कैसे आएगा..?
इन सवालों पर जबरदस्त मंथन हो रहा है। ज्यादातर उद्यमी उद्योग लगाने और नुकसान की सूरत में तुरंत बंद करने के आवेदन की एकल खिड़की व्यवस्था को सौ फीसदी ऑनलाइन करने को कह रहे हैं। इसको जवाबदेह और सौ फीसदी समयबद्ध बनाने पर जोर दे रहे हैं। उद्योग नीति और बेहतर करने की वकालत कर रहे हैं। संबंधित उत्पाद के औद्योगिक लाइसेंस, जीएसटी, बिजली, पानी और सड़क को बेहतर और सस्ता करने की मांग भी है। जानकार कह रहे हैं कि प्रदेश की योगी सरकार इसका तुरंत फैसला करे, नहीं तो देखते ही देखते वक्त हाथ से निकल जाएगा और उसके बाद ड्रेगन के मुंह से कारोबार छीनना आसान नहीं होगा। इन लोगों ने कहा कि उद्योग की भाषा को एनआरआई बिजनेस मैन और उनकी कंपनियां अच्छी तरह से समझते हैं, अफसरशाही नहीं। इसलिए प्रदेश में एक समर्पित एनआरआई बिजनेस मैन समूह का गठन कर ये जिम्मेदारी उसको सौंपी जाए। अमर उजाला और बाजार के जानकारों से हुई बातचीत के कुछ अंश पेश हैं।
हमारी सरकार को पूरे देश में अब तक हुए शोध कार्यों का लेखाजोखा जुटाना चाहिए। जिसमें मेडिकल सहित अन्य सभी प्रमुख क्षेत्र शामिल होें। इसमें जो खोज वैश्विक स्तर पर एक बड़े व्यापार में बदल सकती है। उस पर सरकार सीधे आविष्कारकर्ता को साथ लेकर उत्पादन शुरू कराए। बड़े औद्योगिक घरानों को ऐसे प्रोजेक्ट प्रमोट करने की जिम्मेदारी सौंपे। इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। वैश्विक स्तर पर भारत नए उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाएगा।
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-डॉ. अशोक कुमार, हावर्ड यूनिवर्सिटी के गेस्ट फैकल्टी एवं शोधकर्ता
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल में भारतीय मूल के नागरिकों और विदेशी कंपनियों को यहां उद्योग लगाने का न्यौता दिया है, इस न्यौते के साथ एक दीर्घकालिक उद्योग नीति भी बतानी चाहिए। जिससे देशी विदेशी कंपनी सौ फीसदी आश्वस्त हों और तत्काल निवेश करें। अगर स्वदेश को समर्पित किसी एनआरआई समूह को उद्योगों को बढ़ावा देने, नए उद्योगों को लगाने की जिम्मेदारी सौंपी जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि हमारी अफसरशाही उद्योगों को कभी नहीं समझ सकती है। मैं खैर के गांव जरारा में एक बड़ा डेयरी प्लांट और गुरुकुल खोल कर ये बात महसूस कर चुका हूं।
-अभिनव गोस्वामी, एनआरआई एवं डेयरी व गुरुकुल संचालक खैर
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मेरा मानना है कि लॉकडाउन के बाद बाजार कुछ ही हफ्तों में पूरी रफ्तार पकड़ लेगा। इसमें बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगेगा क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है और जीडीपी में उसकी तीन फीसदी की भागीदारी है। इसलिए अगर औद्योगिक उत्पादन तीन से पांच फीसदी पहुंचा दिया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था शानदार हो जाएगी।
-पीके सक्सेना, वित्तीय जानकार एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता
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चीन से मुकाबला करने के लिए उत्पादन लागत कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। आज लेबर गांव में आ चुकी है, इसलिए ये मौका है ग्रामीण अंचलों में उत्पादन इकाइयां बढ़ाने का। इससे लेबर घर पर रह कर भी बेहतर रोजगार कर पाएंगे। शहरों में प्रदूषण कम होगा। लेबर का आवागमन कम होगा। औद्योगिक बिजली उत्तराखंड की तर्ज पर सस्ती हो और जीएसटी सहित अन्य कर कम हो।
