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अलीगढ़ : रोड शो-रैलियों की भीड़ को वोट में बदल न पाए जयंत, माया व प्रियंका

Sun, 13 Mar 2022 12:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 12:06 AM IST
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Aligarh: Jayant, Maya and Priyanka could not convert the crowd of roadshow-rallies into votes
विधानसभा चुनाव के रण में सभी दलों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया। सत्ताधारी भाजपा ने वापसी के लिए मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी और विपक्षी दलों ने भी भाजपा को सत्ता से हटाने के प्रयास में कमी नहीं की। मगर ध्रुवीकरण के दम पर हुए मतदान ने सभी विपक्षियों की मेहनत पर ऐसा ब्रेक लगाया कि जिले में भाजपा ने सबका सूपड़ा साफ करते हुए शानदार वापसी की।
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सिर्फ सपा जिले की कोल, शहर, अतरौली व छर्रा सीटों मुस्लिम वोट लेने में कामयाब रही है। जिले में कोविड के चले बड़ी रैलियों की तो मनाही थी। मगर छोटी रैलियां, रोड शो और जनसंपर्क की छूट थी। इन्हीं पाबंदियों के बीच जिले में रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने टप्पल, गोंडा, बरका में पहले दौर में और फिर दूसरे दौर में टप्पल में सभाएं कीं।
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इस दौरान उन्होंने जाटों को रिझाने के लिए भाजपा को खूब कोसा और भाजपा की कमियां गिनाते हुए रालोद-सपा गठबंधन को वोट की अपील की। खैर व बरौली में रालोद तीसरे पर और इगलास में दूसरे स्थान पर रही है। इसी तरह कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने इगलास, शहर, कोल व बरौली में रोड शो कर लोगों को कांग्रेस के पक्ष में रिझाने का प्रयास किया।
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शहर व कोल के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने एकबार तो सपा व भाजपा के दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दीं। मगर परिणाम इतने विपरीत आए कि जिले की किसी भी सीट पर कांग्रेस दावेदार अपनी जमानत भी न बचा पाए। कमोबेश यही हाल बसपा के रहे। नुमाइश मैदान की मायावती की रैली में भीड़ ने बताया कि बेस वोट ज्यों का त्यों है। इसका परिणाम सिर्फ खैर व बरौली में दिखाई दिया कि दोनों सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही। बाकी पांच सीटों पर बसपा पिछले परिणाम भी न दोहरा पाई है।
सपा की बात करें तो अखिलेश की एक सभा क्वार्सी में हुई। जिसमें सातों सीटों के लिए वोट की अपील की गई। इसका असर सिर्फ मुस्लिम वोटों पर दिखाई दिया। शहर, कोल, अतरौली व छर्रा सीट पर सपा के दावेदारों को मुस्लिम मत सर्वाधिक संख्या में मिले हैं। मतलब अखिलेश की अपील पर उन्होंने एकजुट होकर वोट दिया है।
ये प्रदेश भर में बही ध्रुवीकरण की हवा का भी असर है। इधर, अब अगर भाजपा की बात करें तो खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रैली की। गृह मंत्री अमित शाह अतरौली में सभा करने आए। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा बरौली व अतरौली के ब्राह्मणों से अपील करके गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अतरौली, छर्रा, कोल-शहर, इगलास में आए। पीयूष गोयल ने कोल में व्यापारी संवाद किया। इसका परिणाम रहा कि शहर-कोल में कांटे की टक्कर से जीत तो बाकी सीटों पर बहुत अंतर की जीत बहुत अधिक रहा।
कोल में सपा को हिंदू इलाकों के बूथों पर भी मिला बेहतर वोट
जिले में सपा की कोल सीट पर हुई मतगणना के परिणाम बताते हैं कि हिंदू इलाकों के बूथों पर भी सपा को वोट मिला है। इसी का परिणाम रहा कि जब तक मुस्लिम क्षेत्र के बूथों की गणना चली, तब तक सपा 60 हजार की बढ़त बनाए रही।
जब हिंदू इलाकों के बूथों की गणना शुरू हुई तो भी सपा बढ़ती चली गई और एक लाख के आंकड़े को छू गई। वह तो कोल के खांटी भाजपाई विष्णुपुरी, सुरेंद्र नगर, सुदामापुरी, चंदनिया, बेगमबाग इलाके में आकर हुई गिनती में सपा को पटखनी मिली है।
अन्यथा देहात के मडराक व उसके आसपास के क्षेत्र में सपा को अच्छा मत मिला है। अब लोग इसके मायने निकाल रहे हैं। ये सब कहीं विरोध के स्वर तो नहीं या फिर टिकट वितरण से पहले सपा नेताओं द्वारा की गई मेहनत का परिणाम तो नहीं। बता दें कि एक तरफ जहां सपा नेता सलमान शाहिद ने कोरोना काल में जमकर हिंदू व मुस्लिम इलाकों में भागदौड़ की। लोगों में राशन आदि का वितरण किया।

इसी तरह अज्जू इशहाक द्वारा मडराक क्षेत्र में भाजपा विरोधी खेमे में गहरी पैठ बनाई गई। यहां संघ से जुड़े लोगों ने सपा की सदस्यता ली। इतना ही नहीं एक धार्मिक आयोजन में अज्जू ने शामिल होकर भाजपा की चिंता बढ़ा दी थी। ये परिणाम उसी वजह से माने जा रहे हैं।
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