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एएमयू में दूसरे चरण में खुली कक्षाओं का छात्रों ने किया बहिष्कार
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एएमयू में ब्लैक बैलून मार्च निकालती छात्राएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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शीतकालीन अवकाश के बाद सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दूसरे चरण में खुली कक्षाओं का छात्रों ने बहिष्कार कर दिया। साथ ही सीएए, एनआरसी, एनआरपी, जेएनयू हिंसा और 15 दिसंबर को एएमयू में हुए छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया। इंजीनियरिंग व अन्य फैकल्टी के छात्रों ने तिरंगा यात्रा व ब्लैक कोर्ट मार्च निकाला। इस दौरान कुलपति और रजिस्ट्रार के विरोध में नारेबाजी करते हुए इस्तीफे की मांग की गई। साथ ही भाजपा, मोदी, योगी, शाह आदि से आजादी के नारे लगाए गए।
20 जनवरी सोमवार को दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के विधि संकाय, कॉमर्स, विज्ञान, जीव विज्ञान तथा कृषि विज्ञान की कक्षाएं शुरू होनी थीं। लेकिन छात्रों ने पहले से ही कक्षाओं के बायकाट की घोषणा कर दी। सोमवार सुबह विधि छात्रों के साथ इंजीनियरिंग व अन्य फैकल्टी के छात्रों ने पुरानी चुंगी से लेकर बाब ए सैयद तक तिरंगा यात्रा और ब्लैक कोट मार्च निकाला। बाब-ए-सैयद पर एएमयू कोर्ट के सदस्य और छात्र नेता शफीकउर रहमान खान ने कहा कि काले कानून के खिलाफ यह मार्च निकाला गया है। मौजूदा सरकार हिंदुस्तान को बर्बाद कर देना चाहती है। जिस तरह हिंदुस्तान में माहौल बन रहा है, वह हिंदुस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा है। मौजूदा सरकार एक बार फिर लोगों को लाइन में खड़ा कर देना चाहती है। हमारी सरकार से मांग है कि इस काले कानून में बदलाव हो और इसमें मुसलमानों को भी शामिल किया जाए।
छात्र नेता मो. नईम अली ने कहा कि तिरंगा यात्रा से यह संदेश दिया है कि हम तिरंगे को ही मानेंगे, आपके काले कानून को नहीं मानेंगे। हमारी अर्थव्यवस्था खराब दौर से गुजर रही है। सरकार इस पर बात नहीं कर रही है। अन्य मुद्दे हैं, जिनसे नागरिक जीवन स्तर बेहतर होता है, लेकिन सरकार उन पर बात नहीं कर रही है। छात्रा अंजुम ने कहा कि हमारी लड़ाई फर्जी डिग्री वालों से है। अहिंसा के रास्ते पर चलकर हम अपनी लड़ाई जीत लेंगे।
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वीमेंस कॉलेज की भी छात्राओं ने निकाला मार्च
अलीगढ़। एएमयू वीमेंस कॉलेज में छात्राओं ने कॉलेज परिसर में ही ब्लैक मार्च निकाला और कक्षाओं का बहिष्कार किया। इस दौरान कॉलेज प्रशासन ने भी छात्राओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन छात्राओं का प्रदर्शन जारी रहा। छात्राएं सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध और कुलपति व रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग संबंधी पोस्टर बैनर हाथों में लिए हुई थीं।
छात्रा सदफ शकील ने कहा कि हमारा कॉलेज आज ही सोमवार को ही खुला है और इसके साथ ही हमने कक्षाओं का बायकाट कर दिया है। हम आज स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति में विश्वविद्यालय प्र्रशासन को हमारे साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन वह हमारे साथ नहीं है। 15 दिसंबर को पुलिस ने छात्रों पर हमला किया। पुलिस को इसकी इजाजत दी गई। हमें जब तक इंसाफ नहीं मिलता है, तब तक क्लास नहीं करेंगी। महिलाएं किसी भी आंदोलन में कभी भी पीछे नहीं रही हैं। वीमेंस कॉलेज भी इस आंदोलन में सबसे आगे रहेगा। छात्रा फिदा ने कहा कि छात्रों पर जो हमले हुए हैं इसके विरोध में यह बहिष्कार किया गया है। छात्रों पर हमले के वक्त वीसी और रजिस्ट्रार हमारे साथ नहीं खड़े हुए।
इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन कॉलेज प्रशासन को सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि हम सभी छात्राएं 15 दिसंबर को छात्रों पर हुए पुलिस के बर्बर हमले की निंदा करती हैं। छात्रों को कैंपस छोड़ने पर मजबूर किया गया। वीमेंस कालेज की छात्राएं बाब ए सैयद पर चल रहे धरने को पूरा समर्थन करती हैं। साथ ही ज्ञापन में तीन मांगे भी की गई हैं।
ये हैं छात्राओं की तीन मांगें -
1- कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर इस्तीफा दें
2- एएमयू छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस हों
3-सीएए, एनआरसी के खिलाफ वीमेंस कालेज में चल रहे आंदोलन का समर्थन किया जाए
शाम को निकाला ब्लैक बैलून मार्च
असिस्टेंट प्रॉक्टर से हुई नोकझोंक
धरना स्थल से जाने के लिए कह रहे थे छात्र, इसी बात पर हुआ विवाद
कक्षाओं के बहिष्कार, ब्लैक कोट मार्च व तिरंगा यात्रा के बाद एएमयू में शाम को ब्लैक बैलून मार्च निकाला गया। मार्च की समाप्ति के बाद छात्रों ने बाब ए सैयद पर संवाद भी किया। इसी बीच एक असिस्टेंट प्रॉक्टर वहां पर आ गए। उन्हें देखकर एक छात्र ने उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा। इसी बात पर विवाद बढ़ गया। मौके पर नोकझोंक शुरू हो गई। काफी देर तक यह विवाद चलता रहा। बाद में कुछ वरिष्ठ छात्रों ने मामले में हस्तक्षेप किया, इसके बाद मामला शांत हुआ। इस घटना की पृष्ठभूमि में जब जानकारी की गई तो पता चला कि कुछ दिन पहले कुछ छात्र प्राक्टर आफिस पहुंचे थे। वहां पर एक अधिकारी ने छात्रों से कह दिया कि हू आर यू (तुम कौन हो)। यह बात छात्रों को अखर गई थी। इसी की प्रतिक्रिया सोमवार को बाब ए सैयद पर हो गई। घटना के बाद जब असिस्टेंट प्राक्टर ने छात्र से सारी बोलने के लिए कहा तो छात्र ने कहा कि उस दिन आपने सारी बोला था?
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20 जनवरी सोमवार को दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के विधि संकाय, कॉमर्स, विज्ञान, जीव विज्ञान तथा कृषि विज्ञान की कक्षाएं शुरू होनी थीं। लेकिन छात्रों ने पहले से ही कक्षाओं के बायकाट की घोषणा कर दी। सोमवार सुबह विधि छात्रों के साथ इंजीनियरिंग व अन्य फैकल्टी के छात्रों ने पुरानी चुंगी से लेकर बाब ए सैयद तक तिरंगा यात्रा और ब्लैक कोट मार्च निकाला। बाब-ए-सैयद पर एएमयू कोर्ट के सदस्य और छात्र नेता शफीकउर रहमान खान ने कहा कि काले कानून के खिलाफ यह मार्च निकाला गया है। मौजूदा सरकार हिंदुस्तान को बर्बाद कर देना चाहती है। जिस तरह हिंदुस्तान में माहौल बन रहा है, वह हिंदुस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा है। मौजूदा सरकार एक बार फिर लोगों को लाइन में खड़ा कर देना चाहती है। हमारी सरकार से मांग है कि इस काले कानून में बदलाव हो और इसमें मुसलमानों को भी शामिल किया जाए।
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छात्र नेता मो. नईम अली ने कहा कि तिरंगा यात्रा से यह संदेश दिया है कि हम तिरंगे को ही मानेंगे, आपके काले कानून को नहीं मानेंगे। हमारी अर्थव्यवस्था खराब दौर से गुजर रही है। सरकार इस पर बात नहीं कर रही है। अन्य मुद्दे हैं, जिनसे नागरिक जीवन स्तर बेहतर होता है, लेकिन सरकार उन पर बात नहीं कर रही है। छात्रा अंजुम ने कहा कि हमारी लड़ाई फर्जी डिग्री वालों से है। अहिंसा के रास्ते पर चलकर हम अपनी लड़ाई जीत लेंगे।
