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पारा @ 45डिग्री, आसमान से बरसी आग
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सेंटर प्वाइंट पर तेज धूप में छाता लगाकर जाती महिला।
- फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ का अधिकतम तापमान अब राजस्थान के चुरू से केवल दो डिग्री कम है। गर्मी के मौसम में चुरू देश का सबसे गरम इलाका है, जहां पारा 47.6 डिग्री तक पहुंच गया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग में मंगलवार का अधिकतम तापमान 45 डिग्री रिकार्ड हुआ। ये 45 डिग्री वहां था, जहां चारों ओर हरियाली है। इसके अलावा जिले में कई जगह पर तापमान 45.5 से 46 डिग्री तक रहा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय नौतपा चल रहा है, जिससे भीषण गर्मी हो रही है। इसकी नौ दिन की अवधि 2 जून को पूरी होगी। भीषण गर्मी के कारण आमजन से लेकर पशु पक्षी तक बेहाल हैं। दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर केवल जरूरतमंद लोग ही निकले। सड़कों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक सन्नाटा पसर रहा है। दोपहर एक से चार बजे के बीच गर्मी का प्रकोप सर्वाधिक है। लॉकडाउन में घर से काम करने वाले सैकड़ों लोग तापमान अधिक होने के कारण कंप्यूटर सिस्टम के बार-बार हैंग होने से परेशान हैं।
एएमयू के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि अभी तापमान बहुत अधिक है और 25 फीसदी की आर्द्रता है, जिससे नमी भाप बनकर ऊपर उठ रही है और वातावरण में कुछ बादल छाने शुरू हुए हैं। हवाएं ज्यादा दबाव से कम दबाव की ओर चल रही हैं, जिससे 28 से 29 मई तक तेज हवाएं, आंधी और बारिश की संभावना बन रही है। इसके बाद दिन का अधिकतम तापमान 44-45 डिग्री से घट कर 38-39 तक आ जाएगा, जिससे कुछ राहत मिलेगी, लेकिन मानसून में विलंब होगा।
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इसके अलावा इंटर ट्रॉपिकल कनर्वजन जोन (आईटीसी जेड) धीरे-धीरे भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तरी गोलार्द्ध में हिमालय की ओर से शिफ्ट हो रहा है। जहां दक्षिणी हवाएं उत्तरी हवाओं के साथ मिलती हैं, उसे आईटीसी जेड कहते हैं। ये जोन नार्थ लैटीट्यूड 26 से 27 डिग्री पर पहुंच रहा है। राजस्थान के चुरू में जहां तापमान 47 डिग्री के आसपास है, वहां से इन दक्षिणी हवाओं का ऊपर उठना शुरू हो रहा है। जब ये हवाएं आईटीसी जेड में पहुंच कर उत्तर की हवाओं से मिलेंगी तो इसका असर पूरे भारतीय उप महाद्वीप पर होगा और समंदर के पास केरल की ओर मानसून पर दबाव बनेगा। मानसून की बारिश शुरू होगी। ऐसा दो हवाओं के मिलने के कारण बनने वाले दबाव से होता है। मानसून केरल में पहली जून की जगह अब पांच से छह जून तक पहुंचेगा।
खेतों को गीला कर फसल झुलसने से बचाएं
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि इतनी भीषण गर्मी में मक्का और बाजरा की फसल झुलस सकती है। धान की पौध पर भी असर हो सकता है। इससे बचाव के लिए खेत को गीला रखें। खेत को पानी से भरना नहीं है, केवल गीला करना है। पानी भरने से भी फसलों और नर्सरी में लगी पौध को नुकसान हो सकता है। इससे ये गल सकती हैं। इसी तरह से इस मौसम में बाजरा की फसल में होने वाले गिडार नाम के कीट की रोकथाम के लिए प्रेफेनोपास 50 प्रतिशत और सयपर मैथरीन 5 प्रतिशत का घोल डेढ़ लीटर तक बना लें। इस घोल को एक हेक्टेयर खेत में 700 लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें। इससे कीट मर जाएगा। इस तरह से बेल वाली सब्जी तरोई, लौकी, कद्दू में भी खेत को केवल गीला रखें। खरबूज और तरबूज में भी हल्का सा पानी दें।
आम, अमरूद, केला और सब्जियों में नमी बनाएं रखें
जिला उद्यान अधिकारी नंदकिशोर सहानिया ने बताया कि अभी तक बागवानी कर रहे किसान फसलों पर आठ से दस दिन के बीच पानी दे रहे थे। अब उनको ये काम हर तीन दिन में करना है। खीरा, करेला, ककड़ी लौकी, तोरई, टिंडा, भिंडी, फेंच बीन या राजमा की फली, अमरूद, आम, आंवला, केला की फसल में नमी बनाए रखने से ही फसल बचेगी।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय नौतपा चल रहा है, जिससे भीषण गर्मी हो रही है। इसकी नौ दिन की अवधि 2 जून को पूरी होगी। भीषण गर्मी के कारण आमजन से लेकर पशु पक्षी तक बेहाल हैं। दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर केवल जरूरतमंद लोग ही निकले। सड़कों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक सन्नाटा पसर रहा है। दोपहर एक से चार बजे के बीच गर्मी का प्रकोप सर्वाधिक है। लॉकडाउन में घर से काम करने वाले सैकड़ों लोग तापमान अधिक होने के कारण कंप्यूटर सिस्टम के बार-बार हैंग होने से परेशान हैं।
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एएमयू के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि अभी तापमान बहुत अधिक है और 25 फीसदी की आर्द्रता है, जिससे नमी भाप बनकर ऊपर उठ रही है और वातावरण में कुछ बादल छाने शुरू हुए हैं। हवाएं ज्यादा दबाव से कम दबाव की ओर चल रही हैं, जिससे 28 से 29 मई तक तेज हवाएं, आंधी और बारिश की संभावना बन रही है। इसके बाद दिन का अधिकतम तापमान 44-45 डिग्री से घट कर 38-39 तक आ जाएगा, जिससे कुछ राहत मिलेगी, लेकिन मानसून में विलंब होगा।
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इसके अलावा इंटर ट्रॉपिकल कनर्वजन जोन (आईटीसी जेड) धीरे-धीरे भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तरी गोलार्द्ध में हिमालय की ओर से शिफ्ट हो रहा है। जहां दक्षिणी हवाएं उत्तरी हवाओं के साथ मिलती हैं, उसे आईटीसी जेड कहते हैं। ये जोन नार्थ लैटीट्यूड 26 से 27 डिग्री पर पहुंच रहा है। राजस्थान के चुरू में जहां तापमान 47 डिग्री के आसपास है, वहां से इन दक्षिणी हवाओं का ऊपर उठना शुरू हो रहा है। जब ये हवाएं आईटीसी जेड में पहुंच कर उत्तर की हवाओं से मिलेंगी तो इसका असर पूरे भारतीय उप महाद्वीप पर होगा और समंदर के पास केरल की ओर मानसून पर दबाव बनेगा। मानसून की बारिश शुरू होगी। ऐसा दो हवाओं के मिलने के कारण बनने वाले दबाव से होता है। मानसून केरल में पहली जून की जगह अब पांच से छह जून तक पहुंचेगा।
खेतों को गीला कर फसल झुलसने से बचाएं
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि इतनी भीषण गर्मी में मक्का और बाजरा की फसल झुलस सकती है। धान की पौध पर भी असर हो सकता है। इससे बचाव के लिए खेत को गीला रखें। खेत को पानी से भरना नहीं है, केवल गीला करना है। पानी भरने से भी फसलों और नर्सरी में लगी पौध को नुकसान हो सकता है। इससे ये गल सकती हैं। इसी तरह से इस मौसम में बाजरा की फसल में होने वाले गिडार नाम के कीट की रोकथाम के लिए प्रेफेनोपास 50 प्रतिशत और सयपर मैथरीन 5 प्रतिशत का घोल डेढ़ लीटर तक बना लें। इस घोल को एक हेक्टेयर खेत में 700 लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें। इससे कीट मर जाएगा। इस तरह से बेल वाली सब्जी तरोई, लौकी, कद्दू में भी खेत को केवल गीला रखें। खरबूज और तरबूज में भी हल्का सा पानी दें।
आम, अमरूद, केला और सब्जियों में नमी बनाएं रखें
जिला उद्यान अधिकारी नंदकिशोर सहानिया ने बताया कि अभी तक बागवानी कर रहे किसान फसलों पर आठ से दस दिन के बीच पानी दे रहे थे। अब उनको ये काम हर तीन दिन में करना है। खीरा, करेला, ककड़ी लौकी, तोरई, टिंडा, भिंडी, फेंच बीन या राजमा की फली, अमरूद, आम, आंवला, केला की फसल में नमी बनाए रखने से ही फसल बचेगी।