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अलीगढ़ : 2014 के बाद से भारत ने साहसी कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया : अकबरुद्दीन

Sun, 17 Jul 2022 12:22 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jul 2022 12:22 AM IST
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Aligarh: India has adopted a bold diplomatic approach since 2014: Akbaruddin
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आयोजित सैयद मेमोरियल लेक्चर में विचार व्यक्त करते पूर्व राजनयि? - फोटो : CITY OFFICE
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि व पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से आकार देने के लिए अधिक उत्सुक लगता है, जबकि भारत ने कूटनीति की अपनी पारंपरिक शैली को त्याग दिया है। भारत ने 2014 के बाद से अधिक गतिशील, सक्रिय, साहसी और जोखिम लेने वाला कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। पड़ोेसी सहित विभिन्न देशों के साथ संबंध विकसित किए हैं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
वह शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की सर सैयद अकादमी द्वारा आयोजित वार्षिक सर सैयद मेमोरियल लेक्चर-2022 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बदली हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था, साइबर स्पेस, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे, ऊर्जा की जरूरतें और मुद्रास्फीति के कारण विदेश नीति अब शुद्ध विदेशी नहीं रह गई है और कई स्थानीय मुद्दे भी कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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भविष्य में चीन से बढ़ सकते हैं मतभेद
अकबरुद्दीन ने कहा कि हम एक वैश्विक उथल-पुथल देख रहे हैं, जो हाल के दिनों में कभी नहीं देखा गया है, अमेरिका का एक ध्रुवीय प्रभुत्व समाप्त हो गया है। चीन हरित प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है। चीन के बाजार में अपर्याप्त पहुंच, सीमा पर झड़प और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बेल्ट एंड रोड से पता चलता है कि भविष्य में भारत और चीन के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं।
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‘बड़ा सोचो, साहसिक कार्य करो और जोखिम लो’ की है नीति
उन्होंने कहा कि अब हमारी नीति ‘बड़ा सोचो, साहसिक कार्य करो और जोखिम लो’ पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार बार यूएई का दौरा किया है, पिछले 30 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा नहीं किया। संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ विदेश व्यापार समझौते और यूरोपीय संघ के देशों, ब्रिटेन आदि के साथ साझेदारी ने दुनिया के अग्रणी देशों के साथ हमारे राजनयिक और आर्थिक संबंधों को आकार देने में मदद की है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से भारत की सॉफ्ट पावर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। यह निश्चित रूप से एक मजबूत विदेश नीति में मदद करता है।
सर सैयद अहमद खान की प्रशंसा की
उन्होंने सर सैयद अहमद खान की प्रशंसा की और कहा कि सर सैयद का भावनाओं में बह जाने के बजाय असामान्य रूप से संतुलित रवैया था। लचीली मानसिकता, राजनीतिक जागरूकता, सतर्क दिमाग और बातचीत के माध्यम से बेहतर परिणाम प्राप्त करने की समझ सर सैयद के प्रमुख गुण थे, जो आधुनिक समय की कूटनीति के लिए आवश्यक हैं। भारत विश्व स्तर पर अधिक सक्रिय है। उन्होंने एएमयू के छात्रों से संतुलन बनाए रखने, उच्च लक्ष्य रखने और देश के लिए विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने की। सर सैयद अकादमी के निदेशक प्रो. अली मोहम्मद नकवी ने पूर्व राजनयिक का स्वागत किया। सर सैयद अकादमी के उप निदेशक डॉ. मोहम्मद शाहिद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. फायजा अब्बासी ने किया। इस अवसर पर सह कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज आदि मौजूद रहे।
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