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वीमेंस कॉलेज की भी छात्राओं ने निकाला मार्च
अलीगढ़। एएमयू वीमेंस कॉलेज में छात्राओं ने कॉलेज परिसर में ही ब्लैक मार्च निकाला और कक्षाओं का बहिष्कार किया। इस दौरान कॉलेज प्रशासन ने भी छात्राओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन छात्राओं का प्रदर्शन जारी रहा। छात्राएं सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध और कुलपति व रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग संबंधी पोस्टर बैनर हाथों में लिए हुई थीं।
छात्रा सदफ शकील ने कहा कि हमारा कॉलेज आज ही सोमवार को ही खुला है और इसके साथ ही हमने कक्षाओं का बायकाट कर दिया है। हम आज स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति में विश्वविद्यालय प्र्रशासन को हमारे साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन वह हमारे साथ नहीं है। 15 दिसंबर को पुलिस ने छात्रों पर हमला किया। पुलिस को इसकी इजाजत दी गई। हमें जब तक इंसाफ नहीं मिलता है, तब तक क्लास नहीं करेंगी। महिलाएं किसी भी आंदोलन में कभी भी पीछे नहीं रही हैं। वीमेंस कॉलेज भी इस आंदोलन में सबसे आगे रहेगा। छात्रा फिदा ने कहा कि छात्रों पर जो हमले हुए हैं इसके विरोध में यह बहिष्कार किया गया है। छात्रों पर हमले के वक्त वीसी और रजिस्ट्रार हमारे साथ नहीं खड़े हुए।
इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन कॉलेज प्रशासन को सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि हम सभी छात्राएं 15 दिसंबर को छात्रों पर हुए पुलिस के बर्बर हमले की निंदा करती हैं। छात्रों को कैंपस छोड़ने पर मजबूर किया गया। वीमेंस कालेज की छात्राएं बाब ए सैयद पर चल रहे धरने को पूरा समर्थन करती हैं। साथ ही ज्ञापन में तीन मांगे भी की गई हैं।
ये हैं छात्राओं की तीन मांगें -
1- कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर इस्तीफा दें
2- एएमयू छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस हों
3-सीएए, एनआरसी के खिलाफ वीमेंस कालेज में चल रहे आंदोलन का समर्थन किया जाए
शाम को निकाला ब्लैक बैलून मार्च
असिस्टेंट प्रॉक्टर से हुई नोकझोंक
धरना स्थल से जाने के लिए कह रहे थे छात्र, इसी बात पर हुआ विवाद
कक्षाओं के बहिष्कार, ब्लैक कोट मार्च व तिरंगा यात्रा के बाद एएमयू में शाम को ब्लैक बैलून मार्च निकाला गया। मार्च की समाप्ति के बाद छात्रों ने बाब ए सैयद पर संवाद भी किया। इसी बीच एक असिस्टेंट प्रॉक्टर वहां पर आ गए। उन्हें देखकर एक छात्र ने उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा। इसी बात पर विवाद बढ़ गया। मौके पर नोकझोंक शुरू हो गई। काफी देर तक यह विवाद चलता रहा। बाद में कुछ वरिष्ठ छात्रों ने मामले में हस्तक्षेप किया, इसके बाद मामला शांत हुआ। इस घटना की पृष्ठभूमि में जब जानकारी की गई तो पता चला कि कुछ दिन पहले कुछ छात्र प्राक्टर आफिस पहुंचे थे। वहां पर एक अधिकारी ने छात्रों से कह दिया कि हू आर यू (तुम कौन हो)। यह बात छात्रों को अखर गई थी। इसी की प्रतिक्रिया सोमवार को बाब ए सैयद पर हो गई। घटना के बाद जब असिस्टेंट प्राक्टर ने छात्र से सारी बोलने के लिए कहा तो छात्र ने कहा कि उस दिन आपने सारी बोला था?

सीएए, एनआरसी व एनपीआर के विरोध में अब्दुल्ला कॉलेज में ब्लैक मार्च निकालतीं छात्राएं। - फोटो : CITY OFFICE