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अलीगढ़ : ई-बसों का 25 हजार का गल्ला, अब बैंक ने झाड़ा पल्ला
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एटा रोड पर बिना सवारी के चल रही ई बस ।
- फोटो : CITY OFFICE
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महानगर वासियों को सुगम और सुरक्षित सफर मुहैया कराने के उद्देश्य से शहर के चार रूटों पर दौड़ रहीं 18 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 ई-बसों की परियोजना अप्रशिक्षित अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से परवान नहीं चढ़ पा रही है। वर्तमान में संचालित 12 ई-बस दिनभर में करीब 25 हजार रुपये का गल्ला इकट्ठा कर पा रही हैं। इसके बाद एक निजी बैंक में ये रकम जमा करने पहुंचे तो बैंक ने चिल्लर जमा करने से मना कर दिया है। अब किसी अन्य बैंक में अकाउंट खोलने की व्यवस्था की जा रही है।
शहर के चार रूटों पर अभी 12 ई-बस चल रही हैं। इस प्रकार प्रत्येक रूट पर तीन बसें चलती हैं। लेकिन स्टाफ अप्रशिक्षित होने के चलते इनसे उम्मीद के अनुसार कमाई नहीं हो पा रही है और 18 करोड़ की लागत वाली 12 ई-बसें दिनभर में करीब 25 हजार रुपये की कमाई कर पा रही हैं। चिल्लर और छोटे-छोटे नोट के रूप में 25 हजार रुपये निजी बैंक में जमा कराने के लिए पहुंचे तो इनको गिनने के लिए आधा से पौन घंटा लग गया। ऐसे में बैंक प्रबंधन ने ई-बस का अकाउंट किसी और बैंक में खुलवाने के लिए कह दिया है। अलीगढ़ डिपो के एआरएम वीके शुक्ला ने बताया कि दिनभर की आमदनी को जमा करने को लेकर निजी बैंक से बातचीत हुई। खुले और चिल्लर गिनने के चलते बैंककर्मी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसकी जानकारी कर्मचारियों ने दी है। इस हफ्ते में इसका समाधान हो जाएगा।
रिटायर्ड कर्मचारियों की नियुक्ति से संभालेंगे हालात
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मो. परवेज खान ने अप्रशिक्षित अधिकारी-कर्मचारियों के बीच ई-बस योजना फंसते देखी तो इसके उपाय पर भी काम किया। उन्होंने परिवहन निगम के रिटायर्ड अधिकारी कर्मचारी को नौकरी देने के लिए कहा है क्योंकि रिटायर्ड कर्मचारी जानते हैं कि रोडवेज बसों का संचालन कैसे किया जाता है। उनका अनुभव इन ई-बसों के संचालन में काफी लाभदायक सिद्ध होगा।
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संचालन के समय में किया फेरबदल
एक साथ तीन-तीन ई-बसों को एक साथ दौड़ाया जा रहा था। रूट पर विभिन्न स्टॉपेज पर कोई समय सारिणी नहीं है। एक साथ तीन बसों के संचालन से कोई अच्छी खासी आय नहीं हो रही थी। वहीं यह बस वापस लौटती तो एक साथ आती थीं। इसीलिए हस्तक्षेप कर बसों को एक साथ दौड़ाने की बजाए आधा घंटे के अंतराल पर अलग-अलग दौड़ाने की योजना बनाई है। एक रूट पर दोनों दिशाओं से बस चलेंगी। ताकि हर समय शहर के अंदर रूट पर दोनों दिशाओं की तरफ बस का संचालन हो सके। इस दौरान एक बस चार्जिंग स्टेशन में चार्ज होती रहेगी। पूरी समय सारिणी तैयार करवाई है। परिचालकों को सलाह दी है कि वह चौराहे पर आवाज लगाकर सवारियां बैठाएं। जिससे लोगों को बसों के बारे में जानकारी हो सके। -मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम।
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शहर के चार रूटों पर अभी 12 ई-बस चल रही हैं। इस प्रकार प्रत्येक रूट पर तीन बसें चलती हैं। लेकिन स्टाफ अप्रशिक्षित होने के चलते इनसे उम्मीद के अनुसार कमाई नहीं हो पा रही है और 18 करोड़ की लागत वाली 12 ई-बसें दिनभर में करीब 25 हजार रुपये की कमाई कर पा रही हैं। चिल्लर और छोटे-छोटे नोट के रूप में 25 हजार रुपये निजी बैंक में जमा कराने के लिए पहुंचे तो इनको गिनने के लिए आधा से पौन घंटा लग गया। ऐसे में बैंक प्रबंधन ने ई-बस का अकाउंट किसी और बैंक में खुलवाने के लिए कह दिया है। अलीगढ़ डिपो के एआरएम वीके शुक्ला ने बताया कि दिनभर की आमदनी को जमा करने को लेकर निजी बैंक से बातचीत हुई। खुले और चिल्लर गिनने के चलते बैंककर्मी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसकी जानकारी कर्मचारियों ने दी है। इस हफ्ते में इसका समाधान हो जाएगा।
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रिटायर्ड कर्मचारियों की नियुक्ति से संभालेंगे हालात
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मो. परवेज खान ने अप्रशिक्षित अधिकारी-कर्मचारियों के बीच ई-बस योजना फंसते देखी तो इसके उपाय पर भी काम किया। उन्होंने परिवहन निगम के रिटायर्ड अधिकारी कर्मचारी को नौकरी देने के लिए कहा है क्योंकि रिटायर्ड कर्मचारी जानते हैं कि रोडवेज बसों का संचालन कैसे किया जाता है। उनका अनुभव इन ई-बसों के संचालन में काफी लाभदायक सिद्ध होगा।
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संचालन के समय में किया फेरबदल
एक साथ तीन-तीन ई-बसों को एक साथ दौड़ाया जा रहा था। रूट पर विभिन्न स्टॉपेज पर कोई समय सारिणी नहीं है। एक साथ तीन बसों के संचालन से कोई अच्छी खासी आय नहीं हो रही थी। वहीं यह बस वापस लौटती तो एक साथ आती थीं। इसीलिए हस्तक्षेप कर बसों को एक साथ दौड़ाने की बजाए आधा घंटे के अंतराल पर अलग-अलग दौड़ाने की योजना बनाई है। एक रूट पर दोनों दिशाओं से बस चलेंगी। ताकि हर समय शहर के अंदर रूट पर दोनों दिशाओं की तरफ बस का संचालन हो सके। इस दौरान एक बस चार्जिंग स्टेशन में चार्ज होती रहेगी। पूरी समय सारिणी तैयार करवाई है। परिचालकों को सलाह दी है कि वह चौराहे पर आवाज लगाकर सवारियां बैठाएं। जिससे लोगों को बसों के बारे में जानकारी हो सके। -मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम।