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अलीगढ़ : नीम नदी का होगा जीर्णोद्धार, शुभारंभ आज
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जिले से बहने वाली नीम व काली नदी का मनरेगा योजना में जल्द उद्धार होगा। इसके लिए प्रशासन ने कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है। अभियान की शुरुआत शुक्रवार को गंगीरी ब्लॉक से हो रही है। यहां नीम नदी के जीर्णोद्धार के काम का शुभारंभ होगा।
सीडीओ अंकित खंडेलवाल, मनरेगा उपायुक्त भाल चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि नीम नदी बुलंदशहर से होकर आती है और जिले की अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से अलीगढ़ में प्रवेश करती है। यहां से कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए कासगंज में प्रवेश करती है।
अलीगढ़ में नदी की लंबाई करीब 40 किमी और चौड़ाई 50 से 100 मीटर तक थी, लेकिन समय के साथ इस पर लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया। 20 साल पहले तक नीम नदी से दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को लाभ मिलता था।
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अवैध कब्जों के चलते नीम नदी का अस्तित्व खत्म होता चला गया। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से प्रशासन मनरेगा के माध्यम से खोदाई का काम कराकर जीर्णोद्धार कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में इस बार नीम नदी के साथ ही काली नदी पर सबसे अधिक काम होगा। गंगीरी ब्लॉक में शुक्रवार को सीडीओ अपने स्टाफ व मनरेगा मजदूरों के साथ अभियान का शुभारंभ करेंगे।
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सीडीओ अंकित खंडेलवाल, मनरेगा उपायुक्त भाल चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि नीम नदी बुलंदशहर से होकर आती है और जिले की अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से अलीगढ़ में प्रवेश करती है। यहां से कनकपुर, पनेहरा, नगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली होते हुए कासगंज में प्रवेश करती है।
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अलीगढ़ में नदी की लंबाई करीब 40 किमी और चौड़ाई 50 से 100 मीटर तक थी, लेकिन समय के साथ इस पर लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया। 20 साल पहले तक नीम नदी से दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को लाभ मिलता था।
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अवैध कब्जों के चलते नीम नदी का अस्तित्व खत्म होता चला गया। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से प्रशासन मनरेगा के माध्यम से खोदाई का काम कराकर जीर्णोद्धार कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में इस बार नीम नदी के साथ ही काली नदी पर सबसे अधिक काम होगा। गंगीरी ब्लॉक में शुक्रवार को सीडीओ अपने स्टाफ व मनरेगा मजदूरों के साथ अभियान का शुभारंभ करेंगे।