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नगर निगम ने संपत्ति कर में की ढाई गुना वृद्धि, विरोध शुरु

Wed, 08 Jan 2020 02:30 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 02:30 AM IST
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Aligarh news
सम्पत्ति कर वृद्वि विरोधी संघर्ष मंच द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में जानकारी देते दिनेश शास्त्र? - फोटो : CITY OFFICE
नगर निगम द्वारा संपत्तिकर में भारी वृद्धि किए जाने से शहर के उद्यमियों, व्यापारियों सहित आम आदमी की नींद उड़ गई है। वाणिज्यिक भवनों के बिल ढाई गुना अधिक तक आए हैं। निगम के नोटिस के बाद उद्यमी, व्यापारी और आम जनता ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। साथ ही भाजपा के पार्षद भी विरोध जता रहे हैं। वर्ष 2020 तक का एडवांस टैक्स जमा कर चुके लोग 2017-18 से ब्याज के साथ बढ़े हुए टैक्स देने को तैयार नहीं है।
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नगर निगम द्वारा उत्तर प्रदेश नगर निगम संपत्ति कर नियमावली (द्वितीय संशोधन) 2013 के अंतर्गत पुनरीक्षित किए जा रहे संपत्ति कर को दिनांक 01-4-2017 से लागू किया गया है और वित्तीय वर्ष 2019-20 के संपत्ति कर के बिलों में गत दो वर्ष की अवशेष धनराशि दिखाकर बिल लोगों को भेजे जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में टैक्स आवासीय के बदले तीन गुना है। ऐसे में उद्यमी किसी भी कीमत पर नए संपत्ति कर को स्वीकारने को तैयार नहीं है। उद्यमी एवं व्यापारी आम आदमी को साथ लेकर इस लड़ाई को व्यापक स्तर पर लड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।
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ढाई गुना वृद्धि
भूपेंद्र वार्ष्णेय का कहना है कि समद रोड में उनका भवन वाणिज्यिक में आता है। पहले करीब 40 हजार सालाना संपत्तिकर के रूप में देना होता था। इस बार एक लाख का बिल आया है। संपत्तिकर मनमाने तरीके से करीब ढाई गुना बढ़ा दिया गया है।
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उत्तर प्रदेश नगर निगम (संपत्तिकर) (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2013 के अंतर्गत 1 अप्रैल 2017 से किया जा रहा पुनरीक्षण नियमानुसार है और इसमें परिवर्तन किया जाना नगर निगम हित में नहीं होगा। सरकार कोई निर्णय लेती है तो मान्य होगी।
- राज बहादुर सिंह, सहायक नगर आयुक्त
हम जनता के साथ अन्याय नहीं होने देंगे : बजाज
संपत्तिकर में बढ़ोतरी के विरोध में संपत्तिकर वृद्धि विरोध संघर्ष मंच का गठन कर लिया गया है। उद्योगपति विजय बजाज ने कहा कि हम जनता के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। कानून के दायरे में रहकर हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
मैरिस रोड स्थित एक होटल में संघर्ष मंच के संयोजक दिनेश शास्त्री एवं सह संयोजक एवं सभासद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी बोर्ड एवं कार्यकारिणी की समिति के निर्णय को न मानते हुए मनमाने ढंग से संपत्ति कर निर्धारण कर रहे हैं। बैक डेट में कर नहीं ले सकते। संयोजक दिनेश शास्त्री का कहना है कि शासनादेश सिर्फ अनावासीय के लिए थे। अब उसे आवासीय पर भी लागू कर दिया गया है। मंच नेताओं ने कहा कि नगर विधायक को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिए हैं। जरूरत पड़ी तो लखनऊ तक जाएंगे। न्यायालय जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस मौकेेे पर वीए पॉल, मुकेश सिंघल, मो. हामिद, पंकज गर्ग, तैमूर अली खान, गिरीश दीक्षित, जीतेंद्र शर्मा, विमल वार्ष्णेय, प्रमोद भारद्वाज, पवन कुमार आदि मौजूद थे।
संपत्तिकर में वृद्धि असंवैधानिक : भूपेंद
अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र वार्ष्णेय एवं मास्टर ओम प्रकाश ने कहा कि नगर निगम द्वारा संपत्तिकर में वृद्धि असंवैधानिक है। गृहकर कई गुना बढ़ाकर जनता एवं व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। नगर निगम अधिनियम 1959 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
पार्षद दिनेश गुप्ता एवं विजय तोमर ने कहा कि गृह कर के निर्धारण के नोटिस अब दिए जा रहे हैं जबकि गृहकर का निर्धारण अप्रैल 2017 से किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 209 के तहत नोटिस पर प्राप्त आपत्तियों का निपटारा होने की दिनांक से बढ़ोतरी लागू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नोटिस में गृहकर निर्धारण के मूल्यांकन की दर नहीं दर्शाई गई है। सीधे वार्षिक मूल्यांकन कई गुना बढ़ा कर दर्शाया गया है। नोटिस पर पुरानी एवं नई दर भी होनी चाहिए। व्यापारी नेताओं ने कहा कि संपत्तिकर के विरोध में धरना-प्रदर्शन से लेकर आंदोलन तक करेंगे। अधिवक्ता मुनेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि वह लोक अदालत में व्यापारियों एवं आम आदमी की संपत्तिकर से संबंधित मुकदमे नि: शुल्क लड़ेंगे। सुरेश चंद पेठेवाले आदि मौजूद थे।

सर्किल रेट पर निर्धारण
सर्किल रेट के आधार पर संपत्तिकर का निर्धारण किया गया है। औद्योगिक, व्यवसायिक एवं आवासीय आदि में भी कई अलग-अलग रेट हैं। सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि असेसमेंट कर संपत्ति कर का निर्धारण होता है। आदमी स्वयं भी असेसमेंट कर सकता है। अभी कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल आवासों को नोटिस दिया गया है। असेसमेंट होता जाएगा, वैसे ही नोटिस जारी किए जाते रहेंगे। कुछ कारपोरेट आफिसों से रिवाइज दर पर कर जमा होने लगा है।
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