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एएमयू शिक्षक ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने वाला आविष्कार किया
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक डॉ. मोहम्मद तारिक ने बिजली उत्पादन के लिए कोयले और तेल पर निर्भरता कम करने वाला आविष्कार किया है। इस आविष्कार को ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल के पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट किया गया है।
डॉ. मोहम्मद तारिक ने कहा कि स्थायी विकास के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है। प्रॉसुमर आधारित द्वीप, एसी माइक्रोग्रिड के पूरी तरह से पियर टू पियर नियंत्रण के लिए एक प्रणाली का प्रयोग किया जा सकता है। यह आविष्कार इस लक्ष्य को हासिल करेगा और बिजली उत्पादन के लिए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उपभोक्ता अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पन्न करना चाहते हैं, ताकि वितरण तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और जलवायु में सुधार हो। डॉक्टर मोहम्मद तारिक कहते हैं कि यह आविष्कार एक माइक्रोग्रिड की अवधारणा पर आधारित है जो सौर पीवी सिस्टम पवन टरबाइन और जनरेटर को जोड़ सकता है। यह पारंपरिक ग्रिड से स्वतंत्र रूप से संचालित होगा। डॉ. तारिक न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय कैनबरा के साथ दो विश्वविद्यालय सहयोगी अनुसंधान परियोजना की देखरेख कर रहे हैं।
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डॉ. मोहम्मद तारिक ने कहा कि स्थायी विकास के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है। प्रॉसुमर आधारित द्वीप, एसी माइक्रोग्रिड के पूरी तरह से पियर टू पियर नियंत्रण के लिए एक प्रणाली का प्रयोग किया जा सकता है। यह आविष्कार इस लक्ष्य को हासिल करेगा और बिजली उत्पादन के लिए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देगा।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में उपभोक्ता अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पन्न करना चाहते हैं, ताकि वितरण तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और जलवायु में सुधार हो। डॉक्टर मोहम्मद तारिक कहते हैं कि यह आविष्कार एक माइक्रोग्रिड की अवधारणा पर आधारित है जो सौर पीवी सिस्टम पवन टरबाइन और जनरेटर को जोड़ सकता है। यह पारंपरिक ग्रिड से स्वतंत्र रूप से संचालित होगा। डॉ. तारिक न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय कैनबरा के साथ दो विश्वविद्यालय सहयोगी अनुसंधान परियोजना की देखरेख कर रहे हैं।
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