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अलीगढ़ जंक्शनः हर पांचवें दिन जाती है एक जान... नहीं ले रहे सबक
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रेलवे ट्रैक पार करते लोग।
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ रेलवे जंक्शन से लेकर पूरे अलीगढ़ सेक्शन में वर्ष 2018 से अब तक 270 लोगों को ट्रेनों की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। औसतन हर पांचवें दिन एक व्यक्ति की मौत रेल पटरियों पर हो रही है। जल्दबाजी के चक्कर में लोग रेल पटरियों को पार करने से गुरेज नहीं करते हैं। लोगों को रेल पटरी पार करने से रोकने और मौतों पर अंकुश लगाने के लिए आरपीएफ की ओर से रेल पटरियों के बीच तारों की फेंसिंग कराने का प्लान प्रयागराज मुख्यालय के अधिकारियों को भेजा था। ढाई साल पहले भेजे गए इस प्रस्ताव पर आज तक कोई काम नहीं हो सका है। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों में रेल पटरियों के किनारे बाउंड्रीवाल का काम भी अभी तक सेक्शन में पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है।
रेलवे जंक्शन पर सात प्लेटफार्म हैं। एक नंबर प्लेटफार्म क्रियाशील नहीं है। दो नंबर मुख्य प्लेटफार्म है। दो से पांच नंबर प्लेटफार्म ट्रेनों के आवागमन से व्यस्त रहता है। नॉन स्टॉप ट्रेनों को अप में 100 और डाउन में 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा जाता है। फिलहाल दो से लेकर सात नंबर प्लेटफार्म तक एक ही ओवर ब्रिज हावड़ा छोर पर बना हुआ है। दिल्ली छोर वाले ओवर ब्रिज दो से तीन/चार प्लेटफार्म तक है। ओवर ब्रिज पर भीड़ होने और सीढ़ियों पर चढ़ने से बचने के लिए लोग अकसर पटरियों को पार करते हैं। इस दौरान कई बार ट्रेनों की चपेट में आने से यात्रियों की मौत हो चुकी है। इसको रोकने के लिए आरपीएफ ने ढाई साल पहले पटरियों के बीच में तारों की फेंसिंग करने का प्रस्ताव रेल अधिकारियों को भेजा था। मगर, इस पर कोई अमल नहीं हुआ है।
वर्ष मौत
2018 79
2019 86
2020 56
2021 49 (अब तक)
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रेलवे जंक्शन पर सात प्लेटफार्म हैं। एक नंबर प्लेटफार्म क्रियाशील नहीं है। दो नंबर मुख्य प्लेटफार्म है। दो से पांच नंबर प्लेटफार्म ट्रेनों के आवागमन से व्यस्त रहता है। नॉन स्टॉप ट्रेनों को अप में 100 और डाउन में 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा जाता है। फिलहाल दो से लेकर सात नंबर प्लेटफार्म तक एक ही ओवर ब्रिज हावड़ा छोर पर बना हुआ है। दिल्ली छोर वाले ओवर ब्रिज दो से तीन/चार प्लेटफार्म तक है। ओवर ब्रिज पर भीड़ होने और सीढ़ियों पर चढ़ने से बचने के लिए लोग अकसर पटरियों को पार करते हैं। इस दौरान कई बार ट्रेनों की चपेट में आने से यात्रियों की मौत हो चुकी है। इसको रोकने के लिए आरपीएफ ने ढाई साल पहले पटरियों के बीच में तारों की फेंसिंग करने का प्रस्ताव रेल अधिकारियों को भेजा था। मगर, इस पर कोई अमल नहीं हुआ है।
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वर्ष मौत
2018 79
2019 86
2020 56
2021 49 (अब तक)