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141 साल का सफर... घोड़ों की प्रदर्शनी से लेकर अलीगढ़ महोत्सव

Thu, 04 Feb 2021 12:53 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 12:53 AM IST
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Aligarh Mahotsva
अलीगढ़ महोत्सव। - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
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पांच फरवरी से शुरू होने वाली राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (नुमाइश) के 141 साल पूरे हो रहे हैं। इतने लंबे सफर में अलीगढ़ प्रदर्शनी ने साल दर साल विकास और आधुनिकता के नए सोपान गढ़े हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, सन 1804 में अलीगढ़ के जिला बनने के बाद से ही यहां पर नगरीय जीवन की शुरुआत हो गई थी। इसके बाद लंबे समय तक कोई ऐसी गतिविधि नहीं हुई, जिसका उल्लेख इतिहास में मिलता हो।
सन 1857 के गदर के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ से शासन की कमान ब्रिटिश पार्लियामेंट ने ले ली थी, इसके बाद अलीगढ़ में गतिविधियां तेज हुईं। जिस स्थान पर आज नुमाइश लगती है, वहां पर घोड़ों की प्रदर्शनी लगने का जिक्र मिलता है। यह जगह घोड़ों की प्रदर्शनी के लिए मुफीद थी, क्योंकि अलीगढ़ चारों ओर से प्रिंसली स्टेट से घिरा हुआ था। 1880 में राजा हरि नारायण सिंह ने तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को यह सुझाव दिया था कि वह घोड़ों की प्रदर्शनी को अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट फेयर के रूप में तब्दील कर दें। माना जाता है कि आधुनिक नुमाइश की बुनियाद तभी से पड़ी। वर्तमान में इस नुमाइश को अलीगढ़ महोत्सव के नाम से जाना जाता है।
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नुमाइश के सफर में कुछ अहम मुकाम
- 1880 में राजा हरि नारायण सिंह के सुझाव पर घोड़ों की प्रदर्शनी अलीगढ़ नुमाइश के रूप में तब्दील हुई और यहां पर खानपान, मनोरंजन, नौटंकी आदि के खेमे लगने शुरू हुए।
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- 1929 में राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी द्वारा अपने समर्थकों के साथ नुमाइश मैदान में 12 दिन तक प्रवास किए जाने से यह मैदान चर्चा में आया।
- 1952 में तत्कालीन जिलाधिकारी केसी मित्तल द्वारा विचार किया गया कि क्यों न इस उत्सव को कृषि और औद्योगिक विकास की प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत किया जाए, जो उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी सपना था। देश का औद्योगिक विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में था।
- 1984 तक अलीगढ़ नुमाइश में आधुनिकता का रंग आ चुका था और इसकी ख्याति देश में फैल रही थी। आयोजनों की संख्या बढ़ रही थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन एडीएम सिटी बाबा हरदेव सिंह ने कृष्णांजलि सभागार का निर्माण कराया।

- 2000 तक नुमाइश में एक से बढ़कर एक हस्तियां और कलाकार आने लगे थे। इनके ठहरने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी देवदत्त ने गेस्ट हाउस का निर्माण कराया था। जिसमें नुमाइश का कार्यालय संचालित होता है।
- 2011 में अलीगढ़ नुमाइश में पहली बार तत्कालीन कैबिनेट मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की पहल पर ऑटो एक्सपो का आयोजन किया गया, जो बेहद सफल रहा।
- 2013 में नुमाइश में बढ़ते कार्यक्रमों व दर्शकों की संख्या को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने कोहिनूर मंच का निर्माण कराया।
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