-अनुराग गुप्ता, उद्योग व्यापार संगठन के मंडल महामंत्री
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ये वक्त स्वदेशी दवाओं और खाद्य उत्पादों को वैश्विक स्तर पर चमकाने का है। सरकार नीतियों को और बेहतर कर इसको तुरंत प्रोत्साहित करे, क्योंकि भारत पूरी दुनिया में अपने गुरुकुल, योग, आरोग्य पद्धति और पौष्टिक शाकाहारी खानपान के लिए मशहूर है। सरकार को इसकी ओर तेजी से सोचना चाहिए। ये एक बड़ी इंडस्ट्री है।
-उमेश श्रीवास्तव, महामंत्री अलीगढ़ रिटेल ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन
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स्टार्ट अप में नए आविष्कार और उपकरणों की प्राइमरी स्टेज पर घरेलू और वैश्विक सैंपलिंग कराने की ठोस नीति बने। ये इंटरनेट के माध्यम से संभव है। इसके बाद आर्डर मिलने पर उसकी बेहद सस्ती सप्लाई चेन बनाई जाए। इससे नये आविष्कारों प्रेरणा मिलेगी। ये दुखद है कि चार साल में अलीगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में एक भी स्टार्ट अप शुरू नहीं हुआ है। सरकार इसकी ओर गंभीरता से ध्यान दे।
-मदन मोहन शर्मा, आस्ट्रेलिया में अपना एक्सीडेंट रोधी उपकरण पेटेंट कराने वाले
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इन दिनों सोशल मीडिया, घरेलू संवाद, नुक्कड़ की कहासुनी और बाजारी बहस में एक चर्चा बहुत जोर शोर से है। लॉकडाउन-3 खुलने के बाद अलीगढ़ सहित पूरे देश का बाजार कैसे रफ्तार पकड़ेगा..? उद्योगों के मोटर कब अपनी पूरी स्पीड से गरजेंगे.? क्या ऐसी विषम परिस्थिति में भारत चीन का विकल्प बन जाएगा..? क्या चीन से नाराज अमेरिका और अन्य देशों की बड़ी कंपनियां भारत की ओर मुड़ेंगी..? क्या यहां चीन की तर्ज पर सस्ते प्रोडक्शन हब और एसेंबली लाइन बन सकेंगी..? अब तो करोड़ों की तादाद में लेबर भी गांव लौट गई है तो शहरों में उत्पादन शीर्ष पर कैसे आएगा..?
इन सवालों पर जबरदस्त मंथन हो रहा है। ज्यादातर उद्यमी उद्योग लगाने और नुकसान की सूरत में तुरंत बंद करने के आवेदन की एकल खिड़की व्यवस्था को सौ फीसदी ऑनलाइन करने को कह रहे हैं। इसको जवाबदेह और सौ फीसदी समयबद्ध बनाने पर जोर दे रहे हैं। उद्योग नीति और बेहतर करने की वकालत कर रहे हैं। संबंधित उत्पाद के औद्योगिक लाइसेंस, जीएसटी, बिजली, पानी और सड़क को बेहतर और सस्ता करने की मांग भी है। जानकार कह रहे हैं कि प्रदेश की योगी सरकार इसका तुरंत फैसला करे, नहीं तो देखते ही देखते वक्त हाथ से निकल जाएगा और उसके बाद ड्रेगन के मुंह से कारोबार छीनना आसान नहीं होगा। इन लोगों ने कहा कि उद्योग की भाषा को एनआरआई बिजनेस मैन और उनकी कंपनियां अच्छी तरह से समझते हैं, अफसरशाही नहीं। इसलिए प्रदेश में एक समर्पित एनआरआई बिजनेस मैन समूह का गठन कर ये जिम्मेदारी उसको सौंपी जाए। अमर उजाला और बाजार के जानकारों से हुई बातचीत के कुछ अंश पेश हैं।
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हमारी सरकार को पूरे देश में अब तक हुए शोध कार्यों का लेखाजोखा जुटाना चाहिए। जिसमें मेडिकल सहित अन्य सभी प्रमुख क्षेत्र शामिल होें। इसमें जो खोज वैश्विक स्तर पर एक बड़े व्यापार में बदल सकती है। उस पर सरकार सीधे आविष्कारकर्ता को साथ लेकर उत्पादन शुरू कराए। बड़े औद्योगिक घरानों को ऐसे प्रोजेक्ट प्रमोट करने की जिम्मेदारी सौंपे। इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। वैश्विक स्तर पर भारत नए उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाएगा।
