अलीगढ़: एएमयू में बवाल के दौरान आग में जले आजम के ‘कारनामे’
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इसलिए इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इसे डॉ. निशित ने एचआरडी को पत्र लिखकर एएमयू की साजिश करार दिया है और कहा है कि इस तरह का जवाब देकर एएमयू इंतजामिया पूर्व के घटनाक्रमों पर पर्दा डालना चाहती है। ऐसे में एएमयू की सुरक्षा किसी केंद्रीय या राज्य स्तरीय एजेंसी को सौंपा जाना ही उचित रहेगा>
रामपुर से समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान को लेकर पिछले माह यह मुद्दा सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहा था कि जब वह एएमयू छात्र थे तो उस समय उन पर एएमयू द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। कुछ लोगों ने उस कार्रवाई संबंधी पत्र सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए थे। उस समय इस एएमयू प्रवक्ता ने यही जवाब दिया था उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। वह तो पत्रों की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
इसे लेकर भाजपा के जिला प्रवक्ता व एएमयू के डेंटल कॉलेज से बीडीएस छात्र रहे डॉ. निशित शर्मा ने 13 अगस्त को एएमयू के मुख्य सूचना अधिकारी को आरटीआई भेजी। इसमें पांच सवालों का उल्लेख करते हुए आजम खान को लेकर पूछा गया था कि आजम खां ने कब यहां दाखिला लिया, कब तक छात्र रहे, एएमयू छात्रसंघ में वे कब किन पदों पर रहे।
साथ ही एएमयू द्वारा उनके खिलाफ कब, किस सन में, किस आरोप में अनुशासनात्मक/निष्कासन की कार्रवाई की गई, जब कार्रवाई की गई तो वे छात्रसंघ में थे तो किस पद पर थे। इसके अलावा एएमयू में पढ़ाई के दौरान उन पर क्या आपराधिक मुकदमे या कार्रवाई हुईं, उनका क्या रिकार्ड है। इस आरटीआई को एएमयू के सूचना अधिकारी ने प्रॉक्टर कार्यालय को फारवर्ड किया। जिसके जवाब में चौथे व पांचवें सवाल का जवाब 24 सितंबर को निशित को मिला है।
उसमें लिखा है कि एएमयू में 23/24 अप्रैल 2016 की रात हुए बवाल के दौरान प्रॉक्टर कार्यालय में आग लगा दी गई थी। इसके चलते सभी दस्तावेज जलकर राख हो गए। इस वजह से कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। इसके अलावा पहले तीन सवालों का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।
यह उत्तर बेहद ही निंदनीय है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में एएमयू का प्रशासन आपराधिक गतिविधियों को व पूर्व में हुए भयानक घटनाक्रमों पर पर्दा डालना चाह रहा है। इससे पहले एएमयू कैंपस में कई हत्या, कुलपति आवास में आगजनी हो चुकी है। अनेक बार छात्र गुटों में टकराव हुआ और फायरिंग जैसी घटनाएं होती रही हैं, जिसमें ज्यादातर 2016 या उससे पहले की भी हैं। ऐसे में इस प्रकार के उत्तर भेजना एएमयू प्रशासन व प्रॉक्टर व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है। अपराधियों को संरक्षण देने की इनकी मानसिकता को उजागर करता है। इस विषय में एचआरडी को पत्र लिखा गया है। विस्तार से पूरी स्थिति को अवगत कराया गया है और मांग की है कि एएमयू की सुरक्षा किसी केंद्रीय या राज्य स्तरीय एजेंसी को सौंपी जाए।
- डॉ. निशित शर्मा, भाजपा जिला प्रवक्ता
ऐसे लगी थी आग
23/24 अप्रैल 2016 की रात दो छात्र गुटों में प्रॉक्टर कार्यालय पर फायरिंग में दो पूर्व छात्रों की जान चली गई थी। उसके बाद हुए बवाल में कैंपस में प्रॉक्टर कार्यालय, डीएसडब्ल्यू कार्यालय सहित कई जगह आगजनी की गई थी। बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज व फायरिंग कर हालात को काबू किया था।
यह सही है कि पूर्व में प्रोक्टर ऑफिस में हुई आगजनी में काफी रिकार्ड जल चुका है। हो सकता है कि आजम खां से संबंधित रिकार्ड भी जल गया हो।
- प्रो. शाफे किदवई, एएमयू प्रवक्ता