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-डॉ. अशोक कुमार, हावर्ड यूनिवर्सिटी के गेस्ट फैकल्टी एवं शोधकर्ता
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल में भारतीय मूल के नागरिकों और विदेशी कंपनियों को यहां उद्योग लगाने का न्यौता दिया है, इस न्यौते के साथ एक दीर्घकालिक उद्योग नीति भी बतानी चाहिए। जिससे देशी विदेशी कंपनी सौ फीसदी आश्वस्त हों और तत्काल निवेश करें। अगर स्वदेश को समर्पित किसी एनआरआई समूह को उद्योगों को बढ़ावा देने, नए उद्योगों को लगाने की जिम्मेदारी सौंपी जाए तो बेहतर होगा, क्योंकि हमारी अफसरशाही उद्योगों को कभी नहीं समझ सकती है। मैं खैर के गांव जरारा में एक बड़ा डेयरी प्लांट और गुरुकुल खोल कर ये बात महसूस कर चुका हूं।
-अभिनव गोस्वामी, एनआरआई एवं डेयरी व गुरुकुल संचालक खैर
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मेरा मानना है कि लॉकडाउन के बाद बाजार कुछ ही हफ्तों में पूरी रफ्तार पकड़ लेगा। इसमें बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगेगा क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है और जीडीपी में उसकी तीन फीसदी की भागीदारी है। इसलिए अगर औद्योगिक उत्पादन तीन से पांच फीसदी पहुंचा दिया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था शानदार हो जाएगी।
-पीके सक्सेना, वित्तीय जानकार एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता
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चीन से मुकाबला करने के लिए उत्पादन लागत कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। आज लेबर गांव में आ चुकी है, इसलिए ये मौका है ग्रामीण अंचलों में उत्पादन इकाइयां बढ़ाने का। इससे लेबर घर पर रह कर भी बेहतर रोजगार कर पाएंगे। शहरों में प्रदूषण कम होगा। लेबर का आवागमन कम होगा। औद्योगिक बिजली उत्तराखंड की तर्ज पर सस्ती हो और जीएसटी सहित अन्य कर कम हो।
-अनुराग गुप्ता, उद्योग व्यापार संगठन के मंडल महामंत्री
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ये वक्त स्वदेशी दवाओं और खाद्य उत्पादों को वैश्विक स्तर पर चमकाने का है। सरकार नीतियों को और बेहतर कर इसको तुरंत प्रोत्साहित करे, क्योंकि भारत पूरी दुनिया में अपने गुरुकुल, योग, आरोग्य पद्धति और पौष्टिक शाकाहारी खानपान के लिए मशहूर है। सरकार को इसकी ओर तेजी से सोचना चाहिए। ये एक बड़ी इंडस्ट्री है।
-उमेश श्रीवास्तव, महामंत्री अलीगढ़ रिटेल ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन
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स्टार्ट अप में नए आविष्कार और उपकरणों की प्राइमरी स्टेज पर घरेलू और वैश्विक सैंपलिंग कराने की ठोस नीति बने। ये इंटरनेट के माध्यम से संभव है। इसके बाद आर्डर मिलने पर उसकी बेहद सस्ती सप्लाई चेन बनाई जाए। इससे नये आविष्कारों प्रेरणा मिलेगी। ये दुखद है कि चार साल में अलीगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में एक भी स्टार्ट अप शुरू नहीं हुआ है। सरकार इसकी ओर गंभीरता से ध्यान दे।
-मदन मोहन शर्मा, आस्ट्रेलिया में अपना एक्सीडेंट रोधी उपकरण पेटेंट कराने वाले

मदनमोहन शर्मा।- फोटो : CITY OFFICE

अनुराग गुप्ता।- फोटो : CITY OFFICE

डा. अशोक कुमार।- फोटो : CITY OFFICE

पीके सक्सैना।- फोटो : CITY OFFICE

अभिनव गोस्वामी।- फोटो : CITY OFFICE